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मरम्मत को खड़े वाहन कबाड़, नए खरीदने में जुटी पालिका
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नगर पालिका में खड़े पुराने कंडम वाहन।
- फोटो : FARRUKHABAD
मरम्मत को खड़े वाहन कबाड़, दो करोड़ से नए खरीदे
फर्रुखाबाद। नगर पालिका के पास मरम्मत के लिए खड़े 52 वाहन कबाड़ हो रहे हैं। उनकी कम पैसे खर्च करके मरम्मत कराने के बजाय दो करोड़ से अधिक रुपये से नए वाहन खरीदे गए हैं। विभाग के जिम्मेदार पुराने वाहनों की मरम्मत कराने मेें रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग ही हो रहा है।
पालिका के पास शहर की सफाई, फागिंग समेत अन्य कामों के लिए 173 वाहनों का बेड़ा है। इस वक्त 25 बड़े और पांच छोटे ट्रैक्टर, एक जेसीबी, दो हूपर, दो मोबाइल टॉयलेट, एक डीजल पंपसेट, पांच फागिंग मशीन, तीन छोटी सीवर सेक्शन मशीन, एक नाला क्लीनिंग मशीन खराब पड़ी हैं। इनमें से आठ ऐसे वाहन हैं, जो नीलामी की श्रेणी में हैं। इससे साफ है कि 44 वाहनों की मरम्मत के बाद रोड पर दौड़ाया जा सकता है, मगर इन्हें ठीक कराने में रुचि नहीं दिखाई जा रही है।
हद तो यह है कि करीब छह महीने में ही पालिका ने दो करोड़ से अधिक रुपये के वाहनों की खरीद की है। इनमें से लगभग 36-36 लाख के तीन कंपेक्टर, 23-23 लाख के तीन पोकलैंड, तीन हूपर, एक कैटलकैचर, 300 हथठेली आदि हैं। कुछ वाहन तो ऐसे हैं जो आने के बाद रोड पर चले ही नहीं हैं। इन वाहनों को खरीदने के बाद खड़ा कर दिया गया है।
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खराब वाहन भी दिखाए जा रहे चालू हालत में
वाहन विभाग में एक और खेल चल रहा है। वास्तव में रिकार्ड में दिखाए गए वाहनों से ज्यादा खराब पड़े हुए हैं। कई ऐसे ट्रैक्टर, जेसीबी हैं, जो वास्तव में खराब पड़ी हैं, मगर रिकार्ड में सही दिखाई जा रही है। यही हाल ट्रैक्टर, मोक्षवाहन, हूपर आदि का है। इनके नाम पर रोजाना कागजों में डीजल फूंका जा रहा है
‘जिन वाहनों में छोटी-मोटी मरम्मत होनी है, उन्हें करवा रहा हूं। चार ट्रैक्टर सही करवा लिए हैं। कुछ हथठेली भी मरम्मत करवाई हैं। कुछ दिन बाद बड़ी खराबी वाले वाहनों को भी सही कराया जाएगा। खराब वाहन चलने की बात गलत है। रिकार्ड में दर्ज संख्या के अनुसार ही वाहन खराब हैं।-रविंद्र कुमार, ईओ, नगर पालिका परिषद
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फर्रुखाबाद। नगर पालिका के पास मरम्मत के लिए खड़े 52 वाहन कबाड़ हो रहे हैं। उनकी कम पैसे खर्च करके मरम्मत कराने के बजाय दो करोड़ से अधिक रुपये से नए वाहन खरीदे गए हैं। विभाग के जिम्मेदार पुराने वाहनों की मरम्मत कराने मेें रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग ही हो रहा है।
पालिका के पास शहर की सफाई, फागिंग समेत अन्य कामों के लिए 173 वाहनों का बेड़ा है। इस वक्त 25 बड़े और पांच छोटे ट्रैक्टर, एक जेसीबी, दो हूपर, दो मोबाइल टॉयलेट, एक डीजल पंपसेट, पांच फागिंग मशीन, तीन छोटी सीवर सेक्शन मशीन, एक नाला क्लीनिंग मशीन खराब पड़ी हैं। इनमें से आठ ऐसे वाहन हैं, जो नीलामी की श्रेणी में हैं। इससे साफ है कि 44 वाहनों की मरम्मत के बाद रोड पर दौड़ाया जा सकता है, मगर इन्हें ठीक कराने में रुचि नहीं दिखाई जा रही है।
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हद तो यह है कि करीब छह महीने में ही पालिका ने दो करोड़ से अधिक रुपये के वाहनों की खरीद की है। इनमें से लगभग 36-36 लाख के तीन कंपेक्टर, 23-23 लाख के तीन पोकलैंड, तीन हूपर, एक कैटलकैचर, 300 हथठेली आदि हैं। कुछ वाहन तो ऐसे हैं जो आने के बाद रोड पर चले ही नहीं हैं। इन वाहनों को खरीदने के बाद खड़ा कर दिया गया है।
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खराब वाहन भी दिखाए जा रहे चालू हालत में
वाहन विभाग में एक और खेल चल रहा है। वास्तव में रिकार्ड में दिखाए गए वाहनों से ज्यादा खराब पड़े हुए हैं। कई ऐसे ट्रैक्टर, जेसीबी हैं, जो वास्तव में खराब पड़ी हैं, मगर रिकार्ड में सही दिखाई जा रही है। यही हाल ट्रैक्टर, मोक्षवाहन, हूपर आदि का है। इनके नाम पर रोजाना कागजों में डीजल फूंका जा रहा है
‘जिन वाहनों में छोटी-मोटी मरम्मत होनी है, उन्हें करवा रहा हूं। चार ट्रैक्टर सही करवा लिए हैं। कुछ हथठेली भी मरम्मत करवाई हैं। कुछ दिन बाद बड़ी खराबी वाले वाहनों को भी सही कराया जाएगा। खराब वाहन चलने की बात गलत है। रिकार्ड में दर्ज संख्या के अनुसार ही वाहन खराब हैं।-रविंद्र कुमार, ईओ, नगर पालिका परिषद