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बाढ़ बहा ले गई फसलों के साथ बेटियों के अरमान
अमर उजाला ब्यूूराे,फर्रुखाबाद
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:58 PM IST
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दैवी आपदा से जूझ रहे गंगापार के किसानों की बेटियों की शादी नियत समय पर नहीं हो पा रही है। बाढ़ के बाद सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पैसे के अभाव में इन गरीबों ने अपनी बेटियों की शादी की तारीख आगे बढ़ा दी है।
रामगंगा के किनारे बसे गांव अलादपुर और मटौली में सबसे ज्यादा तबाही का आलम है। गांव के रामलखन ने अपनी पुत्री रोशनी का विवाह एक साल पहले पड़ोसी जिला शाहजहांपुर के गांव कबरा थाना कलान के सुनील कुमार पुत्र लालाराम के साथ तय किया था। गंगा नदी में आई बाढ़ इनके खेतों की फसल के साथ-साथ बिटिया रोशनी के भी अरमान बहा ले गई। नतीजतन शादी की तरीख आगे बढ़ती गई। रामलखन बताते हैं कि उन्होंने 11 अप्रैल 2016 को शादी की तारीख तय की थी लेकिन उनके नसीब ने यहां भी धोखा दे दिया। सूखे के कारण उनकी गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई। उनका कहना है कि इस तारीख पर भी वे अपनी बिटिया रोशनी के हाथ पीले नहीं कर सकेंगे।
इसी गांव की महाना कुमारी पुत्री राघवेंद्र की शादी नहीं हो पा रही है। राघवेंद्र कहते हैं कि उसने तीन बीघा खेत में बंटाई पर धान की फसल बोयी थी। रामगंगा में आई बाढ़ ने फसल को चौपट कर दिया। वह अपनी बेटी के हाथ कैसे पीले करे। उसकी समझ में नहीं आ रहा है। कर्ज के दलदल में बुरी तरह से दब चुका है। इसी गांव के मचले ने अपनी पुत्री पिंकी की शादी करीब डेढ़ साल पहले गेंदनलाल पुत्र जगन्नाथ निवासी शाहजहांपुर के साथ तय की थी। दैवी आपदाओं के चलते वह तारीख आगे बढ़ाता चला गया। 2 मार्च 2016 को बिटिया की बारात आने वाली है लेकिन पैसे के अभाव में उसने इस तारीख पर भी बारात लाने से मना कर दिया है।
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इसी गांव के नन्हें भी अपनी बेटी रीता कुमारी के हाथ पीले करने में लाचार हो गए हैं। उनका कहना है कि उसने अपनी पुत्री रीता की शादी पड़ोसी जिला शाहजहांपुर के गांव बिचौला के रहने वाले अहिल्कार के साथ तय की थी। पैसा न होने के कारण तारीख आगे बढ़ाता चला जा रहा है। इस साल भी वह सूखे के कारण बेटी के हाथ पीले नहीं कर सकेगा। इसी तरह क्षेत्र के कोलासोता, खरगपुर, नाहरैया और सुंदरपुर के लोग अपनी बेटियों के हाथ पीले नहीं कर पा रहे हैं। कभी बाढ़ तो कभी सूखा ने इस क्षेत्र की दर्जनों बेटियों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
एसडीएम अमृतपुर हवलदार सिंह ने बताया कि अभी दो माह पहले ही तहसील का चार्ज ग्रहण किया है। गंगा और रामगंगा की बाढ़ से गंगापार का किसान बेजार है। इन लोगों को बेटियोें की शादी करने के लिए सहायता क्यों नहीं मिली। इस पर तहसीलदार से जानकारी की जाएगी।
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रामगंगा के किनारे बसे गांव अलादपुर और मटौली में सबसे ज्यादा तबाही का आलम है। गांव के रामलखन ने अपनी पुत्री रोशनी का विवाह एक साल पहले पड़ोसी जिला शाहजहांपुर के गांव कबरा थाना कलान के सुनील कुमार पुत्र लालाराम के साथ तय किया था। गंगा नदी में आई बाढ़ इनके खेतों की फसल के साथ-साथ बिटिया रोशनी के भी अरमान बहा ले गई। नतीजतन शादी की तरीख आगे बढ़ती गई। रामलखन बताते हैं कि उन्होंने 11 अप्रैल 2016 को शादी की तारीख तय की थी लेकिन उनके नसीब ने यहां भी धोखा दे दिया। सूखे के कारण उनकी गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई। उनका कहना है कि इस तारीख पर भी वे अपनी बिटिया रोशनी के हाथ पीले नहीं कर सकेंगे।
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इसी गांव की महाना कुमारी पुत्री राघवेंद्र की शादी नहीं हो पा रही है। राघवेंद्र कहते हैं कि उसने तीन बीघा खेत में बंटाई पर धान की फसल बोयी थी। रामगंगा में आई बाढ़ ने फसल को चौपट कर दिया। वह अपनी बेटी के हाथ कैसे पीले करे। उसकी समझ में नहीं आ रहा है। कर्ज के दलदल में बुरी तरह से दब चुका है। इसी गांव के मचले ने अपनी पुत्री पिंकी की शादी करीब डेढ़ साल पहले गेंदनलाल पुत्र जगन्नाथ निवासी शाहजहांपुर के साथ तय की थी। दैवी आपदाओं के चलते वह तारीख आगे बढ़ाता चला गया। 2 मार्च 2016 को बिटिया की बारात आने वाली है लेकिन पैसे के अभाव में उसने इस तारीख पर भी बारात लाने से मना कर दिया है।
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इसी गांव के नन्हें भी अपनी बेटी रीता कुमारी के हाथ पीले करने में लाचार हो गए हैं। उनका कहना है कि उसने अपनी पुत्री रीता की शादी पड़ोसी जिला शाहजहांपुर के गांव बिचौला के रहने वाले अहिल्कार के साथ तय की थी। पैसा न होने के कारण तारीख आगे बढ़ाता चला जा रहा है। इस साल भी वह सूखे के कारण बेटी के हाथ पीले नहीं कर सकेगा। इसी तरह क्षेत्र के कोलासोता, खरगपुर, नाहरैया और सुंदरपुर के लोग अपनी बेटियों के हाथ पीले नहीं कर पा रहे हैं। कभी बाढ़ तो कभी सूखा ने इस क्षेत्र की दर्जनों बेटियों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
एसडीएम अमृतपुर हवलदार सिंह ने बताया कि अभी दो माह पहले ही तहसील का चार्ज ग्रहण किया है। गंगा और रामगंगा की बाढ़ से गंगापार का किसान बेजार है। इन लोगों को बेटियोें की शादी करने के लिए सहायता क्यों नहीं मिली। इस पर तहसीलदार से जानकारी की जाएगी।