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Farrukhabad News: मिलीभगत से झोलाछाप चला रहे निजी अस्पताल

Sat, 25 Jul 2026 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 12:15 AM IST
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Quacks running private hospitals in collusion with others.
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से बड़ी तादाद में निजी अस्पताल झोलाछाप चला रहे हैं। इससे आए दिन प्रसूता व नवजात की मौत की घटनाएं हो रही हैं। शुक्रवार को सीएमओ अपने कार्यालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग से डॉक्टरों को मातृ व शिशु मृत्युदर कम करने का पाठ पढ़ा रहे थे। इसी दौरान निजी अस्पताल में प्रसूता व नवजात की मौत की खबर आई।
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शहर के मसेनी चौराहे के आसपास कई निजी अस्पताल बिना डॉक्टर के ही झोलाछाप संचालित कर रहे हैं। कुछ सर्जन इन अस्पतालों में ऑपरेशन करने जाते हैं, लेकिन इस दौरान एनेस्थेटिस्ट को भी नहीं बुलाया जाता। शुक्रवार को मदर केयर हॉस्पिटल में सामान्य प्रसव कराया गया। आरोप है कि बिना डॉक्टर के अप्रशिक्षित कर्मी ने इतना बड़ा चीरा लगा दिया कि रक्तस्राव बंद ही नहीं हुआ। इससे प्रसूता की भी मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही से मौत होने का आरोप लगाया। सीएमओ ने डिप्टी सीएमओ डॉ. आरसी माथुर को मौके पर भेजा। उन्होंने मेनगेट में ताला लगाकर सील कर दिया, जबकि दो अन्य गेट खुले रहे और आना-जाना जारी रहा। जांच के दौरान कोई डॉक्टर मौके पर नहीं मिला। कर्मचारी भी खिसक लिए।
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सील होने के बाद खुल चुके हॉस्पिटल
केस 1. 23 मई को शहर के मसेनी चौराहे के निकट स्थित एसएस हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत हो गई थी। अस्पताल सील करने पहुंचे तत्कालीन सीएमओ से विवाद हो गया था। सिटी मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने पुलिस बल के साथ अस्पताल सील कराया था। हाजिरी लगवाने के बाद अस्पताल की सील खोल दी गई।
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केस 2. मसेनी चौराहे के लकूला रोड स्थित गायत्री हॉस्पिटल भी प्रसूता की मौत के बाद सील कर दिया गया था। यहां भर्ती चार मरीजों को एंबुलेंस से लोहिया अस्पताल भेज दिया गया था। अस्पताल में जांच के दौरान कोई एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं मिला था। फिलहाल यह अस्पताल इन दिनों संचालित है।

केस 3. शहर के बजरिया स्थित नेहा हॉस्पिटल में इंजेक्शन लगने के बाद गर्भवती की मौत हो गई थी। लापरवाही के आरोप में हंगामा होने के बाद ओटी सील कर दी गई थी। हालांकि दूसरे दिन ही खोल दी गई।
केस 4. बजरिया स्थित मां हॉस्पिटल की ओटी मई में ही प्रसूता की मौत के बाद सील की गई। इसके बाद आईएमए के डॉक्टर भी इनकी सिफारिश में डीएम से मिले थे। इसके बाद मानक पूरे मानकर सील खोल दी गई।

केस 5. मसेनी चौराहे के निकट स्थित कुलवंती हॉस्पिटल भी प्रसूता की मौत के बाद सील किया गया। इसकी सील कब खुल गई, यह किसी को पता भी नहीं है।
केस 6. मसेनी चौराहे के निकट हाईवे किनारे स्थित मयूर हॉस्पिटल में 28 जून को प्रसूता की मौत हो गई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर शिकायत की। इसके बाद अस्पताल में आग से निपटने के मानकों की जांच हुई तो वहां कोई संसाधन नहीं मिला। अस्पताल के संचालन पर रोक लगा दी गई थी।
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