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Fatehpur News: जाति और पार्टी हवा का रुख देखता है विधानसभा का मतदाता
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फतेहपुर। जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में कई स्थानीय मुद्दे हैं। इन पर समय-समय पर मांग भी होती है। चुनाव में मुद्दे उठाए भी जाते हैं लेकिन मतदान जातिगत और पार्टी की हवा पर होता है। यही वजह है कि दो लोकसभा और दो बार ही विधानसभा में भाजपा के प्रत्याशी ने परचरम लहराया। आगामी लोकसभा चुनाव भी जातिगत आंकड़ों में बंटता दिख रहा है। इस सीट में कुर्मी, निषाद और ब्राम्हण की बाहुल्यता है।
जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र की एक सीमा कानपुर से सटी है, वहीं दूसरी सीमा पर युमना नदी के पार हमीरपुर और बारा के पास रिंद नदी बांदा जिला से बंटवारा करती है। यमुना कटरी इलाका छोड़कर जमीन उपजाऊ है। यहां का किसान समृद्ध होने के साथ ही राजनीतिक हनक भी रखता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र से वर्तमान में कई नेता प्रदेश स्तर तक अपनी धमक बनाए हुए हैं। यहां का सबसे बड़ा मुद्दा नहर में पानी लाने का है। ये समस्या साल 1889 के पहले से बनी हुई है। हर चुनाव पर यह मुद्दा उठाया जाता है। इसी तरह रिंद नदी में पुल की भी मांग उठती है। लेकिन ये मुद्दे कभी भी मतदान को प्रभावित नहीं कर सके हैं। मतदाताओं ने जातिगत और पार्टी के बयारों में बहकर वोट किया।
फतेहपुर लोकसभा चुनावों में जहानाबाद विधानसभा से ही जीत का रास्ता निकलता है। लोकसभा के पिछले दो चुनावों में नजर डालें तो इस विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति को एक लाख से अधिक वोट मिले। उन्होंने 2014 में 60 हजार से अधिक वोटों की लीड ली थी। वहीं 2019 के चुनाव में ये लीड 45 हजार से अधिक थी। इस चुनाव में बसपा और सपा गठबंधन से लड़ी थी। इस चुनाव में भाजपा ने तीसरी बार साध्वी निरंजन ज्योति को उतारा है, वहीं सपा से नरेश उत्तम मैदान में हैं, जो जहानाबाद क्षेत्र के ही हैं। वहीं बसपा से डॉ. मनीष सचान भी अपनी ताकत का अहसास करा रहे हैं। इस विधानसभा से दो बार से बढ़त बना रही भाजपा के लिए मुफीद मानी जा रही ये सीट इस बार जरूर कांटे की बनी हुई है। सपा को कुर्मी बिरादरी का समर्थन मिल रहा है, जो पिछले चुनावों की तरह ही है। लेकिन भाजपा को मिलने वाले वोट ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, निषाद समेत अन्य पिछड़ा वर्ग पर सेंधमारी हुई, तो दो बार की विधानसभा से जबरदस्त बढ़त देने वाली सीट भारी पड़ सकती है। यहां के जातिगत समीकरण और पार्टी के रुख पर वोटिंग का आज भी जोर है।
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पिछले दो लोकसभा चुनावों पर मतदाताओं का रुझान
