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गर्मी के तेवर तीखे, आसमान से बरसी आग
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फतेहपुर। मौसम का मिजाज गर्म है, लेकिन पारा कभी कम, कभी ज्यादा हो रहा है। बुधवार को शहर का अधिकतम तापमान 43 डिग्री तो न्यूनतम 29 डिग्री दर्ज किया गया। दोपहर में लू के थपेड़ों ने आसमान से आग बरसने का अहसास कराया।
गर्म हवाओं के साथ आसमान से आग बरस रही है। भीषण गर्मी के कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम की मार इस कदर पड़ रही है कि लोग दोपहर में अपने घरों से निकलने में डरने लगे। बुधवार को दिन निकलते ही उमस व लू के थपेड़ों का अहसास हुआ। दोपहर मेें गर्मी इतनी बढ़ गई कि घर से बाहर निकलने पर
ऐसा लग रहा था कि आसमान से आग बरस रही है। इस एक सप्ताह में रोज पारा बढ़ रहा है। धूप और लू से लोग परेशान हैं। गर्मी से लोगों के चेहरे झुलस जा रहे हैं। जरूरी काम पडने पर ही लोग घर से बाहर निकले। वह भी झुलसाने वाली गर्मी से बचने के लिए सड़क किनारे के मकान व आसपास पेड़ों की छाया में आराम करते दिखे। सुबह नौ बजे से 10 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चली। लोग अपने चेहरे को ढककर बाजार में निकले।
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तापमान और गर्मी बढ़ने के पीछे ओजोन परत और ग्लोबल वार्मिंग प्रमुख वजह है। सूरज के ऊपर प्रचंड शौर्य, ज्वालाओं और शौर्य लपटों का निर्माण भी एक कारण है। वृक्षों की कटान, प्रदूषण का तेजी से बढ़ना और प्लास्टिक कचरे का सही ढंग से निस्तारण न होना भी गर्मी बढ़ने की वजह है। डॉ. अनिरुद्ध दुबे, मौसम वैज्ञानिक
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गर्म हवाओं के साथ आसमान से आग बरस रही है। भीषण गर्मी के कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम की मार इस कदर पड़ रही है कि लोग दोपहर में अपने घरों से निकलने में डरने लगे। बुधवार को दिन निकलते ही उमस व लू के थपेड़ों का अहसास हुआ। दोपहर मेें गर्मी इतनी बढ़ गई कि घर से बाहर निकलने पर
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ऐसा लग रहा था कि आसमान से आग बरस रही है। इस एक सप्ताह में रोज पारा बढ़ रहा है। धूप और लू से लोग परेशान हैं। गर्मी से लोगों के चेहरे झुलस जा रहे हैं। जरूरी काम पडने पर ही लोग घर से बाहर निकले। वह भी झुलसाने वाली गर्मी से बचने के लिए सड़क किनारे के मकान व आसपास पेड़ों की छाया में आराम करते दिखे। सुबह नौ बजे से 10 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चली। लोग अपने चेहरे को ढककर बाजार में निकले।
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तापमान और गर्मी बढ़ने के पीछे ओजोन परत और ग्लोबल वार्मिंग प्रमुख वजह है। सूरज के ऊपर प्रचंड शौर्य, ज्वालाओं और शौर्य लपटों का निर्माण भी एक कारण है। वृक्षों की कटान, प्रदूषण का तेजी से बढ़ना और प्लास्टिक कचरे का सही ढंग से निस्तारण न होना भी गर्मी बढ़ने की वजह है। डॉ. अनिरुद्ध दुबे, मौसम वैज्ञानिक