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Farrukhabad News: 30 साल पुराने लॉकर विवाद में पीएनबी को राहत, उपभोक्ता आयोग ने खारिज किया दावा
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फर्रुखाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, फर्रुखाबाद ने करीब 30 वर्ष पुराने बैंक लॉकर विवाद में पंजाब नेशनल बैंक को राहत देते हुए परिवाद निरस्त कर दिया। यह मामला वर्ष 1996 में मोहल्ला नुनहाई निवासी स्वर्गीय शिवनरायन दीक्षित की ओर से दायर किया गया था। परिवादी ने आरोप लगाया था कि वर्ष 1965 से संचालित संयुक्त लॉकर में रखे सोने-चांदी के जेवरातों में बैंक कर्मियों ने हेराफेरी की और लॉकर की चाबी दो वर्ष तक अपने पास रखी।
दायर किए गए परिवाद में कहा गया कि अगस्त 1994 में लॉकर की चाबी न मिलने पर बैंक से संपर्क किया गया, तब बैंक अभिलेखों में लॉकर को रिक्त दर्शाया गया। परिवादी ने बैंक पर अभिलेख गायब करने, लॉकर खोलने की अनुमति न देने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की थी।
पीएनबी की ओर से आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया कि लॉकर संचालन और उसमें रखी वस्तुओं की जानकारी बैंक को नहीं होती। आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य विपिन कुमार श्रीवास्तव और नाजरीन बेगम ने सुनवाई के दौरान माना कि मामला चोरी, हेराफेरी और कपट जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिनकी विस्तृत साक्ष्य के आधार पर सुनवाई सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आती है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए परिवाद खारिज कर दिया।
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दायर किए गए परिवाद में कहा गया कि अगस्त 1994 में लॉकर की चाबी न मिलने पर बैंक से संपर्क किया गया, तब बैंक अभिलेखों में लॉकर को रिक्त दर्शाया गया। परिवादी ने बैंक पर अभिलेख गायब करने, लॉकर खोलने की अनुमति न देने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की थी।
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पीएनबी की ओर से आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया कि लॉकर संचालन और उसमें रखी वस्तुओं की जानकारी बैंक को नहीं होती। आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार, सदस्य विपिन कुमार श्रीवास्तव और नाजरीन बेगम ने सुनवाई के दौरान माना कि मामला चोरी, हेराफेरी और कपट जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिनकी विस्तृत साक्ष्य के आधार पर सुनवाई सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आती है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए परिवाद खारिज कर दिया।
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