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आलू में चेचक, कोल्ड स्टोरेज भरने का हो सकता संकट

Mon, 31 Jan 2022 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 31 Jan 2022 11:03 PM IST
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Smallpox in potatoes, there may be a crisis of filling cold storage
गांव ज्योता में आलू की फसल में पानी लगाता किसान। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। इस साल बार-बार बिगड़े मौसम ने आलू किसानों को बर्बाद कर दिया है। पहले बारिश से बोई गई अगेती फसल खराब हो गई, फिर पछेती फसल में झुलसा और अब चेचक रोग लग गया है। इस कारण आलू की सही कीमत भी नहीं मिल रही है। आलू की पैदावार करीब 30 फीसदी घटने की आशंका है।
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इस सीजन में आलू किसानों पर कई बार मुसीबत आई। फसल की बुवाई के बाद दो बार कई दिन चली बारिश से आलू की कुड़ी में पानी भर गया था। इससे फसल को नुकसान हुआ। आलू की बेलें जब बढ़ीं तो झुलसा रोग लग गया। कई किसानों की फसलों की बेलें झुलस गईं।
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अब आलू में चेचक रोग लग गया है। इससे आलू की पैदावार प्रभावित हो रही है। जिन खेतों में आलू की खोदाई हो रही है, उनमें 30 प्रतिशत तक आलू कम निकल रहा है। फसल अब पकने की स्थिति में है। पकी फसल का जो आलू शीतगृहों में भंडारित होगा। उसकी खोदाई भी शुरू होने वाली है।
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राजेपुर सरायमेदा के प्रगतिशील किसान अनवार हुसैन उर्फ चंदा फौजी का कहना है कि इस बार खोदाई में चेचक के साथ काफी आलू सड़ा भी निकल रहा है। 134 पैकेट आलू रविवार को कानपुर भेजा था। 300 रुपये पैकेट (बोरी) से भी दाम कम मिले। भाव कम होने व माल कम निकलने से तीन हजार रुपये बीघा तक घाटा हुआ है।
कमालगंज के ककरैया निवासी आलू बीज व्यापारी शरद कुमार बताते हैं कि पक्की फसल में पिछली साल से 30 फीसदी आलू कम निकलेगा। इससे शीतगृह भी नहीं भर पाएंगे। आलू की गुणवत्ता भी पहले जैसी नहीं है। कई किसानों ने तीन बार दवा का छिड़काव किया। इसके बाद भी झुलसा रोग से फसल को बचाने में कामयाब नहीं हो पाए।

जिला आलू विकास अधिकारी आरएन वर्मा का कहना है कि पक्की फसल की जब खोदाई होगी, तभी पैदावार का आकलन होगा। वैसे इस बार मौसम अनुकूल न होने से पैदावार घटनी तय है। आलू का रकबा भी करीब एक हजार हेक्टेयर घटा है। शीतगृह 94 से बढ़कर 95 हो गए हैं। पुराने शीतगृहों ने भी क्षमता बढ़ाई है। इससे भंडारण क्षमता 7.30 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 8.80 लाख मीट्रिक टन हो गई है।
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