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फर्रुखाबाद : नौ माह बाद भी नहीं हो सकी 803 लापता गोवंशों के धन की रिकवरी

Sun, 31 Jul 2022 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 31 Jul 2022 11:39 PM IST
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Farrukhabad: Recovery of money of 803 missing cows could not be done even after nine months
गांव मौधा की गोशाला के टिनशेड में खड़े गोवंश। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। नौ माह बीतने के बाद भी प्रशासन लापता 803 गोवंश के चारा-दाना की धनराशि की रिकवरी नहीं कर पाया है। दो पशुपालकों ने ही अभी तक धन जमाकर रसीद सौंपी है। वसूली में सचिवों की लापरवाही से उनकी मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। कारण एक पशुपालक ने दो गोवंश गोशाला से लिए और उसके खाते में चार का धन पहुंचता रहा।
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गोशालाओं पर बोझ कम करने और गोवंश को बेहतर संरक्षण देने के लिए शासन ने पशुधन सहभागिता योजना लागू की थी। वर्ष 2020 के अंत में आई योजना के तहत गोशालाओं से करीब 1750 गोवंश सचिवों ने पशुपालकों को दे दिए थे। इनमें 1352 गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रति गोवंश 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पशुपालकों को बैंक खातों में सीधा भुगतान भी किया जाता रहा।
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अक्तूबर 2021 में जब सीडीओ ने सत्यापन कराया तो 547 गोवंश ही मौके पर मिले, जबकि 805 गोवंश लापता थे। इससे पशुपालकों को नोटिस जारी कर खातों में भेजी गई धनराशि जमा करने के आदेश दिए गए।
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हालात ये हैं कि सचिवों के सत्यापन के आधार पर चार-चार गोवंश का चारा-दाना पशुपालक ही खाते रहे। इससे करीब 15 लाख रुपये सरकारी धन की बर्बादी हुई और गोवंश को संरक्षण भी नहीं मिला। 25 फरवरी को सीडीओ की ओर से रिकवरी नोटिस जारी होने के पांच माह बाद भी वसूली नहीं हो सकी है।
फतेहगढ़ से सटे गांव निनौआ निवासी श्रीकांत ने बताया कि गोशाला से दो गाय ली थीं। उनके खाते में चार गोवंश के एक वर्ष के भरण-पोषण के लिए 43 हजार 200 रुपये भेजे गए। नोटिस जारी होने के बाद जब पशु चिकित्सक सत्यापन करने आए तो मौके पर दो गाय ही मिलीं। तब उन्होंने जानकारी दी कि दो गायों का अधिक भुगतान खाते में आ गया है। उन्होंने 21 हजार 600 रुपये गोशाला के खाते में जमा कर सीवीओ कार्यालय में रसीद भी दे दी। इसके अलावा मनोरमा ने 5400 रुपये वापस कर रसीद उपलब्ध कराई है। इसके अलावा सीवीओ कार्यालय में वसूली का कोई रिकार्ड नहीं है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि सचिव व बीडीओ की सत्यापन रिपोर्ट पर उन्होंने पशुपालकों के खातों में धनराशि भेजी है। वसूली करना भी सचिवों की जिम्मेेदारी है। सत्यापन में 805 गोवंश नहीं मिले थे।

इनमें कुछ पशुपालकों ने गोवंश मरने की सूचना दी है, लेकिन शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराया। वह ब्लाकों को फिर पत्र जारी कर रिकवरी की रिपोर्ट मंगाएंगे। हो सकता है अन्य पशुपालकों ने धनराशि वापस की हो, लेकिन रसीद उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराई गई है। ब्लाकों की रिपोर्ट आने पर वसूली की स्थिति साफ हो सकेगी।
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