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सरकारी बयानबाजी में फंस गई मासूमों की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Fri, 26 Dec 2014 11:29 PM IST
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मासूम भाई और बहन की सर्दी से हुई मौत को दबाने के लिए अफसरों ने बयानबाजी
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का दांव खेला है। जांच करने गए एसडीएम और सीएमओ ने दोनों शवों का
पोस्टमार्टम कराना तक मुनासिब नहीं समझा। प्रशासन इनकी मौत का कारण कुपोषण
बता रहा है तो बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधिकारी कुपोषण न होने का दावा
कर रहे हैं।
अलीगढ़ निवासी गुड्डू भट्ठे पर मजदूरी करता है। इसके डेढ़ वर्षीय पुत्र रेहान और दो माह की पुत्री आबरीन की गुरुवार देर शाम सर्दी लगने से मौत हो गई थी। जानकारी पर एसडीएम अमृतपुर लालजी मिश्रा, सीएमओ राकेश कुमार, लेखपाल विकास दीक्षित, कानून गो राजेश कुमार देर रात गांव पहुंचे।
सर्दी से मौत की जानकारी होते ही अफसरों ने मामले को दबाने की कवायद शुरू कर दी। हकीकत खुलकर सामने न आ जाए, इससे दोनों बच्चों का पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया। प्रशासनिक अधिकारी दोनों बच्चों की मौत कुपोषण से होना बता रहे हैं।
बाल पुष्टाहार विभाग के अधिकारी इनके कुपोषित न होने का दावा कर रहे हैं। पिता व अन्य परिजनों ने शुक्रवार की सुबह दोनों बच्चों के शवों को दफन कर दिया। पिता गुड्डू का कहना है कि दो माह पूर्व आबरीन का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जन्म हुआ था। अगर पुत्री आबरीन कुपोषण की शिकार थी तो डाक्टर ने दूसरे दिन ही उसकी छुट्टी क्यों कर दी। पुत्री का इलाज क्याें नहीं किया गया।
इस तरह कर रहे बयानबाजी
दोनों बच्चे कुपोषण के शिकार थे। कुपोषण के कारण दोनों बच्चों की मौत हुई है। -लालजी मिश्रा, एसडीएम अमृतपुर
जिन बच्चों की मौत हुई है। वह कुपोषण का शिकार होने के कारण काफी कमजोर थे। इस कारण इनकी मौत हो गई। -ओम प्रकाश, प्रभारी चिकित्साधिकारी
गुड्डू के पुत्र रेहान का 8 दिसंबर 2014 को आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकरण किया गया था। उसका वजन सात किलो नौ सौ ग्राम था। यह कुपोषित नहीं था। अलीगढ़ गांव गोद लिया है। यहां सभी नौनिहालाें की देखरेख की जा रही है। अगर रेहान कुपोषण का शिकार होता तो उसका वजन छह किलो से कम होता। -सुनीता उपाध्याय, बाल विकास परियोजना अधिकारी, राजेपुर
दो कंबल देकर पोंछे आंसू
राजेपुर। जांच करने पहुंचे एसडीएम अमृतपुर और सीएमओ ने मृतक के माता-पिता के दो कंबल देकर आंसू पोंछ दिए। इनको कोई मदद दिलाने की कोशिश तक नहीं की।
अलीगढ़ निवासी गुड्डू भट्ठे पर मजदूरी करता है। इसके डेढ़ वर्षीय पुत्र रेहान और दो माह की पुत्री आबरीन की गुरुवार देर शाम सर्दी लगने से मौत हो गई थी। जानकारी पर एसडीएम अमृतपुर लालजी मिश्रा, सीएमओ राकेश कुमार, लेखपाल विकास दीक्षित, कानून गो राजेश कुमार देर रात गांव पहुंचे।
सर्दी से मौत की जानकारी होते ही अफसरों ने मामले को दबाने की कवायद शुरू कर दी। हकीकत खुलकर सामने न आ जाए, इससे दोनों बच्चों का पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया। प्रशासनिक अधिकारी दोनों बच्चों की मौत कुपोषण से होना बता रहे हैं।
बाल पुष्टाहार विभाग के अधिकारी इनके कुपोषित न होने का दावा कर रहे हैं। पिता व अन्य परिजनों ने शुक्रवार की सुबह दोनों बच्चों के शवों को दफन कर दिया। पिता गुड्डू का कहना है कि दो माह पूर्व आबरीन का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जन्म हुआ था। अगर पुत्री आबरीन कुपोषण की शिकार थी तो डाक्टर ने दूसरे दिन ही उसकी छुट्टी क्यों कर दी। पुत्री का इलाज क्याें नहीं किया गया।
इस तरह कर रहे बयानबाजी
दोनों बच्चे कुपोषण के शिकार थे। कुपोषण के कारण दोनों बच्चों की मौत हुई है। -लालजी मिश्रा, एसडीएम अमृतपुर
जिन बच्चों की मौत हुई है। वह कुपोषण का शिकार होने के कारण काफी कमजोर थे। इस कारण इनकी मौत हो गई। -ओम प्रकाश, प्रभारी चिकित्साधिकारी
गुड्डू के पुत्र रेहान का 8 दिसंबर 2014 को आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकरण किया गया था। उसका वजन सात किलो नौ सौ ग्राम था। यह कुपोषित नहीं था। अलीगढ़ गांव गोद लिया है। यहां सभी नौनिहालाें की देखरेख की जा रही है। अगर रेहान कुपोषण का शिकार होता तो उसका वजन छह किलो से कम होता। -सुनीता उपाध्याय, बाल विकास परियोजना अधिकारी, राजेपुर
दो कंबल देकर पोंछे आंसू
राजेपुर। जांच करने पहुंचे एसडीएम अमृतपुर और सीएमओ ने मृतक के माता-पिता के दो कंबल देकर आंसू पोंछ दिए। इनको कोई मदद दिलाने की कोशिश तक नहीं की।