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पशुओं में बढ़ रही बांझपन की बीमारी
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:14 AM IST
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पशुओं में बढ़ रहा बांझपन
फतेहपुर। पशुओं में बढ़ रही बांझपन की बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। गाय व भैंस में बांझपन का मर्ज अधिक देखने को मिल रहा है। जिले में 10 से 15 फीसदी दूध देने वाले पशु बांझपन का शिकार हैं। पशु चिकित्सा विभाग भी इस रोग से बचाव की कोई खास पहल नहीं कर रहा है। दुधारू पशुओं में गर्भधारण न होने से लोग इन्हें बेचने के लिए मजबूर हैं।
अच्छी नस्ल व दुधारू पशुओं में बांझपन की शिकायत ज्यादा मिल रही है। पशुओं में यह बीमारी पोषक तत्वों की कमी से होती है। भूसा व राशन के उत्पादन में अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग करना इसकी वजह बना है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इसे दूर करने के लिए पशुओं को हरा चारा, बरसीम व जई(जुंडी) का नियमित डोज देना चाहिए। हरे चारे को तैयार करने में गोबर, जैविक और हरी खाद का इस्तेमाल करें।
ज्यादातर पशुपालक अच्छी नस्ल के महंगे पशु खरीद लेते हैं, लेकिन रखरखाव व भरपूर मात्रा में पोषक तत्व नहीं दे पाते हैं। इसी से पशु एक-दो बार बच्चा देने के बाद बांझपन का शिकार हो जाते हैं। बाद में इनका इलाज कराने में अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पशुओं को पहले से ही पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलते रहें तो बांझपन की बीमारी से बचाया जा सकता है। पशुओं को हरे चारे के साथ पशु आहार, खली, चूनी नियमित खिलाएं।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इंद्रराज सिंह ने बताया कि रासायनिक खाद से तैयार किया गया चारा खाने से पशुओं की आंतरिक क्रियाओं का विस्तार नहीं होता है। इससे पशुओं में गर्भधारण नहीं होता है। ऐसे पशुओं को मिनरल मिक्चर दवा खिलाएं। इससे बांझपन की बीमारी दूर होगी।
- 10 से 15 फीसदी पशु बीमारी का शिकार
अमर उजाला ब्यूरो
जिले में दुधारू पशुओं की संख्या
गाय 320896
भैंस 593656
भेड़ 124204
बकरी 397323
गला घोटू से बचने के लिए टीकाकरण
फतेहपुर। पशुपालन विभाग ने गला घोटू की बीमारी से बचाव के लिए टीका लगाने का अभियान शुरू कर दिया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इंद्रराज सिंह ने बताया कि सभी पशुपालक अपने पशुओं को टीका लगवा लें। कोई भी पशु चारा खाना कम कर देता है तो अपने नजदीकी पशु स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत इलाज कराएं। गला घोटू के टीके लगाए जा रहे हैं।
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फतेहपुर। पशुओं में बढ़ रही बांझपन की बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। गाय व भैंस में बांझपन का मर्ज अधिक देखने को मिल रहा है। जिले में 10 से 15 फीसदी दूध देने वाले पशु बांझपन का शिकार हैं। पशु चिकित्सा विभाग भी इस रोग से बचाव की कोई खास पहल नहीं कर रहा है। दुधारू पशुओं में गर्भधारण न होने से लोग इन्हें बेचने के लिए मजबूर हैं।
अच्छी नस्ल व दुधारू पशुओं में बांझपन की शिकायत ज्यादा मिल रही है। पशुओं में यह बीमारी पोषक तत्वों की कमी से होती है। भूसा व राशन के उत्पादन में अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग करना इसकी वजह बना है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इसे दूर करने के लिए पशुओं को हरा चारा, बरसीम व जई(जुंडी) का नियमित डोज देना चाहिए। हरे चारे को तैयार करने में गोबर, जैविक और हरी खाद का इस्तेमाल करें।
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ज्यादातर पशुपालक अच्छी नस्ल के महंगे पशु खरीद लेते हैं, लेकिन रखरखाव व भरपूर मात्रा में पोषक तत्व नहीं दे पाते हैं। इसी से पशु एक-दो बार बच्चा देने के बाद बांझपन का शिकार हो जाते हैं। बाद में इनका इलाज कराने में अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पशुओं को पहले से ही पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलते रहें तो बांझपन की बीमारी से बचाया जा सकता है। पशुओं को हरे चारे के साथ पशु आहार, खली, चूनी नियमित खिलाएं।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इंद्रराज सिंह ने बताया कि रासायनिक खाद से तैयार किया गया चारा खाने से पशुओं की आंतरिक क्रियाओं का विस्तार नहीं होता है। इससे पशुओं में गर्भधारण नहीं होता है। ऐसे पशुओं को मिनरल मिक्चर दवा खिलाएं। इससे बांझपन की बीमारी दूर होगी।
- 10 से 15 फीसदी पशु बीमारी का शिकार
अमर उजाला ब्यूरो
जिले में दुधारू पशुओं की संख्या
गाय 320896
भैंस 593656
भेड़ 124204
बकरी 397323
गला घोटू से बचने के लिए टीकाकरण
फतेहपुर। पशुपालन विभाग ने गला घोटू की बीमारी से बचाव के लिए टीका लगाने का अभियान शुरू कर दिया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इंद्रराज सिंह ने बताया कि सभी पशुपालक अपने पशुओं को टीका लगवा लें। कोई भी पशु चारा खाना कम कर देता है तो अपने नजदीकी पशु स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत इलाज कराएं। गला घोटू के टीके लगाए जा रहे हैं।