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आज 300 साल का हो जाएगा विरासतों का शहर फर्रुखाबाद

Fri, 26 Dec 2014 11:16 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Fri, 26 Dec 2014 11:16 PM IST
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Today will be the heritage of 300 years of the city Farrukhabad
फर्रुखाबाद। 27 दिसंबर 2014 यानी आज फ र्रुखाबाद की स्थापना के 300 साल
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पूरे हो जाएंगे। इसके  अगले दिन,28 दिसंबर को फर्रुखाबाद अपने नामकरण की चौथी शताब्दी में प्रवेश कर जाएगा। इन तीन सौ सालों में जिले की विरासताें की सबसे ज्यादा दुर्दशा हुई है।

इन्हें बचाने के लिए अभी भी कोई प्रयास नहीं हुए हैं। आगे भी प्रयास न किए गए तो इनका वजूद ही खत्म हो जाएगा। 300 साल पूरे होने पर प्रशासन इन विरासताें को बचाने के लिए कोशिशें शुरू कर दे तो यह बड़ी बात होगी।

सोन सरवा तालाब
मान्यता है कि कायमगंज इलाके के  मुंडौल में पांडवाें का मुंडन संस्कार हुआ था। उस समय यहां के सरोवर में इन्हें स्नान कराया गया था। आज भी स्नान पर्वों पर यहां मुंडन के कार्यक्रम होते हैं। इसके बाद बच्चाें के अलावा परिजन भी सरोवर में स्नान करते हैं। इस दौरान खासी भीड़ होती है। कभी गंगा सरोवर के पास से बहती थीं। अब यह यहां से दूर चली गई हैं। यह सरोवर बदहाल है। इसकी चौहद्दी कच्ची है। सरोवर तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है। बरसात के सड़े पानी में नहाना लोगाें की मजबूरी होती है।

रसीद खां का मकबरा
रसीद खां के नाम पर मऊरसीदाबाद गांव बसाया गया था। यहां रसीद खां का मकबरा है। इसे पुरातत्व विभाग ने संरक्षित किया है। मकबरे क ो मामूली दुरुस्त कराया गया है। इसके असपास बैरीकेडिंग कराई गई है। यहां पुरातत्व विभाग से संरक्षण का बोर्ड भी लगा है। इस पर चेतावनी भी दर्ज है। मकबरे के आसपास गंदगी व छेड़छाड़ पर एक लाख रुपया का जुर्माना है। इसके बाद भी यहां कंडे पाथे जा रहे हैं।

राजा भोज का किला
कमालगंज इलाके के भोजपुर गांव में राजा भोज क ा किला था। यहीं इनकी अदालत लगती थी।  यह न्याय प्रिय राजा थे। इतिहास में भी इनका जिक्र आता है। इनका किला खत्म हो गया है। अदालत खंडहर इसे बचाने की कोई पहल नहीं हुई।

गंगू तेली की रिहाइश
बिचपुरी गांव में गंगू तेली की रिहाइश थी। उसके कोल्हू भी यहां लगे थे। यहां से भोजपुर को नालियाें के जरिए तेल जाता था। इनका भी कोई अता पता नहीं है। वक्त के साथ यह सब इतिहास में दफन हो गया हैै।


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