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Farrukhabad News: वरिष्ठ लेखाकार का पीएसी मुख्यालय लखनऊ हो चुका तबादला
Sun, 16 Nov 2025 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sun, 16 Nov 2025 12:27 AM IST
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फर्रुखाबाद। वरिष्ठ लेखाकार की अधिकारियों में बहुत मजबूत पकड़ थी। इसी का नतीजा है कि पीएसी मुख्यालय लखनऊ तबादला होने के बाद भी उसे व उसके साथी कर्मचारी को कार्यमुक्त नहीं किया गया।
जबकि पीएसी मुख्यालय से चार-चार बार उन्हें कार्यमुक्त किए जाने के पत्र आ चुके हैं। चार नवंबर को इस संदर्भ में पत्र आया था पर उसे कार्यमुक्त नहीं किया गया।
कुछ माह पूर्व वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र सिंह चौहान और उनके साथी वरिष्ठ लेखाकार नवीन कुमार जायसवाल का तबादला पीएसी मुख्यालय लखनऊ के लिए हो गया था, लेकिन उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। इससे दोनों ही वरिष्ठ लेखाकार अपने पटल पर डटे थे।
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इस मामले चार नवंबर 2025 को अपर पुलिस अधीक्षक (निमित्त पुलिस महानिरीक्षक, पीएसी मुख्यालय) विजय शंकर मिश्र ने अपर पुलिस महानिदेशक कानपुर जोन को पत्र भेजा था। इसमें तत्काल कर्मचारियों को नए नियुक्ति स्थल के लिए कार्यमुक्त करने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद भी दोनों में से एक भी वरिष्ठ लेखाकार को फतेहगढ़ स्थित पुलिस ऑफिस से कार्यमुक्त नहीं किया गया है। इसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
विजिलेंस नौ को जांच करने आई, 13 को थी दबोचने की तैयारी
फर्रुखाबाद। सूत्र बताते हैं कि डीजीपी से आठ नवंबर को हेड कांस्टेबल आदित्य कुमार वर्मा ने शिकायत की थी। इसके बाद नौ नवंबर को विजिलेंस टीम जांच करने फतेहगढ़ आई थी। जांच में शिकायत सही पाई गई। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंची तो वरिष्ठ लेखाकार को पकड़ने के लिए जाल बुना गया। विजिलेंस इंस्पेक्टर राजन कुमार रावत के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इस टीम में महिला अधिकारी भी शामिल थीं। टीम के कुछ सदस्य 13 नवंबर को ही जिले में आ गए थे।
उन्होंने रेकी कर वरिष्ठ लेखाकार को पकड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी। हेड कांस्टेबल को भी उन्होंने रुपये देने का तरीका बताया। उनके बताए अनुसार ही हेड कांस्टेबल ने रजिस्टर में 15 हजार रुपये दे दिए थे। वहीं विजिलेंस के जारी हुए प्रेस नोट में 11 नवंबर को सतर्कता अधिष्ठान कार्यालय कानपुर में शिकायत किए जाने का उल्लेख किया गया है। (संवाद)
विजिलेंस टीम के शहर में होने की रही चर्चा
वरिष्ठ लेखाकार के पकड़े जाने के बाद से कई तरह की चर्चाएं शहर में हो रही हैं। वहीं पुलिस ऑफिस के अलावा अन्य कार्यालयों के कर्मचारी भी सतर्क हो गए हैं। आम लोगों के साथ कर्मचारियों में चर्चा रही कि विजिलेंस के कुछ सदस्य अभी जिला मुख्यालय पर डेरा डाले हैं। पर विजिलेंस इंस्पेक्टर राजन कुमार रावत ने इस बात से इन्कार किया।
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जबकि पीएसी मुख्यालय से चार-चार बार उन्हें कार्यमुक्त किए जाने के पत्र आ चुके हैं। चार नवंबर को इस संदर्भ में पत्र आया था पर उसे कार्यमुक्त नहीं किया गया।
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कुछ माह पूर्व वरिष्ठ लेखाकार हरेंद्र सिंह चौहान और उनके साथी वरिष्ठ लेखाकार नवीन कुमार जायसवाल का तबादला पीएसी मुख्यालय लखनऊ के लिए हो गया था, लेकिन उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। इससे दोनों ही वरिष्ठ लेखाकार अपने पटल पर डटे थे।
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इस मामले चार नवंबर 2025 को अपर पुलिस अधीक्षक (निमित्त पुलिस महानिरीक्षक, पीएसी मुख्यालय) विजय शंकर मिश्र ने अपर पुलिस महानिदेशक कानपुर जोन को पत्र भेजा था। इसमें तत्काल कर्मचारियों को नए नियुक्ति स्थल के लिए कार्यमुक्त करने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद भी दोनों में से एक भी वरिष्ठ लेखाकार को फतेहगढ़ स्थित पुलिस ऑफिस से कार्यमुक्त नहीं किया गया है। इसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
विजिलेंस नौ को जांच करने आई, 13 को थी दबोचने की तैयारी
फर्रुखाबाद। सूत्र बताते हैं कि डीजीपी से आठ नवंबर को हेड कांस्टेबल आदित्य कुमार वर्मा ने शिकायत की थी। इसके बाद नौ नवंबर को विजिलेंस टीम जांच करने फतेहगढ़ आई थी। जांच में शिकायत सही पाई गई। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंची तो वरिष्ठ लेखाकार को पकड़ने के लिए जाल बुना गया। विजिलेंस इंस्पेक्टर राजन कुमार रावत के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इस टीम में महिला अधिकारी भी शामिल थीं। टीम के कुछ सदस्य 13 नवंबर को ही जिले में आ गए थे।
उन्होंने रेकी कर वरिष्ठ लेखाकार को पकड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी। हेड कांस्टेबल को भी उन्होंने रुपये देने का तरीका बताया। उनके बताए अनुसार ही हेड कांस्टेबल ने रजिस्टर में 15 हजार रुपये दे दिए थे। वहीं विजिलेंस के जारी हुए प्रेस नोट में 11 नवंबर को सतर्कता अधिष्ठान कार्यालय कानपुर में शिकायत किए जाने का उल्लेख किया गया है। (संवाद)
विजिलेंस टीम के शहर में होने की रही चर्चा
वरिष्ठ लेखाकार के पकड़े जाने के बाद से कई तरह की चर्चाएं शहर में हो रही हैं। वहीं पुलिस ऑफिस के अलावा अन्य कार्यालयों के कर्मचारी भी सतर्क हो गए हैं। आम लोगों के साथ कर्मचारियों में चर्चा रही कि विजिलेंस के कुछ सदस्य अभी जिला मुख्यालय पर डेरा डाले हैं। पर विजिलेंस इंस्पेक्टर राजन कुमार रावत ने इस बात से इन्कार किया।