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Farrukhabad News: दस लोगों के जिंदा जलने के छह साल बाद भी दौड़ रहीं अमानक स्लीपर बसें
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फोटो-6 शहर के चांदपुर के पास पेट्रोल पंप पर खड़ी स्लीपर बस में पीछे कांच की जगह लगी टिन व लगी अ
फर्रुखाबाद। कन्नौज की कोतवाली छिबरामऊ के गांव घिलोई के पास ट्रक की टक्कर से स्लीपर बस में आग लगने की घटना में 10 लोगों की मौत होने के छह वर्ष बाद भी हालात नहीं बदले हैं। आज भी जनपद में 100 से अधिक अमानक स्लीपर बसें दिल्ली, जयपुर सहित अन्य शहरों के लिए अलग-अलग स्थानों से यात्रियों को बैठाकर दौड़ लगा रही हैं और जिम्मेदार आंखें बंद किए हैं। नोएडा में स्लीपर बस में आग लगने की घटना के बाद भी जिम्मेदारों ने जनपद में जांच करने की जहमत नहीं उठाई।
10 जनवरी 2020 को जिले की चतुर्वेदी बस सर्विस की स्लीपर बस में छिबरामऊ के गांव घिलोई में आग लगने की घटना हुई थी। इसमें जिंदा जलने वालों में पांच लोग एक ही परिवार के कमालगंज थाना क्षेत्र के गांव उगरापुर के रहने वाले थे। इसके बाद अभी भी दिल्ली व जयपुर के लिए अमानक स्लीपर बसें बेखौफ चल रहीं हैं। इस खेल में परिवहन निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ पुलिस का भी हिस्सा तय है। जो समय पर हिस्सा नहीं देता उसी बस पर कार्रवाई हो जाती है।
शहर में स्लीपर बसों की पड़ताल की गई तो अधिकांश बसों में पीछे की ओर लगने वाले शीशे की जगह टिन लगी मिली। चांदपुर के पास एक पेट्रोल पंप पर दो बसें खड़ी मिलीं। इन बसों में पीछे की ओर आधे हिस्से में जहां शीशा होना चाहिए था, वहां डेढ़ गुणा डेढ़ फीट में एक शीशा लगा था। मानक के अनुसार साइड में होने वाली आपातकालीन खिड़की की बजाय पीछे ही एक खिड़की बनी दिख रही है। यही हाल आईटीआई चौराहे के पास खड़ी एक बस का था।
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बस के अंदर की गैलरी इतनी संकरी है कि सेहतमंद यात्री को ही निकल में दिक्कत होती है। दो यात्री को एक साथ निकल ही नहीं सकते। बसों में बैठने वाली सीटों की दूरी कम करके दो-चार सीटों की संख्या बढ़ा लेते हैं। इससे यात्रियों को बैठने में भी दिक्कत हैं। यही नहीं मनमानी तरीके से नियम के विरुद्ध रोडवेज बस अड्डा के चंद कदम दूरी पर इन बस संचालकों के बुकिंग काउंटर खुले हैं।
आईटीआई चौराहा, कादरीगेट के अलावा ग्रामीण इलाकों में जहां से बसें चलती हैं और सभी स्टॉपेज पर काउंटर बने हैं। इन बसों को परमिट एक स्थान से यात्रियों को उठाकर दूसरे स्थान तक पहुंचाना मगर रास्ते में हर स्थान से यात्रियों को भरकर ले जाते हैं। अमानक इन बसों को जिम्मेदार अधिकारी फिट कर देते हैं। यही नहीं इन्हें पकड़ा भी नहीं जाता।
एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत ने कहा कि लगातार स्लीपर बसों की चेकिंग करते हैं। सबसे पहले कागजात चेक किए जाते हैं कि उनमें कोई कमी तो नहीं है। इसके साथ ही इमरजेंसी विंडो, पीछे कांच न लगे होने आदि की कमियां होने पर कठोर कार्रवाई की जाती है। सितंबर में अभी तक छह स्लीपर बसों को सीज किया गया है। जीएसटी की टीम, सीओ व ट्रैफिक पुलिस के साथ चेक किया जाता है, जो गड़बड़ी मिलती है उसके अनुसार कार्रवाई की जाती है।
यह हैं स्लीपर बसों के मानक
