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आत्म शुद्धि के लिये इच्छाओं का रोकना ही तप
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शहर के मोहल्ला जोगराज स्थित मंदिर में पूजन करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। शहर के जैन मंदिरों में पर्यूषण यानी दशलक्षण महापर्व का सातवां दिन उत्तम तप धर्म के रूप में मनाया गया। भगवान महावीर का अभिषेक व श्रृंगार कर भोग लगाया गया। समाज के महिला-पुरुषों ने विशेष पाठ किया। वक्ताओं ने कहा कि आत्मा की शुद्धि के लिए इच्छाओं को रोकना ही तप है।
महापर्व पर शहर के जोगराज, लोहाई रोड और सधवाड़ा के जैन मंदिरों में सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए। गुरुवार को इंद्र के वेश में कमल कुमार जैन, रोमिल जैन, नीरज जैन, वर्सिल जैन ने भगवान शांतिनाथजी की अभिषेक शांतिधारा कर पूजा की। पुजारी अभिषेक ने कहा कि मानसिक इच्छाएं सांसारिक बाहरी पदार्थों में चक्कर लगाया करती हैं या शरीर के सुख साधनों में केंद्रित रहती हैं। शरीर को प्रमादी न बनने देने के लिए बहिरंग तप किए जाते हैं।
मन की वृत्ति आत्म-मुख करने के लिए अंतरंग तपों का विधान है। दोनों प्रकार के तप आत्म शुद्धि के अमूल्य साधन हैं। कहा कि उपवास के लिए घर व व्यापार के कार्यों का त्याग, पांचों इंद्रियों के विषयों का त्याग करना जरूरी है। स्वाध्याय करें और सांसारिक कार्य से दूर रहें। इस मौके पर कन्हैया लाल जैन, सनी जैन, पूनम जैन, मणि जैन, आरती जैन, वर्षा जैन, रशिया आदि मौजूद रहे।
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महापर्व पर शहर के जोगराज, लोहाई रोड और सधवाड़ा के जैन मंदिरों में सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए। गुरुवार को इंद्र के वेश में कमल कुमार जैन, रोमिल जैन, नीरज जैन, वर्सिल जैन ने भगवान शांतिनाथजी की अभिषेक शांतिधारा कर पूजा की। पुजारी अभिषेक ने कहा कि मानसिक इच्छाएं सांसारिक बाहरी पदार्थों में चक्कर लगाया करती हैं या शरीर के सुख साधनों में केंद्रित रहती हैं। शरीर को प्रमादी न बनने देने के लिए बहिरंग तप किए जाते हैं।
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मन की वृत्ति आत्म-मुख करने के लिए अंतरंग तपों का विधान है। दोनों प्रकार के तप आत्म शुद्धि के अमूल्य साधन हैं। कहा कि उपवास के लिए घर व व्यापार के कार्यों का त्याग, पांचों इंद्रियों के विषयों का त्याग करना जरूरी है। स्वाध्याय करें और सांसारिक कार्य से दूर रहें। इस मौके पर कन्हैया लाल जैन, सनी जैन, पूनम जैन, मणि जैन, आरती जैन, वर्षा जैन, रशिया आदि मौजूद रहे।
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