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भाजपा, बसपा, निर्दलीयों को एकजुट करने में रहे कामयाब
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भाजपा के मंच पर जुटे सपा-बसपा नेता
फर्रुखाबाद। समाजवादी पार्टी से बगावत कर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हासिल कर चुकीं मोनिका यादव की जीत की आधारशिला भी अन्य पार्टियों के बागियों ने रखी। जिले में पकड़ रखने वाले कुछ लोग भाजपा के साथ ही सपा और निर्दलियों को एकजुट करने में कामयाब रहे। मोनिका की जीत की खुशी में हुए कार्यक्रम में भी भाजपा सांसद, विधायक समेत सपा व बसपा के नेता एक मंच पर नजर आए।
मोनिका और उनके भाई सचिन ने शुरू से ही बाहरी को भगाना, जिले को जिताना है का नारा दिया। उन्होंने भाजपा, बसपा और निर्दलियों से यही कहकर समर्थन मांगा। यही नहीं समाजसेवी और पूर्व बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे से भी समर्थन मांगा। डॉ. दुबे ने मतदान तक भाजपा के सांसद, विधायकों और बसपा नेताओं को एकजुट रखा।
सपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले कंपिल नगर पंचायत अध्यक्ष उदयपाल यादव ने भी सपा प्रत्याशी की खिलाफत की। जीत के बाद मोनिका के स्वागत कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनुपम के साथ मंच पर सांसद मुकेश राजपूत, कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन कुलदीप गंगवार, कंपिल चेयरमैन उदयपाल यादव, नदौरा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रदीप यादव एक साथ नजर आए। कायमगंज निवासी बसपा के एक बड़े नेता भी कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्हें कंपिल चेयरमैन ने मंच पर भी बुलाया था।
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सपा ने शुरू किया मंथन
सपा प्रत्याशी डॉ. सुबोध यादव की हार के बाद पार्टी के पदाधिकारियों में देर रात तक मंथन चलता रहा। सच तो यह है कि सुबोध को जिताने के लिए जिले के साथ नहीं राष्ट्रीय नेतृत्व का भी सीधा दखल रहा। इसके बावजूद बात नहीं बनी।
पार्टी के नेता भले ही प्रशासन पर आरोप मढ़ रहे हों, मगर टिकट बंटवारे में हुए पक्षपात से जिले के तमाम नेता नाखुश थे। कई बड़े कार्यकर्ताओं ने तो शनिवार रात एक नेता के यहां हुई बैठक में खुलकर नाराजगी भी व्यक्त की।
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फर्रुखाबाद। समाजवादी पार्टी से बगावत कर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हासिल कर चुकीं मोनिका यादव की जीत की आधारशिला भी अन्य पार्टियों के बागियों ने रखी। जिले में पकड़ रखने वाले कुछ लोग भाजपा के साथ ही सपा और निर्दलियों को एकजुट करने में कामयाब रहे। मोनिका की जीत की खुशी में हुए कार्यक्रम में भी भाजपा सांसद, विधायक समेत सपा व बसपा के नेता एक मंच पर नजर आए।
मोनिका और उनके भाई सचिन ने शुरू से ही बाहरी को भगाना, जिले को जिताना है का नारा दिया। उन्होंने भाजपा, बसपा और निर्दलियों से यही कहकर समर्थन मांगा। यही नहीं समाजसेवी और पूर्व बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे से भी समर्थन मांगा। डॉ. दुबे ने मतदान तक भाजपा के सांसद, विधायकों और बसपा नेताओं को एकजुट रखा।
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सपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले कंपिल नगर पंचायत अध्यक्ष उदयपाल यादव ने भी सपा प्रत्याशी की खिलाफत की। जीत के बाद मोनिका के स्वागत कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनुपम के साथ मंच पर सांसद मुकेश राजपूत, कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन कुलदीप गंगवार, कंपिल चेयरमैन उदयपाल यादव, नदौरा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रदीप यादव एक साथ नजर आए। कायमगंज निवासी बसपा के एक बड़े नेता भी कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्हें कंपिल चेयरमैन ने मंच पर भी बुलाया था।
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सपा ने शुरू किया मंथन
सपा प्रत्याशी डॉ. सुबोध यादव की हार के बाद पार्टी के पदाधिकारियों में देर रात तक मंथन चलता रहा। सच तो यह है कि सुबोध को जिताने के लिए जिले के साथ नहीं राष्ट्रीय नेतृत्व का भी सीधा दखल रहा। इसके बावजूद बात नहीं बनी।
पार्टी के नेता भले ही प्रशासन पर आरोप मढ़ रहे हों, मगर टिकट बंटवारे में हुए पक्षपात से जिले के तमाम नेता नाखुश थे। कई बड़े कार्यकर्ताओं ने तो शनिवार रात एक नेता के यहां हुई बैठक में खुलकर नाराजगी भी व्यक्त की।