{"_id":"68fbc4ac9c1ead325b02b9e4","slug":"shringirampurs-folk-artist-will-join-the-culture-department-farrukhabad-news-c-222-1-frk1001-131717-2025-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: संस्कृति विभाग से जुड़ेंगे श्रृंगीरामपुर के लोक कलाकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: संस्कृति विभाग से जुड़ेंगे श्रृंगीरामपुर के लोक कलाकार
Fri, 24 Oct 2025 11:55 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Fri, 24 Oct 2025 11:55 PM IST
विज्ञापन
फोटो-01, श्रृंगीरामपुर में प्रस्तुति देते लोक कलाकार। संवाद
कमालगंज। श्रृंगीरामपुर के लोक कलाकार अब प्रदेश के संस्कृति विभाग से जुड़ेंगे। आयोजनों के लिए इनका पंजीकरण किया जाएगा। इससे लोक कलाकार अपनी रंगमंचीय व गायन प्रतिभा को नया मुकाम दे सकेंगे।
पौराणिक नगरी श्रृंगीरामपुर में लोक कलाओं का इतिहास पुराना है। आल्हा गायन, कीर्तन, रंगमंचीय अभिनय व रामलीला कार्यक्रमों की प्रस्तुति से लोक कलाकार जुड़े हैं। श्रृंगीरामपुर में लोक कलाकार अजय द्विवेदी, श्यामजी मिश्रा, जितेंद्र कुमार तिवारी, शालू पांडेय सहित कई कलाकारों ने अपनी कला प्रतिभा से दूर-दूर तक छाप छोड़ी है। यह कलाकार कई जिलों में रंगमंच व रामलीला कार्यक्रमों में सराहना पा चुके हैं।
भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर व जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने लोक कलाकारों को प्रोत्साहन दिए जाने पर जोर दिया है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दीप्ति वत्स का कहना है कि श्रृंगीरामपुर के लोक कलाकारों का प्रदेश के संस्कृति विभाग में पंजीकरण हो, इसके लिए उन्हें पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। ग्राम प्रधान पिंटू यादव ने बताया कि पंजीकरण होने से लोक कलाकारों को और अधिक ख्याति मिल सकेगी। (संवाद)
विज्ञापन
सशक्तीकरण की गूंज
लोक कलाकार अजय दुबे कहते हैं कि श्रृंगीरामपुर के कलाकार अपने अभिनय में गायकी का भी प्रयोग करते हैं। कीर्तन कार्यक्रम में भक्ति गंगा व लोकगीत में महिला सशक्तीकरण की गूंज होती है। मानो तो मैं गंगा मां हूं... गीत सराहा जा रहा।
नई पीढ़ी भी जुड़ेगी
आल्हा गायन मंडली के अस्तल निवासी चंद्रपाल यादव कहते हैं कि लोक गायन को सरकारी संरक्षण मिलेगा तो नई पीढ़ी भी परंपराओं और अपनी माटी से जुड़ी रहेगी। आल्हा गायन मंडली एटा, मैनपुरी, हरदोई, औरैया, कन्नौज आदि जिलों में प्रस्तुति देती है।
विज्ञापन
पौराणिक नगरी श्रृंगीरामपुर में लोक कलाओं का इतिहास पुराना है। आल्हा गायन, कीर्तन, रंगमंचीय अभिनय व रामलीला कार्यक्रमों की प्रस्तुति से लोक कलाकार जुड़े हैं। श्रृंगीरामपुर में लोक कलाकार अजय द्विवेदी, श्यामजी मिश्रा, जितेंद्र कुमार तिवारी, शालू पांडेय सहित कई कलाकारों ने अपनी कला प्रतिभा से दूर-दूर तक छाप छोड़ी है। यह कलाकार कई जिलों में रंगमंच व रामलीला कार्यक्रमों में सराहना पा चुके हैं।
विज्ञापन
भोजपुर विधायक नागेंद्र सिंह राठौर व जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने लोक कलाकारों को प्रोत्साहन दिए जाने पर जोर दिया है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दीप्ति वत्स का कहना है कि श्रृंगीरामपुर के लोक कलाकारों का प्रदेश के संस्कृति विभाग में पंजीकरण हो, इसके लिए उन्हें पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। ग्राम प्रधान पिंटू यादव ने बताया कि पंजीकरण होने से लोक कलाकारों को और अधिक ख्याति मिल सकेगी। (संवाद)
विज्ञापन
सशक्तीकरण की गूंज
लोक कलाकार अजय दुबे कहते हैं कि श्रृंगीरामपुर के कलाकार अपने अभिनय में गायकी का भी प्रयोग करते हैं। कीर्तन कार्यक्रम में भक्ति गंगा व लोकगीत में महिला सशक्तीकरण की गूंज होती है। मानो तो मैं गंगा मां हूं... गीत सराहा जा रहा।
नई पीढ़ी भी जुड़ेगी
आल्हा गायन मंडली के अस्तल निवासी चंद्रपाल यादव कहते हैं कि लोक गायन को सरकारी संरक्षण मिलेगा तो नई पीढ़ी भी परंपराओं और अपनी माटी से जुड़ी रहेगी। आल्हा गायन मंडली एटा, मैनपुरी, हरदोई, औरैया, कन्नौज आदि जिलों में प्रस्तुति देती है।

फोटो-01, श्रृंगीरामपुर में प्रस्तुति देते लोक कलाकार। संवाद

फोटो-01, श्रृंगीरामपुर में प्रस्तुति देते लोक कलाकार। संवाद