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सेवानिवृत्त बैंक कर्मी को पुत्रों ने घर से निकाला
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फर्रुखाबाद। सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को उसके पुत्रों ने बुढ़ापे में दो वक्त की रोटी देने की बजाय घर से निकाल दिया। तीन साल से बुजुर्ग पुत्री और रिश्तेदारों के घर रहकर गुजारा करने को मजबूर हैं।
अब बुजुर्ग ने कोर्ट में अर्जी दायर करके पुत्रों और बहुओं को उसके घर से बेदखल करने व उनसे भरण पोषण दिलाने की गुहार लगाई है। एसडीएम ने पीड़ित के तीन पुत्रों और दो बहुओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मोहल्ला नुनहाई स्ट्रीट निवासी विमल कुमार दीक्षित (69) ने पुत्रों मनोज, अरविंद, अरुण और शशी पत्नी अरविंद, अनुपम उर्फ एकता पत्नी अरुण के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में वरिष्ठ नागरिक एवं माता-पिता का कल्याण एवं भरण पोषण अधिनियम 2007 के तहत अर्जी दायर की है।
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इसमें कहा है कि उन्होंने 31 दिसंबर 2000 को बैंक ऑफ इंडिया से कैशियर पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। उस समय स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर पेंशन नहीं दी जाती थी। पुत्र मनोज ब्याज पर रुपये देने, अरविंद एलआईसी एजेंट और पुत्र अरुण बिजली विभाग में मीटर लगाने का काम करता है।
पत्नी ज्ञानदेवी की एक मई 2010 में मौत हो गई। इसके बाद तीनों बेटों और बहुओं ने उसका उत्पीड़न करना शुरू कर दिया। आए दिन मारपीट व गाली गलौज कर अपमानित करने लगे। वर्ष 2017 में दीपावली के दिन पुत्रों और बहुओं ने मारपीट कर उसके स्वामित्व वाले घर से धक्का मारकर निकाल दिया।
तब से पुत्री या रिश्तेदारों के घर रहकर वह गुजारा कर रहे हैं। पीड़ित के अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने पर एसडीएम सदर ने तीनों पुत्रों और दो पुत्रवधू को नोटिस जारी कर 5 जनवरी 2021 को पक्ष रखने का आदेश दिया है।
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अब बुजुर्ग ने कोर्ट में अर्जी दायर करके पुत्रों और बहुओं को उसके घर से बेदखल करने व उनसे भरण पोषण दिलाने की गुहार लगाई है। एसडीएम ने पीड़ित के तीन पुत्रों और दो बहुओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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मोहल्ला नुनहाई स्ट्रीट निवासी विमल कुमार दीक्षित (69) ने पुत्रों मनोज, अरविंद, अरुण और शशी पत्नी अरविंद, अनुपम उर्फ एकता पत्नी अरुण के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में वरिष्ठ नागरिक एवं माता-पिता का कल्याण एवं भरण पोषण अधिनियम 2007 के तहत अर्जी दायर की है।
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इसमें कहा है कि उन्होंने 31 दिसंबर 2000 को बैंक ऑफ इंडिया से कैशियर पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। उस समय स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर पेंशन नहीं दी जाती थी। पुत्र मनोज ब्याज पर रुपये देने, अरविंद एलआईसी एजेंट और पुत्र अरुण बिजली विभाग में मीटर लगाने का काम करता है।
पत्नी ज्ञानदेवी की एक मई 2010 में मौत हो गई। इसके बाद तीनों बेटों और बहुओं ने उसका उत्पीड़न करना शुरू कर दिया। आए दिन मारपीट व गाली गलौज कर अपमानित करने लगे। वर्ष 2017 में दीपावली के दिन पुत्रों और बहुओं ने मारपीट कर उसके स्वामित्व वाले घर से धक्का मारकर निकाल दिया।
तब से पुत्री या रिश्तेदारों के घर रहकर वह गुजारा कर रहे हैं। पीड़ित के अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई पूरी होने पर एसडीएम सदर ने तीनों पुत्रों और दो पुत्रवधू को नोटिस जारी कर 5 जनवरी 2021 को पक्ष रखने का आदेश दिया है।