{"_id":"36-129126","slug":"Fatehpur-129126-36","type":"story","status":"publish","title_hn":"तैनाती के बाद ही विवाद से घिर गए थे एसडीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तैनाती के बाद ही विवाद से घिर गए थे एसडीएम
Fatehpur
Updated Fri, 19 Apr 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहपुर। अनाज घोटाले में निलंबित बिंदकी एसडीएम बलराम सिंह यादव तहसील में तैनाती के बाद ही चर्चा में आ गए थे। फतेहपुर में सपाइयों के बीच चल रही गुटबाजी में एसडीएम भी एक हिस्सा थे। पूर्व मंत्री अचल सिंह का प्रापर्टी विवाद, कोटेदारों को निलंबित करने, बिना कार्रवाई के दोबारा कोटा बहाल करने और कुछ एक गुट के नेताओं के कहने पर प्रधानों पर बिना किसी कारण कार्रवाई करने की शिकायत मुख्यमंत्री के दरबार में भी पहुंच चुकी थी।
बिंदकी एसडीएम को बिंदकी में तैनाती मिले आठ माह हो चुके थे। बिंदकी तहसील से पहले एसडीएम बलराम सिंह यादव रामपुर तहसील में एसडीएम थे। एसडीएम खासा चर्चा में तब आए जब पूर्व मंत्री अचल सिंह और प्रद्युम्न सिंह के बीच प्रापर्टी विवाद का मामला फंसा। आरोप है कि तत्कालीन एसपी राजेंद्र सिंह छुट्टी पर गए थे तभी एएसपी से बातचीत करके अचल सिंह पर जबरदस्ती मुकदमा लिखवा दिया गया था। जब अचल सिंह अपने प्रापर्टी विवाद का सुबूत और आरटीआई दस्तावेजों के साथ एसडीएम के पास पहुंचे तो जांच करवाने में आनाकानी की जाने लगी। बताया जा रहा है कि इस आनाकानी के पीछे सपा के दूसरे धड़े का हाथ था। क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक कोटेदारों ने भी मुख्यमंत्री कार्यालय में पत्र भेजकर शिकायत कर रखी थी कि एसडीएम बलराम सिंह यादव पहले कोटे को निलंबित करते हैं और फिर ले देकर कोटा बहाल कर देते हैं। यही नहीं कुछ प्रधानों ने भी शिकायत की थी कि एक बड़े जनप्रतिनिधि के कहने पर एसडीएम अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं।
विज्ञापन
बिंदकी एसडीएम को बिंदकी में तैनाती मिले आठ माह हो चुके थे। बिंदकी तहसील से पहले एसडीएम बलराम सिंह यादव रामपुर तहसील में एसडीएम थे। एसडीएम खासा चर्चा में तब आए जब पूर्व मंत्री अचल सिंह और प्रद्युम्न सिंह के बीच प्रापर्टी विवाद का मामला फंसा। आरोप है कि तत्कालीन एसपी राजेंद्र सिंह छुट्टी पर गए थे तभी एएसपी से बातचीत करके अचल सिंह पर जबरदस्ती मुकदमा लिखवा दिया गया था। जब अचल सिंह अपने प्रापर्टी विवाद का सुबूत और आरटीआई दस्तावेजों के साथ एसडीएम के पास पहुंचे तो जांच करवाने में आनाकानी की जाने लगी। बताया जा रहा है कि इस आनाकानी के पीछे सपा के दूसरे धड़े का हाथ था। क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक कोटेदारों ने भी मुख्यमंत्री कार्यालय में पत्र भेजकर शिकायत कर रखी थी कि एसडीएम बलराम सिंह यादव पहले कोटे को निलंबित करते हैं और फिर ले देकर कोटा बहाल कर देते हैं। यही नहीं कुछ प्रधानों ने भी शिकायत की थी कि एक बड़े जनप्रतिनिधि के कहने पर एसडीएम अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं।
विज्ञापन