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Farrukhabad News: बारिश ने फेरा किसानों की मेहनत पर पानी
Thu, 19 Jun 2025 11:40 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 19 Jun 2025 11:40 PM IST
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मंडी समिति में बारिश से भीगी मक्का फैलाते किसान।
- फोटो : :मगरमच्छ को पकड़े खड़े ग्रामीण ।
कायमगंज। गुरुवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने मंडी समिति परिसर में किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सड़कों पर सूखने के लिए फैलाई गई सैकड़ों क्विंटल मक्का बारिश में भीग गई। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
किसानों का कहना है कि आढ़ती नमीयुक्त मक्का खरीदने से इन्कार कर देते हैं, इसलिए वे उपज को सुखाने के लिए सड़क पर फैला देते हैं। किसान प्रदीप और लालू ने बताया कि वे बुधवार को 70-80 क्विंटल मक्का लेकर मंडी आए थे, लेकिन आढ़ती ने नमी के कारण खरीदने से मना कर दिया। मजबूर होकर उन्होंने मक्का को मंडी की सड़क पर सुखाने के लिए फैला दिया और घर लौट गए।
गुरुवार तड़के हुई बारिश ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। बारिश के बाद किसान फिर से भीगी मक्का को सुखाने के लिए मंडी परिसर में उसे दोबारा फैलाते नजर आए। किसानों को डर है कि मक्का में ज्यादा नमी रहने से वह काली पड़ जाएगी। उसका स्वाद भी बिगड़ जाएगा।
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स्थानीय आढ़ती प्रवीण यादव ने बताया कि भीगी मक्का में भवका (फफूंदी) लगने की आशंका रहती है। जिससे उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। यही वजह है कि मंडी में सूखी मक्का को ही तरजीह दी जाती है। अब किसानों को यह उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ेगी।
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किसानों का कहना है कि आढ़ती नमीयुक्त मक्का खरीदने से इन्कार कर देते हैं, इसलिए वे उपज को सुखाने के लिए सड़क पर फैला देते हैं। किसान प्रदीप और लालू ने बताया कि वे बुधवार को 70-80 क्विंटल मक्का लेकर मंडी आए थे, लेकिन आढ़ती ने नमी के कारण खरीदने से मना कर दिया। मजबूर होकर उन्होंने मक्का को मंडी की सड़क पर सुखाने के लिए फैला दिया और घर लौट गए।
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गुरुवार तड़के हुई बारिश ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। बारिश के बाद किसान फिर से भीगी मक्का को सुखाने के लिए मंडी परिसर में उसे दोबारा फैलाते नजर आए। किसानों को डर है कि मक्का में ज्यादा नमी रहने से वह काली पड़ जाएगी। उसका स्वाद भी बिगड़ जाएगा।
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स्थानीय आढ़ती प्रवीण यादव ने बताया कि भीगी मक्का में भवका (फफूंदी) लगने की आशंका रहती है। जिससे उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। यही वजह है कि मंडी में सूखी मक्का को ही तरजीह दी जाती है। अब किसानों को यह उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ेगी।