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फतेहपुरः हादसों की वजह पता, रोकने के बंदोबस्त लापता
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कैंची मोड़ के सामने हाईवे पर कोई संकेतांक नहीं। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। जिले में औसतन हर रोज एक व्यक्ति की मौत सड़क हादसे में होती है। हादसों को रोकने के लिए 25 दुर्घटना बाहुल्य स्थान (ब्लैक स्पॉट) चिह्नित कर बचाव के लिए रिपोर्ट बनाई गई है। यह रिपोर्ट पिछले तीन सालों में हुए हादसों की समीक्षा कर तैयार की गई है। हादसे रोकने के लिए इंतजाम कराने की जिम्मेदारी एनएचआई व पीडब्ल्यूडी विभाग को दी गई है। इसके बावजूद हादसे रोकने के इंतजाम नहीं किए गए हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति पुलिस, परिवहन, एनएचआई और प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग की संयुक्त कमेटी जल्द बैठक कर बचाव के बंदोबस्त की समीक्षा करेगी। (संवाद)
शहर में प्रयागराज से प्रवेश के दौरान लोधीगंज चौराहा दुर्घटना बाहुल्य स्थान है। यहां पर एनएचआई को ब्रेकर और संकेतांक लगाना था। एनएचआई की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। खागा-किशनपुर पीडब्ल्यूडी मार्ग पर हरदों औलिया बाबा मजार के पास अक्सर हादसे होते हैं। कमेटी के सुझाव के बाद भी स्पीड ब्रेकर व दुर्घटना बाहुल्य का संकेतांक नहीं लगा है। यहां साल में 14 लोगों की मौत हुई है। आए दिन लोगों की मौत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कैंची और कोराईं मोड़ पर दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र के संकेतांक नहीं लगे हैं। एनएच 46 हुसैनगंज लखनऊ मार्ग पर दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र बेेेरागढ़ीवा से ब्लैक स्पॉट संकेत, रिपीटेड बार लाइन गायब है। ब्लैक स्पॉट देवरी मोड़, सातमील, चंदीपुर चौराहा में संकेेतांक नहीं लगे हैं। चंदीपुर चौराहा का बोर्ड भी झाड़ियों में छिप गया है। छिवली, औंग खदरा मोड़ व बड़ाहार पर संकेतांक लगे पाए गए।
बांदा-बहुआ पीडब्ल्यूडी मार्ग पर मौरंग व गिट्टी लदे ट्रकों से अक्सर हादसे होते हैं। सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। यह गड्ढे हादसों का कारण बनते हैं। बहुआ के पास स्पीड ब्रेकर व संकेतांक नहीं है। मुत्तौर, दतौली, सिधांव में भी स्पीड ब्रेकर, संकेतांक नहीं हैं। तीनों जगहों पर सड़क की मरम्मत का सुझाव है। रिपोर्ट में तीन साल में इन 25 स्थानों पर हुई मौत की जानकरी दी गई है। इसके मुताबिक लोधीगंज में एक, कैंची मोड़ पर तीन, कोराईं मोड़ पर आठ, चौडगरा में दो, मौहार में चार, दूधी कागार मोड़ पर दो, बड़ाहार में 10 लोगों की मौत हादसों में हुई। खदरा में एक, छिवली में तीन, भोगलपुर में तीन, हरदों में 14, सतनरैनी में दो, सातमील पर सात, बेरागढ़ीवा पर 11, चंदीपुर में पांच लोगों की जान गई। देवरी मोड़ पर पांच, सिधांव में आठ, बहुआ में आठ, मुत्तौर में छह, दतौली में पांच, खटौली में तीन, प्रेमनगर में दो, रावतपुर पुलिया पर चार, शाह कस्बा में दो लोगों की मौत हुईं हैं।
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शहर में प्रयागराज से प्रवेश के दौरान लोधीगंज चौराहा दुर्घटना बाहुल्य स्थान है। यहां पर एनएचआई को ब्रेकर और संकेतांक लगाना था। एनएचआई की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। खागा-किशनपुर पीडब्ल्यूडी मार्ग पर हरदों औलिया बाबा मजार के पास अक्सर हादसे होते हैं। कमेटी के सुझाव के बाद भी स्पीड ब्रेकर व दुर्घटना बाहुल्य का संकेतांक नहीं लगा है। यहां साल में 14 लोगों की मौत हुई है। आए दिन लोगों की मौत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कैंची और कोराईं मोड़ पर दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र के संकेतांक नहीं लगे हैं। एनएच 46 हुसैनगंज लखनऊ मार्ग पर दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र बेेेरागढ़ीवा से ब्लैक स्पॉट संकेत, रिपीटेड बार लाइन गायब है। ब्लैक स्पॉट देवरी मोड़, सातमील, चंदीपुर चौराहा में संकेेतांक नहीं लगे हैं। चंदीपुर चौराहा का बोर्ड भी झाड़ियों में छिप गया है। छिवली, औंग खदरा मोड़ व बड़ाहार पर संकेतांक लगे पाए गए।
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बांदा-बहुआ पीडब्ल्यूडी मार्ग पर मौरंग व गिट्टी लदे ट्रकों से अक्सर हादसे होते हैं। सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। यह गड्ढे हादसों का कारण बनते हैं। बहुआ के पास स्पीड ब्रेकर व संकेतांक नहीं है। मुत्तौर, दतौली, सिधांव में भी स्पीड ब्रेकर, संकेतांक नहीं हैं। तीनों जगहों पर सड़क की मरम्मत का सुझाव है। रिपोर्ट में तीन साल में इन 25 स्थानों पर हुई मौत की जानकरी दी गई है। इसके मुताबिक लोधीगंज में एक, कैंची मोड़ पर तीन, कोराईं मोड़ पर आठ, चौडगरा में दो, मौहार में चार, दूधी कागार मोड़ पर दो, बड़ाहार में 10 लोगों की मौत हादसों में हुई। खदरा में एक, छिवली में तीन, भोगलपुर में तीन, हरदों में 14, सतनरैनी में दो, सातमील पर सात, बेरागढ़ीवा पर 11, चंदीपुर में पांच लोगों की जान गई। देवरी मोड़ पर पांच, सिधांव में आठ, बहुआ में आठ, मुत्तौर में छह, दतौली में पांच, खटौली में तीन, प्रेमनगर में दो, रावतपुर पुलिया पर चार, शाह कस्बा में दो लोगों की मौत हुईं हैं।
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