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Farrukhabad News: झोलाछापों को फर्जी नोटिस भेजकर हो रही वसूली
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फर्रुखाबाद। जनपद में झोलाछाप स्वास्थ्य विभाग की कमाई का जरिया बने हैं। नोटिस भेजकर कार्रवाई के बजाए सीधे वसूली हो रही है। सीएमओ ने बुधवार को एक फर्जी नोटिस भी पकड़ा। उन्होंने आउटसोर्स कर्मी की सेवा समाप्त कर दी। दो नोडल अधिकारी होने के बावजूद चार माह से कोई कार्रवाई न होने पर जवाब मांगा।
जनपद में डेंगू के प्रकोप के बीच झोलाछापों का खेल तेजी से चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई के बजाए नोटिस देकर उनसे सीधे वसूली की जा रही है। झोलाछाप चिकित्सा उन्मूलन के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ.दीपक कटारिया व डॉ.आरसी माथुर है। सीएमओ ने उन्हें जुलाई में यह जिम्मेदारी सौंपी थी। तब से एक भी झोलाछाप के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जबकि करीब एक हजार झोलाछाप क्लीनिक, पैथाेलॉजी लैब, नर्सिंगहोम चला रहे हैं। इस बीच कई झोलाछापों की जांच के साथ नोटिस थमाए जा चुके हैं।
सीएमओ भी ने कई बार छापा मारकर झोलाछापों को मरीज भर्ती कर उपचार करते पकड़ा। सीएमओ के आदेश के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं कराई। बुधवार को सीएमओ ने एक एसीएमओ के नाम से झोलाछाप को भेजा गया फर्जी नोटिस पकड़ लिया। यह नोटिस गांव अर्रावाजपुर के झोलाछाप को भेजा गया था।
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नोडल अधिकारी ने जब झोलाछाप से पूछताछ की तो उसने एक आउटसोर्स कर्मी द्वारा नोटिस देने की बात कही। खास बात तो यह है कि नोटिस चाहे फर्जी हो या असली, विभाग के पटल प्रभारी लिपिक तक जानकारी भी नहीं पहुंचती। इससे इन नोटिसों की कोई लिखापढ़ी भी नहीं है और कार्रवाई भी नहीं दिख रही है। सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि दो-दो नोडल अधिकारी बनाने के बावजूद झोलाछापों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। फर्जी नोटिस भी जारी हो रहे हैं। इससे साफ है कि झोलाछापों से सीधे वसूली का खेल चल रहा है। बदनामी उन्हें झेलनी पड़ रही है। फर्जी नोटिस देने वाले आउटसोर्स कर्मी की सेवा समाप्त करने के लिए उन्होंने कार्यदायी संस्था को पत्र लिख दिया है।
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जनपद में डेंगू के प्रकोप के बीच झोलाछापों का खेल तेजी से चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई के बजाए नोटिस देकर उनसे सीधे वसूली की जा रही है। झोलाछाप चिकित्सा उन्मूलन के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ.दीपक कटारिया व डॉ.आरसी माथुर है। सीएमओ ने उन्हें जुलाई में यह जिम्मेदारी सौंपी थी। तब से एक भी झोलाछाप के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जबकि करीब एक हजार झोलाछाप क्लीनिक, पैथाेलॉजी लैब, नर्सिंगहोम चला रहे हैं। इस बीच कई झोलाछापों की जांच के साथ नोटिस थमाए जा चुके हैं।
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सीएमओ भी ने कई बार छापा मारकर झोलाछापों को मरीज भर्ती कर उपचार करते पकड़ा। सीएमओ के आदेश के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं कराई। बुधवार को सीएमओ ने एक एसीएमओ के नाम से झोलाछाप को भेजा गया फर्जी नोटिस पकड़ लिया। यह नोटिस गांव अर्रावाजपुर के झोलाछाप को भेजा गया था।
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नोडल अधिकारी ने जब झोलाछाप से पूछताछ की तो उसने एक आउटसोर्स कर्मी द्वारा नोटिस देने की बात कही। खास बात तो यह है कि नोटिस चाहे फर्जी हो या असली, विभाग के पटल प्रभारी लिपिक तक जानकारी भी नहीं पहुंचती। इससे इन नोटिसों की कोई लिखापढ़ी भी नहीं है और कार्रवाई भी नहीं दिख रही है। सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि दो-दो नोडल अधिकारी बनाने के बावजूद झोलाछापों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। फर्जी नोटिस भी जारी हो रहे हैं। इससे साफ है कि झोलाछापों से सीधे वसूली का खेल चल रहा है। बदनामी उन्हें झेलनी पड़ रही है। फर्जी नोटिस देने वाले आउटसोर्स कर्मी की सेवा समाप्त करने के लिए उन्होंने कार्यदायी संस्था को पत्र लिख दिया है।