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संकिसा में तक्षशिला और नालंदा की तर्ज पर खुलेगा आध्यात्मिक विश्वविद्यालय
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 03 Feb 2015 11:35 PM IST
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चीन ने भले ही तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता व धर्मगुरु दलाई लामा
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की ओबामा से पांच फरवरी को प्रस्तावित मुलाकात पर आंख टेढ़ी की हो लेकिन
उनकी ख्वाहिश उत्तर प्रदेश पूरी करेगा। दलाई लामा का सपना देश में नालंदा
और तक्षशिला की तर्ज पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का है। सूबे के
मुख्यमंत्री ने पहली ही मुलाकात में उनकी ख्वाहिश को पूरा करने का वचन
दिया।
सीएम का इशारा मिलते ही सरकारी मशीनरी ने फर्रुखाबाद व मैनपुरी में 500 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। यहां देश का पहला आधुनिक आध्यात्मिक विश्वविद्यलाय स्थापित करने की योजना है। दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान भारत में तक्षशिला व नालंदा की तर्ज पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की ख्वाहिश जताई थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संकिसा में ही उनकी ख्वाहिश पूरी करने को हामी भर दी। दूसरे ही दिन अफसरों की टीम जमीन ढूंढने में जुट गई।
अब फर्रुखाबाद एवं मैनपुरी की सीमा पर स्थिति दोनों जिले की ग्राम पंचायतों की करीब 500 एकड़ जमीन को चिह्नित किया गया है। मंगलवार को फर्रुखाबाद जिले के संकिसा, पमरखिरिया व मैनपुरी जिले के जसराजपुर व भैंसरोली में जमीन को चिह्नित कर सरकारी मशीनरी ने अपनी मुहर लगा दी है। जमीन तय करने के बाद प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। प्रदेश सरकार यह जमीन किसानों से खरीदेगी। बता दें कि दलाई लामा 30 जनवरी को संकिसा पहुंचे थे। दो दिन के प्रवास के बाद वह 1 फरवरी को विदा हो गए थे। उन्हें सुनने के लिए 27 देशाें के अनुआई संकिसा पहुंचे थे।
यह प्रोजेक्ट चढ़ेंगे परवान
इस जमीन पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, टूरिज्म पार्क, अस्पताल, म्यूजियम, अंतरराष्ट्रीय स्तर की लाइब्रेरी के अलावा दूसरे प्रोजेक्ट विकसित किए जाने की योजना है। प्राचीन भारत में तक्षशिला व नालंदा आध्यात्मिक शिक्षा की लिहाज से दुनियां के सबसे बड़े केंद्र थे। इन्हीं से प्रेरित होकर बाद के सालाें में मलेशिया, चीन, श्रीलंका में बुद्धिस्टाें ने ऐसे संस्थान शुरू किए। अब संकिसा में भी यह प्राचीन परंपरा आधुनिक ढंग से अस्तित्व में आएगी। चिह्नित जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव पास होने के बाद किसानाें की सूची तैयार की जाएगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
तहसीलदार संजीव ओझा ने बताया कि जमीन चिह्नित कर ली गई है। दलाईलामा के दुभाषिया रहे कैलाश बौद्ध ने बताया कि वह देश में तक्षशिला व नालंदा की तरह आधुनिक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चाहते हैं। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। जमीन चिन्हित कर प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है।
सीएम का इशारा मिलते ही सरकारी मशीनरी ने फर्रुखाबाद व मैनपुरी में 500 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। यहां देश का पहला आधुनिक आध्यात्मिक विश्वविद्यलाय स्थापित करने की योजना है। दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान भारत में तक्षशिला व नालंदा की तर्ज पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की ख्वाहिश जताई थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संकिसा में ही उनकी ख्वाहिश पूरी करने को हामी भर दी। दूसरे ही दिन अफसरों की टीम जमीन ढूंढने में जुट गई।
अब फर्रुखाबाद एवं मैनपुरी की सीमा पर स्थिति दोनों जिले की ग्राम पंचायतों की करीब 500 एकड़ जमीन को चिह्नित किया गया है। मंगलवार को फर्रुखाबाद जिले के संकिसा, पमरखिरिया व मैनपुरी जिले के जसराजपुर व भैंसरोली में जमीन को चिह्नित कर सरकारी मशीनरी ने अपनी मुहर लगा दी है। जमीन तय करने के बाद प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। प्रदेश सरकार यह जमीन किसानों से खरीदेगी। बता दें कि दलाई लामा 30 जनवरी को संकिसा पहुंचे थे। दो दिन के प्रवास के बाद वह 1 फरवरी को विदा हो गए थे। उन्हें सुनने के लिए 27 देशाें के अनुआई संकिसा पहुंचे थे।
यह प्रोजेक्ट चढ़ेंगे परवान
इस जमीन पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, टूरिज्म पार्क, अस्पताल, म्यूजियम, अंतरराष्ट्रीय स्तर की लाइब्रेरी के अलावा दूसरे प्रोजेक्ट विकसित किए जाने की योजना है। प्राचीन भारत में तक्षशिला व नालंदा आध्यात्मिक शिक्षा की लिहाज से दुनियां के सबसे बड़े केंद्र थे। इन्हीं से प्रेरित होकर बाद के सालाें में मलेशिया, चीन, श्रीलंका में बुद्धिस्टाें ने ऐसे संस्थान शुरू किए। अब संकिसा में भी यह प्राचीन परंपरा आधुनिक ढंग से अस्तित्व में आएगी। चिह्नित जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव पास होने के बाद किसानाें की सूची तैयार की जाएगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
तहसीलदार संजीव ओझा ने बताया कि जमीन चिह्नित कर ली गई है। दलाईलामा के दुभाषिया रहे कैलाश बौद्ध ने बताया कि वह देश में तक्षशिला व नालंदा की तरह आधुनिक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चाहते हैं। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। जमीन चिन्हित कर प्रस्ताव सरकार को भेजा जा रहा है।