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Farrukhabad News: 25 लाख की पकड़ी पेस्टीसाइड का नमूना फेल

Fri, 25 Sep 2026 01:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:18 AM IST
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Pesticide sample from seized stock worth 25 lakh fails test
फर्रुखाबाद। चार माह पूर्व कृषि विभाग के अधिकारियों ने पांचालघाट पर 25 लाख रुपये कीमत की पेस्टीसाइड नकली होने की आशंका में पकड़ी थी। लैब में जांच कराई गई तो नमूना फेल हो गया। इसके मिश्रण में केमिकल नगण्य के बराबर पाए जाने से इस्तेमाल करने वाले किसानों की फसलें चौपट हो जातीं और किसानों का बर्बाद होना तय था।
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शहर के पांचालघाट स्थित एक घर के परिसर से पांच मई को उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र व तत्कालीन जिला कृषि रक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने 25 लाख रुपये कीमत की कीटनाशक पकड़ी थी। यूपीएल कंपनी के इलेक्ट्रॉन इनसेक्टीसाइड प्लस फंगीसाइड को अधिकारियों ने कब्जे में लेकर राजकीय कृषि रक्षा इकाई बुढ़नामऊ में रखवा दिया था। इसका नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया। बरामद कीटनाशक पर बैच नंबर, निर्माण व एक्सपायरी तिथि भी अंकित नहीं थी।
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तत्कालीन जिला कृषि रक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने कीटनाशक विक्रेता अभय एग्रो ट्रेडर्स कन्नौज व क्रेता किसान एजेंसीज के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया था। लैब से आई जांच रिपोर्ट में नमूना फेल हो गया। बताया जा रहा है कि यदि यह कीटनाशक किसानों के बेच दी जाती तो जिले में करोड़ों रुपये कीमत की फसलें रोग ग्रसित होकर नष्ट हो जातीं और किसान बर्बाद हो जाते। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉन में जिस केमिकल का जितनी मात्रा में मिश्रण होना चाहिए, जांच रिपोर्ट में एक प्रतिशत भी नहीं पाया गया। इससे यह केमिकल नगण्य की स्थिति में है।
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मात्रा का मानक और जांच में मिली उपलब्धता
25 लाख की पकड़ी गई इलेक्ट्रॉन इनसेक्टीसाइड प्लस फंगीसाइड के मिश्रण की मात्रा निर्धारित होती है। इससे आलू की फसल में रोग लगने पर इस कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाता है। मानक के अनुरूप मिश्रण न होने पर यह कीटनाशक फसल में कोई असर नहीं करती। इससे रोग ग्रसित फसल धीरे-धीरे नष्ट हो जाती और किसानों की लागत भी डूब जाती।


केमिकल का नाम- निर्धारित मात्रा - जांच में पाई गई मात्रा

एजॉक्सीस्ट्रोबिन - 2.5 प्रतिशत - 0.04 प्रतिशत

थायोफेनेट मिथाइल - 11.25 प्रतिशत - 0.29 प्रतिशत

थाईमेथोक्जाम - 25 प्रतिशत(FS) - 0.74 प्रतिशत

वर्जन
जांच में कीटनाशक का नमूना फेल गया है। यदि इस कीटनाशक का फसलों में इस्तेमाल किया जाता तो किसान को कोई फायदा मिलने वाला नहीं था। रोग से प्रभावित फसल सही व समय से कीटनाशक न पड़ने से नष्ट हो जाती। -शैलेंद्र कुमार वर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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