लोकसभा 2014 और 19 के जहानाबाद विधानसभा में पार्टीवार मिले आंकड़ों पर नजर डालें, तो भाजपा का पलड़ा भारी पड़ा है। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी साध्वी को 1 लाख 21 सौ से अधिक मत मिले थे। वहीं बसपा से अफजल अंसारी को 36 हजार 5 सौ और सपा से राकेश सचान को 30 हजार से अधिक मत मिले थे। इसमें बसपा का कैडर वोट पार्टी के खाते में गया। वहीं सपा को कुर्मी बिरादरी और अन्य समाज का वोट मिला। इसके बाद भी भाजपा की लहर और जातिगत समीकरण ने साध्वी को करीब 65 हजार की लीड दी। इसी तरह वर्ष 2019 के चुनावी में भाजपा प्रत्याशी साध्वी को 1 लाख 25 सौ से अधिक वोट मिले। सपा के समर्थन के साथ बसपा से उतरे सुखदेव प्रसाद वर्मा को 54 हजार से अधिक मत मिले। वहीं कांग्रेस से उतरे राकेश सचान को 20 हजार से भी कम वोट से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में भी सपा बसपा की एकजुटता के बाद वोट 2014 के बराबर ही मिला। इस चुनाव में भी भाजपा को 45 हजार से अधिक वोटों से बढ़त मिली। इसी तरह से भाजपा के लिए ये सीट अब तक फायदे की ही साबित हुई है।
विधानसभा 2022 में भी बनाई बढ़त
जहानाबाद विधानसभा सीट भाजपा के खाते में हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने राजेंद्र सिंह पटेल को मैदान में उतारा। बिंदकी में निवास होने के कारण स्थानीयता का मुद्दा बनाया गया, लेकिन भाजपा के मजबूत वोट बैंक से राजेंद्र पटेल को 78 हजार से अधिक वोट मिले। उन्होंने अपने विरोधी सपा प्रत्याशी मदन गोपाल वर्मा से 19 हजार से अधिक मत से जीत दर्ज की। उससे पहले इसी विधानसभा से भाजपा समर्थित अपना दल (एस) जय कुमार जैकी के सिर जीत का सेहरा बंधा था।
तिकड़ी में वोटो का होगा बंटवारा
फतेहपुर। लोकसभा चुनाव में जहानाबाद विधानसभा सीट के मतदाताओं की अहम भूमिका रहती है। पिछले चुनावों पर नजर डालें, तो सपा और बसपा दोनों को अच्छे वोट मिले। भाजपा को ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, निषाद और अन्य पिछड़ी जातियों का साथ मिलता रहा है। इससे भाजपा को लीड मिलती रही है। लेकिन इस बार सपा प्रत्याशी नरेश उत्तम जहानाबाद के ही हैं। उनका स्थानीय असर दिखेगा। कुर्मी बिरादरी एकजुटता के साथ बढ़ेगी। वहीं यादव और मुस्लिम का साथ उन्हें मजबूत बनाएगा। अन्य जातियां को साथ मिला, तो सपा मजबूती से आगे बढ़ेगी, लेकिन डॉ. मनीष सचान राह की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। उन्हें बसपा के साथ अपने बिरादरी का वोट का भरोसा है। ऐसे में सीधा नुकसान सपा को होगा।
लोगों की बात
फोटो-16-सर्वेश तिवारी
न्योरी जलालपुर के सर्वेश तिवारी ने बताया कि नहरों के सूखने से सब्जी वाली फसलें नहीं तैयार हो पाती है।पैदावार में भी कमी आई है, जिससे किसान गरीबी की ओर जा रहा है। बस चुनाव आते ही मुद्दा गरम हो जाता है।
बिजौली के लौबीर सिंह सचान ने बताया कि गांव की अधिकांश जमीन नहर के किनारे है। किसानों को निजी नलकूप से सिंचाई महंगी पड़ती है, जिससे आमदनी कम होती है। किसान अपने परिवार के आवश्यक खर्चे भी पूरे नहीं कर पाता है। जन प्रतिनिधियों को प्राथमिकता से इस समस्या को हल करना चाहिए।
मकरंदपुर के राम प्रसाद निषाद ने बताया कि नहरों में पानी न आने के कारण इस क्षेत्र का जल स्तर बहुत नीचे चला गया है, जिससे निजी नलकूप भी जवाब दे रहे हैं। माननीयों को इस समस्या के लिए संवेदनापूर्वक विचार करना चाहिए।
जजमोइया निवासी पप्पू प्रजापति ने बताया कि यदि नहरों में पानी आ जाए तो जल स्तर बढ़ जाएगा। किसानों की आर्थिक स्थिति भी ठीक हो जाएगी। इस पर राजनीतिक आश्वासन के बजाय ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।
एक नजर में जातीय मतदाता
कुर्मी - 45 हजार
निषाद-45 हजार
