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जीएसटी के घपले में नलकूप विभाग पर कसेगा शिकंजा

Sun, 06 Oct 2019 06:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2019 06:39 PM IST
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Tubewell Department: Tightening screws in GST scandal
नलकूप विभाग में चहेते ठेकेदारों को वर्कआर्डर जारी कर बिना काम के ही भुगतान किया गया। वहीं टेंडर प्रक्रिया को धता बताकर करोड़ों के कार्य टुकड़ों में बांटकर वर्कआर्डर पर करा दिए गए। लाखों रुपये के जीएसटी का भी चूना लगाया गया।
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पूरे प्रकरण की सीडीओ के आदेश पर जांच चल रही है। अब जीएसटी (वाणिज्य कर) अधिकारियों ने भी जीएसटी वसूलने को नलकूप विभाग पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है।
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बता दें कि नलकूप विभाग में अधिकारियों द्वारा चहेती फर्म को फर्जी भुगतान की शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने 25 जुलाई को छापा मारा।
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स्टोर में अभिलेख न दिखाए जाने पर उन्होंने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। इसके बाद करीब 25 बिंदुओं पर तलब किए गए अभिलेखों में वित्तीय अनियमितता खुलकर सामने आ गई। फिलहाल दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
खास बात तो यह है कि वर्षों से नलकूप विभाग टेंडर प्रक्रिया को ठेंगा दिखा रहा है। एक लाख से ऊपर के अधिकांश कार्यों को टुकड़ों में बांटकर 20 हजार से कम के कई वर्कआर्डर बनाकर एक या दो फर्मों को सौंपने का खेल चल रहा है। कई करोड़ के काम कराने के बावजूद न तो वाणिज्य कर जमा हुआ और न ही जीएसटी। इस मामले का भी जांच में खुलासा हुआ है।
हालांकि इस खेल में करीब 10-12 जिम्मेदारों की गर्दन फंस चुकी है। वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे रहकर कई पटलों की जिम्मेदारी संभालने वाले बाबुओं की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। अब जीएसटी विभाग के (वाणिज्य कर) अधिकारियों ने भी जीएसटी वसूलने को नलकूप विभाग पर नजर गड़ा दी है।

डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर विकास सागर व रामसिंह यादव ने बताया कि नलकूप विभाग से वाणिज्य कर व जीएसटी वसूला जाएगा। इसके लिए वह फिलहाल मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से नलकूप विभाग की पत्रावलियां लेकर जांच कराएंगे। शुरुआत में पिछले पांच वर्ष के वर्कआर्डरों की जांच होगी। इसके बाद और पिछला रिकार्ड भी देखा जाएगा। कैशबुक के मिलान से पूरा प्रकरण सामने आ जाएगा।
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