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मोबाइल टावरों का डीजल भी बेच रहे
Fatehpur
Updated Mon, 22 Sep 2014 05:31 AM IST
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फतेहपुर। मोबाइल टावरों का फ्यूल धड़ल्ले से बिक रहा है। टॉवर में तैनात कर्मचारी कंपनियों से मिलने वाले फ्यूल बजट में खेल करते हैं। नतीजतन आए दिन नेटवर्क समस्या पैदा हो रही है। बिजली न रहने पर मोबाइल टॉवर सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। फिलिंग सेंटर से 10 से 15 रुपये प्रति लीटर सस्ता डीजल मिलने पर टॉवर के फ्यूल से नलकूप व ट्रैक्टर चलाए जा रहे हैं। जिले में सरकारी सेवा प्रदत्ता बीएसएनएल के अलावा वोडाफोन, आइडिया, एयरटेल, एयरसेल, रिलायंस, यूनीनार समेत अन्य प्राइवेट कंपनियां सेवाएं दे रहीं हैं। ग्रामीणांचल में बिजली न रहने पर अक्सर नेटवर्क की समस्या पैदा रहती है। यह समस्या जेनरेटर चला कर दूर की जा सकती हैं क्योंकि मोबाइल कंपनियां बिजली न रहने पर टॉवर के संचालन के लिए फ्यूल की व्यवस्था करती हैं। बावजूद इस व्यवस्था का लाभ उपभोक्ता को नहीं मिल पा रहा है। सूत्रोें की माने तो ज्यादातर मोबाइल टॉवरों से डीजल की बिक्री की जाती है। टॉवर कर्मी डीजल को सस्ता बेच कर नेटवर्क का कबाड़ा कर रहे हैें। बहुआ के रमेश चंद्र कहते हैं कि क्षेत्र में लगे मोबाइल टावरों पर तमाम किसान निर्भर हैं। वे सस्ते दाम पर जरीकेन में डीजल ले जाते हैं। जाफरगंज के रमेश कुमार बताते हैं कि बिजली गुल होने के बाद मोबाइल से बात करना मुमकिन नहीं है। टॉवरकर्मी जेनरेटर चलाने के बजाए टॉवर सेंटर पर ताला डाल देते हैं।
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