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झंडा गीत के रचयिता को दी श्रद्धांजलि
Updated Sun, 10 Sep 2017 12:43 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। दोसर वैश्य कल्याण समिति ने झंडा गीत के रचयिता श्यामलाल पार्षद की 121वीं जयंती धूमधाम से मनाई। शनिवार को पार्षद चौक पर स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। गोष्ठी में झंडा गीत के रचयिता के अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया गया।
मुख्य अतिथि वैश्य एकता परिषद के प्रदेश महासचिव विनोद कुमार गुप्त ने कहा कि पार्षद श्याम लाल ने अपनी रचनाओं से क्रांतिकारियों में जोश भरा था। उनकी रचनाओं ने क्रांतिकारियों को पीछे मुड़कर तब तक देखने नहीं दिया, जब तक देश आजाद नहीं हो गया। उनका झंडा गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ देश की धरोहर है।
महापुरुष की कर्मभूमि फतेहपुर होने से हम सभी को गर्व है। समिति संरक्षक रामविशाल गुप्त ने कहा कि दोसर वैश्य समाज के रत्न श्यामलाल पार्षद का जन्म 9 सितंबर 1896 को कानपुर के नर्वल में हुआ था। उनकी कर्मभूमि फतेहपुर जिले की माटी ही रही। गोष्ठी में जिला कारागार की बैरक नंबर नौ, जिसमें पार्षद बंद थे, उसका नामकरण पार्षद बैरक के नाम पर कराने की मांग की गई।
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इस मौके पर जय गोपाल गुप्त, सुनील गुप्त, अमित शरन बाबी, राकेश गुप्त, ओमप्रकाश गुप्त, श्याम निवास गुप्त, बाबू राम स्वरूप गुप्त, गिरधारी लाल गुप्त, राम प्रकाश गुप्त, मोहन गुप्त, शौनक गुप्त, सुरेश गुप्त, गिरजा शंकर गुप्त, पंकज गुप्त, बृजमोहन गुप्त भी मौजूद रहे।
फोटो-2 परिचय- पार्षद चौराहे पर स्व. श्याम लाल की प्रतिमा का माल्यार्पण करते दोसर वैश्य कल्याण समिति के पदाधिकारी।
झंडागीत के रचयिता को दी श्रद्धांजलि
स्व. श्याम लाल की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
गोष्ठी में उनके अधूरे सपनों को पूरे करने का संकल्प
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फतेहपुर। दोसर वैश्य कल्याण समिति ने झंडा गीत के रचयिता श्यामलाल पार्षद की 121वीं जयंती धूमधाम से मनाई। शनिवार को पार्षद चौक पर स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। गोष्ठी में झंडा गीत के रचयिता के अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया गया।
मुख्य अतिथि वैश्य एकता परिषद के प्रदेश महासचिव विनोद कुमार गुप्त ने कहा कि पार्षद श्याम लाल ने अपनी रचनाओं से क्रांतिकारियों में जोश भरा था। उनकी रचनाओं ने क्रांतिकारियों को पीछे मुड़कर तब तक देखने नहीं दिया, जब तक देश आजाद नहीं हो गया। उनका झंडा गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ देश की धरोहर है।
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महापुरुष की कर्मभूमि फतेहपुर होने से हम सभी को गर्व है। समिति संरक्षक रामविशाल गुप्त ने कहा कि दोसर वैश्य समाज के रत्न श्यामलाल पार्षद का जन्म 9 सितंबर 1896 को कानपुर के नर्वल में हुआ था। उनकी कर्मभूमि फतेहपुर जिले की माटी ही रही। गोष्ठी में जिला कारागार की बैरक नंबर नौ, जिसमें पार्षद बंद थे, उसका नामकरण पार्षद बैरक के नाम पर कराने की मांग की गई।
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इस मौके पर जय गोपाल गुप्त, सुनील गुप्त, अमित शरन बाबी, राकेश गुप्त, ओमप्रकाश गुप्त, श्याम निवास गुप्त, बाबू राम स्वरूप गुप्त, गिरधारी लाल गुप्त, राम प्रकाश गुप्त, मोहन गुप्त, शौनक गुप्त, सुरेश गुप्त, गिरजा शंकर गुप्त, पंकज गुप्त, बृजमोहन गुप्त भी मौजूद रहे।
फोटो-2 परिचय- पार्षद चौराहे पर स्व. श्याम लाल की प्रतिमा का माल्यार्पण करते दोसर वैश्य कल्याण समिति के पदाधिकारी।
झंडागीत के रचयिता को दी श्रद्धांजलि
स्व. श्याम लाल की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
गोष्ठी में उनके अधूरे सपनों को पूरे करने का संकल्प