ब्राम्हण-43 हजार
क्षत्रिय- 22 हजार
मुस्लिम-20 हजार
एससी- 52 हजार
यादव-14 हजार
अन्य पिछड़ा- 70 हजार
जहानाबाद विधानसभा के मतदाता
जहानाबाद विधानसभा में कुल मतदाता
कुल मतदाता- 3,15,494
पुरुष मतदाता- 1,70,895
महिला मतदाता-1,44,581
ट्रांसजेंडर-18
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जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र की एक सीमा कानपुर से सटी है, वहीं दूसरी सीमा पर युमना नदी के पार हमीरपुर और बारा के पास रिंद नदी बांदा जिला से बंटवारा करती है। यमुना कटरी इलाका छोड़कर जमीन उपजाऊ है। यहां का किसान समृद्ध होने के साथ ही राजनीतिक हनक भी रखता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र से वर्तमान में कई नेता प्रदेश स्तर तक अपनी धमक बनाए हुए हैं। यहां का सबसे बड़ा मुद्दा नहर में पानी लाने का है। ये समस्या साल 1889 के पहले से बनी हुई है। हर चुनाव पर यह मुद्दा उठाया जाता है। इसी तरह रिंद नदी में पुल की भी मांग उठती है। लेकिन ये मुद्दे कभी भी मतदान को प्रभावित नहीं कर सके हैं। मतदाताओं ने जातिगत और पार्टी के बयारों में बहकर वोट किया।
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फतेहपुर लोकसभा चुनावों में जहानाबाद विधानसभा से ही जीत का रास्ता निकलता है। लोकसभा के पिछले दो चुनावों में नजर डालें तो इस विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति को एक लाख से अधिक वोट मिले। उन्होंने 2014 में 60 हजार से अधिक वोटों की लीड ली थी। वहीं 2019 के चुनाव में ये लीड 45 हजार से अधिक थी। इस चुनाव में बसपा और सपा गठबंधन से लड़ी थी। इस चुनाव में भाजपा ने तीसरी बार साध्वी निरंजन ज्योति को उतारा है, वहीं सपा से नरेश उत्तम मैदान में हैं, जो जहानाबाद क्षेत्र के ही हैं। वहीं बसपा से डॉ. मनीष सचान भी अपनी ताकत का अहसास करा रहे हैं। इस विधानसभा से दो बार से बढ़त बना रही भाजपा के लिए मुफीद मानी जा रही ये सीट इस बार जरूर कांटे की बनी हुई है। सपा को कुर्मी बिरादरी का समर्थन मिल रहा है, जो पिछले चुनावों की तरह ही है। लेकिन भाजपा को मिलने वाले वोट ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, निषाद समेत अन्य पिछड़ा वर्ग पर सेंधमारी हुई, तो दो बार की विधानसभा से जबरदस्त बढ़त देने वाली सीट भारी पड़ सकती है। यहां के जातिगत समीकरण और पार्टी के रुख पर वोटिंग का आज भी जोर है।
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पिछले दो लोकसभा चुनावों पर मतदाताओं का रुझान
लोकसभा 2014 और 19 के जहानाबाद विधानसभा में पार्टीवार मिले आंकड़ों पर नजर डालें, तो भाजपा का पलड़ा भारी पड़ा है। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी साध्वी को 1 लाख 21 सौ से अधिक मत मिले थे। वहीं बसपा से अफजल अंसारी को 36 हजार 5 सौ और सपा से राकेश सचान को 30 हजार से अधिक मत मिले थे। इसमें बसपा का कैडर वोट पार्टी के खाते में गया। वहीं सपा को कुर्मी बिरादरी और अन्य समाज का वोट मिला। इसके बाद भी भाजपा की लहर और जातिगत समीकरण ने साध्वी को करीब 65 हजार की लीड दी। इसी तरह वर्ष 2019 के चुनावी में भाजपा प्रत्याशी साध्वी को 1 लाख 25 सौ से अधिक वोट मिले। सपा के समर्थन के साथ बसपा से उतरे सुखदेव प्रसाद वर्मा को 54 हजार से अधिक मत मिले। वहीं कांग्रेस से उतरे राकेश सचान को 20 हजार से भी कम वोट से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में भी सपा बसपा की एकजुटता के बाद वोट 2014 के बराबर ही मिला। इस चुनाव में भी भाजपा को 45 हजार से अधिक वोटों से बढ़त मिली। इसी तरह से भाजपा के लिए ये सीट अब तक फायदे की ही साबित हुई है।
