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मकर संक्रांति पर्व पर गंगा में भक्तों ने किया स्नान
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Sun, 15 Jan 2017 12:44 AM IST
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गंगाजल में केले की पूजा करतीं युवतियां।
- फोटो : अमर उजाला
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मकर संक्रांति के पर्व पर कल्पवास करने आए संतों और गंगा भक्तों ने गंगा में डुबकी लगा मानसिक शांति की अनुभूति की। तड़के शीतलहर के बाद भी गंगा भक्तों ने जी भरकर स्नान किया। सर्दी पर यहां आस्था भारी पड़ती नजर आई।
गंगातट पांचाल घाट पर लगने वाले मेला श्री रामनगरिया में शनिवार को मकर संक्रांति के पर्व पर विशेष स्नान किया गया। यहां सुबह 4 बजे से ही स्नान शुरू हो गया। भक्तों ने गंगा स्नान करने के बाद यहां ध्यान, साधना करके आनंद उठाया। हालांकि इस वर्ष मकर संक्रांति के स्नान पर गंगा भक्तों की संख्या काफी कम नजर आई।
फिर भी लोगों ने पांचाल घाट पहुंचकर गंगा में स्नान किया। इस घाट पर स्नान करने के संबंध में महाकवि तुलसीदास ने भी रामचरित मानस में वर्णन किया है। उन्होंने कहा है कि मंजन फल पेखियै तत्काला, कात होएं पिक बकऊ मराला।
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मकर संक्रांति पर्व पर गंगा स्नान करने से बगुले हंस हो जाते हैं और कौव्वे कोयल की भाषा बोलने लगते हैं। दूरदराज से आए कल्पवासियों ने भी भागीरथी के पावन जल में डुबकी लगाई। इस मौके पर कई लोगों ने गंगा को पहनावन पहनाई और मनौती मांगी।
सारे दिन मेला श्री रामनगरिया में गंगातट पर रामनाम की बयार बहती रही। माघ पूर्णिमा पर भीड़ कम होने के कारण इस वर्ष पुलिस ने राहत की सांस ली। मेला व्यवस्थापक संदीप दीक्षित का कहना है कि इस बार मकर संक्रांति पर्व के स्नान पर भीड़ काफी कम रही है, जिसकी वजह सर्दी है।
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गंगातट पांचाल घाट पर लगने वाले मेला श्री रामनगरिया में शनिवार को मकर संक्रांति के पर्व पर विशेष स्नान किया गया। यहां सुबह 4 बजे से ही स्नान शुरू हो गया। भक्तों ने गंगा स्नान करने के बाद यहां ध्यान, साधना करके आनंद उठाया। हालांकि इस वर्ष मकर संक्रांति के स्नान पर गंगा भक्तों की संख्या काफी कम नजर आई।
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फिर भी लोगों ने पांचाल घाट पहुंचकर गंगा में स्नान किया। इस घाट पर स्नान करने के संबंध में महाकवि तुलसीदास ने भी रामचरित मानस में वर्णन किया है। उन्होंने कहा है कि मंजन फल पेखियै तत्काला, कात होएं पिक बकऊ मराला।
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मकर संक्रांति पर्व पर गंगा स्नान करने से बगुले हंस हो जाते हैं और कौव्वे कोयल की भाषा बोलने लगते हैं। दूरदराज से आए कल्पवासियों ने भी भागीरथी के पावन जल में डुबकी लगाई। इस मौके पर कई लोगों ने गंगा को पहनावन पहनाई और मनौती मांगी।
सारे दिन मेला श्री रामनगरिया में गंगातट पर रामनाम की बयार बहती रही। माघ पूर्णिमा पर भीड़ कम होने के कारण इस वर्ष पुलिस ने राहत की सांस ली। मेला व्यवस्थापक संदीप दीक्षित का कहना है कि इस बार मकर संक्रांति पर्व के स्नान पर भीड़ काफी कम रही है, जिसकी वजह सर्दी है।