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त50 रुपये पैकेट बिका आलू, लागत निकलने के लाले

Tue, 15 Dec 2020 10:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Dec 2020 10:38 PM IST
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Potato prices fall due to inward rise, farmers upset
सातनपुर मंडी में तौला जा रहा आलू। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। सातनपुर मंडी में आलू की आवक बढ़ने के साथ ही भाव में गिरावट जारी है। चार दिन में 700 रुपये क्विंटल भाव गिरने से किसान का दर्द उभरने लगा है। एक ओर गेहूं की बुवाई के लिए खेत खाली करना मजबूरी है। वहीं 550 से 650 रुपये पैकेट आलू की थोक बिक्री से लागत निकालने में किसानों के सामने लाले पड़े हैं। ऐसे में किसान परेशान है।
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खेतों में आलू की फसल तैयार है। गेहूं की बुवाई भी अब दिनों दिन लेट हो रही है। ऐसे में किसान आलू खोदकर गेहूं बुवाई के लिए खेत खाली करने में जुटा है। इसके चलते मंडी में आलू की आवक अचानक बढ़ गई है।
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आवक बढ़ने से आलू का भाव भी लगातार गिरता जा रहा है। मंगलवार को सातनपुर मंडी में करीब 250 ट्रक आलू पहुंचा। बिक्री शुरू हुई तो 550 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) से लेकर 650 रुपये तक बिका।
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महंगा बीज बोकर सस्ता आलू बिकने से किसानों के चेहरों पर मायूसी दिखी। किसानों का कहना है कि अब तो आलू में लागत निकालना भी मुश्किल है। कच्ची फसल खेत में रोकी भी नहीं जा सकती, इससे मंडी में बेचना मजबूरी है।
मंडी में पिछले तीन दिनों के भाव पर नजर डालें तो प्रतिदिन भाव में गिरावट जारी है। 12 दिसंबर को मंडी में करीब 100 ट्रक आलू की आवक रही। तब 900 से 950 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) की थोक बिक्री हुई।
13 दिसंबर को आवक बढ़ने के साथ मंडी में करीब 125 ट्रक आलू पहुंचा। उस दिन 750 रुपये से 800 रुपये पैकेट आलू बिका। 14 दिसंबर को मंडी में आलू की आवक बढ़कर 200 ट्रक से अधिक पहुंच गई तो भाव 650 से 700 रुपये पैकेट रह गया।
वहीं मंगलवार को मंडी में करीब 250 ट्रक आलू पहुंचने से भाव गिरकर 550 से 650 रुपये पैकेट तक सिमटकर रह गया।
नवाबगंज क्षेत्र के गांव उद्दीपुर निवासी रामनिवास सातनपुर मंडी में आलू बेचने पहुंचे। उनका 150 पैकेट आलू 641 रुपये प्रति पैकेट के भाव से बिका। उन्होंने बताया कि बुवाई के दौरान आलू बीज 1500 रुपये पैकेट था। जब फसल तैयार हुई तो आधी कीमत भी नहीं मिली। इससे अब लागत निकलने के भी लाले हैं। अब गेहूं की फसल पर उम्मीद है।
शमसाबाद के गांव मिल्क सुल्तान निवासी विनोद कुमार ने बताया कि 6 बीघा खेत में निकला 156 पैकेट आलू बेचने आए थे। 641 रुपये पैकेट आलू की बिक्री हुई। भाव अच्छा न मिलने से उम्मीदों पर पानी फिर गया।
मिल्क सुल्तान निवासी रंजीत ने मंडी में 151 पैकेट आलू बेचा। उन्हें भाव मिला 581 रुपये पैकेट। उन्होंने बताया कि एक बीघा आलू की फसल में करीब 13 हजार रुपये से अधिक की लागत आई। 20-22 पैकेट प्रति बीघा आलू की पैदावार हुई। इससे करीब दो हजार रुपये प्रति बीघा आलू की लागत में भी घाटा हो रहा है।
शमसाबाद के गांव मिलकिया निवासी संदेश यादव ने बताया कि उनका 225 पैकेट आलू 641 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से बिका। 10 बीघा आलू में लागत तो लगभग निकल आई, लेकिन खुद की मेहनत और भाड़ा घाटे में गया।
मंडी में आलू की आवक बढ़ने के साथ अब बाहर से भी मांग आने लगी है। मंगलवार को असम के लिए आलू की एक रैक लोड की गई। 21 बोगी की इस रैक में 21 हजार पैकेट (10500 क्विंटल) आलू असम जाएगा।

आलू आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष सुधीर वर्मा रिंकू ने बताया कि गेहूं की बुवाई के लिए किसान खेत खाली करने में जुटा है। इससे मंडी में अचानक आलू की आवक बढ़ने से भाव में गिरावट आई है। आवक घटने पर भी भाव में उछाल की संभावना है।
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