विधानसभा 2022 में भी बनाई बढ़त
जहानाबाद विधानसभा सीट भाजपा के खाते में हैं। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने राजेंद्र सिंह पटेल को मैदान में उतारा। बिंदकी में निवास होने के कारण स्थानीयता का मुद्दा बनाया गया, लेकिन भाजपा के मजबूत वोट बैंक से राजेंद्र पटेल को 78 हजार से अधिक वोट मिले। उन्होंने अपने विरोधी सपा प्रत्याशी मदन गोपाल वर्मा से 19 हजार से अधिक मत से जीत दर्ज की। उससे पहले इसी विधानसभा से भाजपा समर्थित अपना दल (एस) जय कुमार जैकी के सिर जीत का सेहरा बंधा था।
तिकड़ी में वोटो का होगा बंटवारा
फतेहपुर। लोकसभा चुनाव में जहानाबाद विधानसभा सीट के मतदाताओं की अहम भूमिका रहती है। पिछले चुनावों पर नजर डालें, तो सपा और बसपा दोनों को अच्छे वोट मिले। भाजपा को ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, निषाद और अन्य पिछड़ी जातियों का साथ मिलता रहा है। इससे भाजपा को लीड मिलती रही है। लेकिन इस बार सपा प्रत्याशी नरेश उत्तम जहानाबाद के ही हैं। उनका स्थानीय असर दिखेगा। कुर्मी बिरादरी एकजुटता के साथ बढ़ेगी। वहीं यादव और मुस्लिम का साथ उन्हें मजबूत बनाएगा। अन्य जातियां को साथ मिला, तो सपा मजबूती से आगे बढ़ेगी, लेकिन डॉ. मनीष सचान राह की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। उन्हें बसपा के साथ अपने बिरादरी का वोट का भरोसा है। ऐसे में सीधा नुकसान सपा को होगा।
लोगों की बात
फोटो-16-सर्वेश तिवारी
न्योरी जलालपुर के सर्वेश तिवारी ने बताया कि नहरों के सूखने से सब्जी वाली फसलें नहीं तैयार हो पाती है।पैदावार में भी कमी आई है, जिससे किसान गरीबी की ओर जा रहा है। बस चुनाव आते ही मुद्दा गरम हो जाता है।
बिजौली के लौबीर सिंह सचान ने बताया कि गांव की अधिकांश जमीन नहर के किनारे है। किसानों को निजी नलकूप से सिंचाई महंगी पड़ती है, जिससे आमदनी कम होती है। किसान अपने परिवार के आवश्यक खर्चे भी पूरे नहीं कर पाता है। जन प्रतिनिधियों को प्राथमिकता से इस समस्या को हल करना चाहिए।
मकरंदपुर के राम प्रसाद निषाद ने बताया कि नहरों में पानी न आने के कारण इस क्षेत्र का जल स्तर बहुत नीचे चला गया है, जिससे निजी नलकूप भी जवाब दे रहे हैं। माननीयों को इस समस्या के लिए संवेदनापूर्वक विचार करना चाहिए।
जजमोइया निवासी पप्पू प्रजापति ने बताया कि यदि नहरों में पानी आ जाए तो जल स्तर बढ़ जाएगा। किसानों की आर्थिक स्थिति भी ठीक हो जाएगी। इस पर राजनीतिक आश्वासन के बजाय ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।
एक नजर में जातीय मतदाता
कुर्मी - 45 हजार
निषाद-45 हजार
ब्राम्हण-43 हजार
क्षत्रिय- 22 हजार
मुस्लिम-20 हजार
एससी- 52 हजार
यादव-14 हजार
अन्य पिछड़ा- 70 हजार
जहानाबाद विधानसभा के मतदाता
जहानाबाद विधानसभा में कुल मतदाता
कुल मतदाता- 3,15,494
पुरुष मतदाता- 1,70,895
महिला मतदाता-1,44,581
ट्रांसजेंडर-18