ऑटोमोटिव उद्योग मानक के तहत स्लीपर बस और उसके भीतर की बर्थ की ऊंचाई और आयाम, फर्श से लेकर बिना दबे हुए कुशन तक निचली बर्थ की ऊंचाई, निचली से ऊपरी बर्थ की दूरी, गैंगवे और साइड वॉल की ऊंचाई/दूरी (एसी बसों), बर्थ की लंबाई व चौड़ाई के अलावा पिछली दीवार पर ऊपरी आधे हिस्से में शीशा, दोनों तरफ गैलरी के बीच की कम दूरी, आग बुझाने के लिए निर्धारित पांच-पांच लीटर के दो-दो यंत्र आदि मानक हैं। यही नहीं बस की ऊंचाई भी निर्धारित है।
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10 जनवरी 2020 को जिले की चतुर्वेदी बस सर्विस की स्लीपर बस में छिबरामऊ के गांव घिलोई में आग लगने की घटना हुई थी। इसमें जिंदा जलने वालों में पांच लोग एक ही परिवार के कमालगंज थाना क्षेत्र के गांव उगरापुर के रहने वाले थे। इसके बाद अभी भी दिल्ली व जयपुर के लिए अमानक स्लीपर बसें बेखौफ चल रहीं हैं। इस खेल में परिवहन निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ पुलिस का भी हिस्सा तय है। जो समय पर हिस्सा नहीं देता उसी बस पर कार्रवाई हो जाती है।
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शहर में स्लीपर बसों की पड़ताल की गई तो अधिकांश बसों में पीछे की ओर लगने वाले शीशे की जगह टिन लगी मिली। चांदपुर के पास एक पेट्रोल पंप पर दो बसें खड़ी मिलीं। इन बसों में पीछे की ओर आधे हिस्से में जहां शीशा होना चाहिए था, वहां डेढ़ गुणा डेढ़ फीट में एक शीशा लगा था। मानक के अनुसार साइड में होने वाली आपातकालीन खिड़की की बजाय पीछे ही एक खिड़की बनी दिख रही है। यही हाल आईटीआई चौराहे के पास खड़ी एक बस का था।
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बस के अंदर की गैलरी इतनी संकरी है कि सेहतमंद यात्री को ही निकल में दिक्कत होती है। दो यात्री को एक साथ निकल ही नहीं सकते। बसों में बैठने वाली सीटों की दूरी कम करके दो-चार सीटों की संख्या बढ़ा लेते हैं। इससे यात्रियों को बैठने में भी दिक्कत हैं। यही नहीं मनमानी तरीके से नियम के विरुद्ध रोडवेज बस अड्डा के चंद कदम दूरी पर इन बस संचालकों के बुकिंग काउंटर खुले हैं।
आईटीआई चौराहा, कादरीगेट के अलावा ग्रामीण इलाकों में जहां से बसें चलती हैं और सभी स्टॉपेज पर काउंटर बने हैं। इन बसों को परमिट एक स्थान से यात्रियों को उठाकर दूसरे स्थान तक पहुंचाना मगर रास्ते में हर स्थान से यात्रियों को भरकर ले जाते हैं। अमानक इन बसों को जिम्मेदार अधिकारी फिट कर देते हैं। यही नहीं इन्हें पकड़ा भी नहीं जाता।
एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत ने कहा कि लगातार स्लीपर बसों की चेकिंग करते हैं। सबसे पहले कागजात चेक किए जाते हैं कि उनमें कोई कमी तो नहीं है। इसके साथ ही इमरजेंसी विंडो, पीछे कांच न लगे होने आदि की कमियां होने पर कठोर कार्रवाई की जाती है। सितंबर में अभी तक छह स्लीपर बसों को सीज किया गया है। जीएसटी की टीम, सीओ व ट्रैफिक पुलिस के साथ चेक किया जाता है, जो गड़बड़ी मिलती है उसके अनुसार कार्रवाई की जाती है।
यह हैं स्लीपर बसों के मानक
ऑटोमोटिव उद्योग मानक के तहत स्लीपर बस और उसके भीतर की बर्थ की ऊंचाई और आयाम, फर्श से लेकर बिना दबे हुए कुशन तक निचली बर्थ की ऊंचाई, निचली से ऊपरी बर्थ की दूरी, गैंगवे और साइड वॉल की ऊंचाई/दूरी (एसी बसों), बर्थ की लंबाई व चौड़ाई के अलावा पिछली दीवार पर ऊपरी आधे हिस्से में शीशा, दोनों तरफ गैलरी के बीच की कम दूरी, आग बुझाने के लिए निर्धारित पांच-पांच लीटर के दो-दो यंत्र आदि मानक हैं। यही नहीं बस की ऊंचाई भी निर्धारित है।

फोटो-6 शहर के चांदपुर के पास पेट्रोल पंप पर खड़ी स्लीपर बस में पीछे कांच की जगह लगी टिन व लगी अ

फोटो-6 शहर के चांदपुर के पास पेट्रोल पंप पर खड़ी स्लीपर बस में पीछे कांच की जगह लगी टिन व लगी अ