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संशोधित)पर्यटन कॉरीडोर की खुलेगी राह, विकास संग रोजगार की मिल सकेगी सौगात

Fri, 25 Sep 2020 10:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2020 10:57 PM IST
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Tourism corridor: open path of employment with development
श्रृंगी ऋषि धाम। - फोटो : FARRUKHABAD
पर्यटन कॉरिडोर : विकास संग रोजगार की खुलेगी राह
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फर्रुखाबाद। जिला मुख्यालय से करीब 24 किलोमीटर दूर स्थित सप्त ऋषि क्षेत्र शृंगीरामपुर से बौद्ध तीर्थस्थली संकिसा व जैन धर्म की तीर्थ नगरी कंपिल तक पर्यटन कॉरिडोर बनाने की मुहिम सफल हुई तो क्षेत्र का विकास तो होगा ही, रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ गुरुवार को डीएम, सांसद की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने सांस्कृतिक व धर्म-अध्यात्म की पौराणिक नगरी शृंगीरामपुर को सरकार की ओर से तीर्थ स्थल घोषित किए जाने की मांग की थी।
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हरदोई को जोड़ने के लिए गंगा पर पुल बनवाने की भी मांग उठाई थी। इससे पूर्व भी मुख्यमंत्री के समक्ष ये मांगें रखी जा चुकी हैं। इन मांगों को मान लिया गया और पौराणिक महत्व के स्थल पर्यटन मानचित्र पर आ गए तो फर्रुखाबाद के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। इससे न केवल विकास के रास्ते खुलेंगे बल्कि युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
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ऋषि शृंगी की तपोभूमि है शृंगीरामपुर
गंगा किनारे बसी तीर्थस्थली शृंगीरामपुर न केवल ऋषि शृंगी की तपोभूमि है, अपितु यह सप्त ऋषि क्षेत्र के रूप में भी विख्यात है। यहां पूर्व दिशा में च्यवन ऋषि आश्रम, एक किलोमीटर दूर खंता नाला के पास आयुर्वेद के जनक धनवंतरि ऋषि का आश्रम है।
इसी के पास गुरगुजपुर में 24 अक्षरी गायत्री मंत्र के द्रष्टा याज्ञवल्क्य व बाघम्बर ऋषि के आश्रम हैं। पश्चिम में सर्प यज्ञ से सर्पों को बचाने वाले आस्तीक ऋषि का आश्रम बारामऊ में है। दक्षिण में खुदागंज रामाश्रम के सामने अष्टावक्र के नाना उद्दालक ऋषि का आश्रम है।
लगता है अंतरराज्यीय मेला, सप्त घाट भी हैं यहां
शृंगीरामपुर में दशहरा व कार्तिक में अंतरराज्यीय मेला लगता है। शिवरात्रि से एक सप्ताह पूर्व मध्यप्रदेश के भिंड, ग्वालियर, दतिया, गुना, शिवपुरी व अन्य जिलों से शिवभक्त कांवर में जल भरकर यहां से पैदल ही रवाना होते हैं। सप्त ऋषियों की तरह ही यहां सप्त घाट भी हैं। इनमें गुलरिया घाट, सती घाट, गुल्लवीर घाट, महुआ घाट, बाघम्बर ऋषि घाट, हनुमान व शृंगीऋषि घाट, गौरीशंकर घाट शामिल हैं।
50 किमी लंबे कॉरिडोर में तीन धर्म संस्कृतियों का होगा मेल
विधायक नागेंद्र सिंह राठौर कहते हैं कि शृंगीरामपुर के पर्यटन स्थल घोषित होने पर यहां से कंपिल तक एक ऐसा पर्यटन कॉरिडोर बन सकेगा जिसमें तीन धर्म-संस्कृतियों का मेल होगा। करीब 50 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर शृंगीरामपुर से सीधे मोहम्मदाबाद, संकिसा होते हुए कंपिल तक जाएगा। यह क्षेत्र सीधे सड़क से जुड़े भी हैं।

रोजगार के मिलेंगे अवसर
शृंगीरामपुर निवासी शैक्षिक उन्नति मंच के संयोजक विमल तिवारी का कहना है कि पुल बनने से हरदोई से सीधे यह क्षेत्र जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार बढ़ेगा। पर्यटन स्थल घोषित होने से इस कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के भरपूर अवसर मिलेंगे।
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