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कांग्रेस ने अस्तित्व की लड़ाई में खेला पहली बार कुर्मी कार्ड
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फतेहपुर। तीन दशक से अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस ने पहली बार जिले में कुर्मी कार्ड खेला है। 1989 के लोकसभा चुनाव में विश्वनाथ प्रताप सिंह से कांग्रेस के हरीकृष्ण शास्त्री की शिकस्त के बाद जिले में सात लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को पराजय की मिली है। ऐसे में कुर्मी बिरादरी के पूर्व सांसद राकेश सचान का कार्ड कितना फायदा देगा, यह तो आने वाला समय बताएगा। हालांकि यह बात जरूर है कि कांग्रेस का यह तुरुप खासा चर्चाओं में है। जिले में बहुलता जनसंख्या वाले निषाद, कुर्मी, मुसलिम मतदाताओं में करीब-करीब समानता है।
1991 लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद हुए 1996 के चुनाव में यह सीट बसपा के विशंभर प्रसाद निषाद की झोली में चली गई थी। पांच साल बाद 1998 में भाजपा गठबंधन प्रत्याशी डा. अशोक पटेल ने चुनाव जीता। इसके बाद 1999 के उप चुनाव में डा. अशोक पटेल ने रिपीट मारा और सांसद बने। 1999 में बसपा के महेंद्र निषाद ने भाजपा गठबंधन प्रत्याशी को पराजित कर सांसद सीट झटक ली। 2009 में सपा ने कुर्मी कार्ड खेलकर राकेश सचान को चुनाव में उतारकर उन्हें सांसद बनाने और पार्टी का खाता बढ़ाने में सफलता हासिल की। 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कारण राकेश सचान को भाजपा की साध्वी निरंजन ज्योति से शिकस्त खानी पड़ी। अब कांग्रेस ने राकेश सचान पर दांव लगाया है।
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चुनावी वर्ष कांग्रेस प्रत्याशी
1991 हरीकृष्ण शास्त्री (पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे)
1996 गठबंधन के चलते प्रत्याशी नहीं उतारा
1998 विभाकर शास्त्री
1999 विभाकर शास्त्री (पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र)
2004 खान गुफरान जाहिदी
2009 विभाकर शास्त्री
2014 ऊषा मौर्या
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1991 लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद हुए 1996 के चुनाव में यह सीट बसपा के विशंभर प्रसाद निषाद की झोली में चली गई थी। पांच साल बाद 1998 में भाजपा गठबंधन प्रत्याशी डा. अशोक पटेल ने चुनाव जीता। इसके बाद 1999 के उप चुनाव में डा. अशोक पटेल ने रिपीट मारा और सांसद बने। 1999 में बसपा के महेंद्र निषाद ने भाजपा गठबंधन प्रत्याशी को पराजित कर सांसद सीट झटक ली। 2009 में सपा ने कुर्मी कार्ड खेलकर राकेश सचान को चुनाव में उतारकर उन्हें सांसद बनाने और पार्टी का खाता बढ़ाने में सफलता हासिल की। 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कारण राकेश सचान को भाजपा की साध्वी निरंजन ज्योति से शिकस्त खानी पड़ी। अब कांग्रेस ने राकेश सचान पर दांव लगाया है।
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चुनावी वर्ष कांग्रेस प्रत्याशी
1991 हरीकृष्ण शास्त्री (पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे)
1996 गठबंधन के चलते प्रत्याशी नहीं उतारा
1998 विभाकर शास्त्री
1999 विभाकर शास्त्री (पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र)
2004 खान गुफरान जाहिदी
2009 विभाकर शास्त्री
2014 ऊषा मौर्या