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बिजली दिया धोखा, ठप हो गए कारखाना
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असोथर। नए खंभे लगाए जाने से हो रही बिजली कटौती के कारण लघु उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। करीब 10 दिन से रात में ही बिजली आपूर्ति हो रही है, उसमें भी तीन से चार घंटे ही बिजली लोगों को मिल रही है।
इससे आटा चक्की, तेल पेराई और फर्नीचर आदि का कामकाज प्रभावित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खंभे व तार बदले जा रहे हैं, अभी 15 दिनों तक बिजली संकट बना रहेगा।
राधानगर ट्रांसमिशन से उपकेंद्र को जाने वाली 33 केवीए लाइन गाजीपुर से असोथर कस्बे तक खंभों की दूरी 100 मीटर से अधिक है। 10 दिनों से सभी खंभों के बीच-बीच नए खंभे लगाए जा रहे हैं।
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इसके लिए सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी जा रही है लेकिन आपूर्ति रात10 बजे के बाद ही हो पा रही है। कस्बा के आटा चक्की संचालक विजय ने बताया कि दिन में बिजली न आने के कारण गेहूं पिसाई का काम बंद हो गया है।
ग्राहकों को लौटाना पड़ रहा है। थोड़ा सा काम इंजन से चलने वाली चक्की से किया जा रहा है। इसी तरह सुभाष कुमार कस्बे में दरवाजे, खिड़की व अन्य लोहे का सामान बनाने का कारखाना लगाए हुए हैं।
दिन में बिजली न होने से व्यापर प्रभावित है। बौंडर गांव के किसान अरविंद ने बताया कि धान की नर्सरी डालने के लिए खेत में पानी लगाया गया था, बिजली की कमी से पानी सूख गया।
असोथर। कस्बा के विद्युत उपकेंद्र से करीब 250 गांव को बिजली सप्लाई दी जाती है। इसके लिए थरियांव, नरैनी, घरवासीपुर, गाजीपुर, असोथर और जरौली फीडर हैं।
इन फीडरों से घरेलू कनेक्शन के अलावा तीन हजार ट्यूबवेल हैं। पांच पानी की टंकी, 350 आटा, चक्की और 150 दरवाजा, खिड़की बनाने के कारखाना लगे हैं। बिजली कटौती से सभी की दिक्कतें बढ़ गईं हैं।
नए खंभे लगवाने के साथ ही जर्जर तार भी बदले जा रहे हैं। शाम छह बजे हाईटेंशन लाइन सही करने का काम तो बंद करा दिया जाता है, लेकिन रोस्टिंग होने के कारण बिजली कटौती बनी रहती है।
अभी 15 दिन का समय तार बदलने में और लगेगा। इसके बाद बिजली सप्लाई रोस्टर के हिसाब से बहाल हो जाएगी।
- मोहम्मद जाहिद सिद्दीकी, उपखंड अधिकारी असोथर
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इससे आटा चक्की, तेल पेराई और फर्नीचर आदि का कामकाज प्रभावित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खंभे व तार बदले जा रहे हैं, अभी 15 दिनों तक बिजली संकट बना रहेगा।
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राधानगर ट्रांसमिशन से उपकेंद्र को जाने वाली 33 केवीए लाइन गाजीपुर से असोथर कस्बे तक खंभों की दूरी 100 मीटर से अधिक है। 10 दिनों से सभी खंभों के बीच-बीच नए खंभे लगाए जा रहे हैं।
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इसके लिए सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी जा रही है लेकिन आपूर्ति रात10 बजे के बाद ही हो पा रही है। कस्बा के आटा चक्की संचालक विजय ने बताया कि दिन में बिजली न आने के कारण गेहूं पिसाई का काम बंद हो गया है।
ग्राहकों को लौटाना पड़ रहा है। थोड़ा सा काम इंजन से चलने वाली चक्की से किया जा रहा है। इसी तरह सुभाष कुमार कस्बे में दरवाजे, खिड़की व अन्य लोहे का सामान बनाने का कारखाना लगाए हुए हैं।
दिन में बिजली न होने से व्यापर प्रभावित है। बौंडर गांव के किसान अरविंद ने बताया कि धान की नर्सरी डालने के लिए खेत में पानी लगाया गया था, बिजली की कमी से पानी सूख गया।
असोथर। कस्बा के विद्युत उपकेंद्र से करीब 250 गांव को बिजली सप्लाई दी जाती है। इसके लिए थरियांव, नरैनी, घरवासीपुर, गाजीपुर, असोथर और जरौली फीडर हैं।
इन फीडरों से घरेलू कनेक्शन के अलावा तीन हजार ट्यूबवेल हैं। पांच पानी की टंकी, 350 आटा, चक्की और 150 दरवाजा, खिड़की बनाने के कारखाना लगे हैं। बिजली कटौती से सभी की दिक्कतें बढ़ गईं हैं।
नए खंभे लगवाने के साथ ही जर्जर तार भी बदले जा रहे हैं। शाम छह बजे हाईटेंशन लाइन सही करने का काम तो बंद करा दिया जाता है, लेकिन रोस्टिंग होने के कारण बिजली कटौती बनी रहती है।
अभी 15 दिन का समय तार बदलने में और लगेगा। इसके बाद बिजली सप्लाई रोस्टर के हिसाब से बहाल हो जाएगी।
- मोहम्मद जाहिद सिद्दीकी, उपखंड अधिकारी असोथर