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काम की खातिर निकले लोग, पुलिस ने नहीं की सख्ती
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आवास विकास स्थित गैस एजेंसी पर नहीं हो रहा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन।
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। लॉकडाउन-2 के तीसरे दिन सुबह के वक्त जरूरतमंदों ने घरों से निकलकर घरेलू सामान की खरीदारी की। इसके बाद बैंकों के लिए लोगों की लाइनें चलती रहीं। हालांकि, पुलिस ने कोई खास सख्ती नहीं बरती। कुछ स्थानों पर ही वाहन चालकों से पूछताछ कर जाने दिया गया।
दोपहर में बाजारों में सन्नाटा रहा। इक्का-दुक्का लोग ही सड़कों पर दिखे। आवास विकास गैस एजेंसी पर सोशल डिस्टेंस का पूरे दिन मजाक बनाया जाता रहा। जिले में सुबह के वक्त तो बाजार में आम दिनों क तरह भीड़ दिखती है। हालांकि, जैसे-जैसे दोपहर होती है, लोग घरों में दुबक जाते हैं। लोगों में पुलिस से ज्यादा वायरस का भय रहता है।
शुक्रवार को भी सुबह के वक्त लोग बड़ी संख्या में घरों से निकले। मगर पूर्वाह्न 11 बजे चहल-पहल कम हो गई। लालगेट, चौक, तहसील तिराहे पर आने-जाने वालों से रोककर पूछताछ की गई, मगर तिकोना, पक्कापुल, घुमना, आईटीआई चौराहे पर कोई रोकटोक नहीं हुई। दिन में निकलने वाले लोग अपने साथ बैंकों की किताबें लेकर आ रहे हैं। वहीं, दिखाकर निकल जाते हैं। दोपहर के वक्त शहर में सन्नाटा रहा।
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इधर, आवास विकास स्थित एक गैस एजेंसी के बाहर सिलिंडर लेने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों को पर्ची कटाने के लिए कई-कई घंटे जूझना पड़ा। एजेंसी संचालकों ने सोशल डिस्टेंस का भी पालन नहीं कराया। लोग एक दूसरे के पास ही भीड़ लगाए खड़े रहे।
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दोपहर में बाजारों में सन्नाटा रहा। इक्का-दुक्का लोग ही सड़कों पर दिखे। आवास विकास गैस एजेंसी पर सोशल डिस्टेंस का पूरे दिन मजाक बनाया जाता रहा। जिले में सुबह के वक्त तो बाजार में आम दिनों क तरह भीड़ दिखती है। हालांकि, जैसे-जैसे दोपहर होती है, लोग घरों में दुबक जाते हैं। लोगों में पुलिस से ज्यादा वायरस का भय रहता है।
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शुक्रवार को भी सुबह के वक्त लोग बड़ी संख्या में घरों से निकले। मगर पूर्वाह्न 11 बजे चहल-पहल कम हो गई। लालगेट, चौक, तहसील तिराहे पर आने-जाने वालों से रोककर पूछताछ की गई, मगर तिकोना, पक्कापुल, घुमना, आईटीआई चौराहे पर कोई रोकटोक नहीं हुई। दिन में निकलने वाले लोग अपने साथ बैंकों की किताबें लेकर आ रहे हैं। वहीं, दिखाकर निकल जाते हैं। दोपहर के वक्त शहर में सन्नाटा रहा।
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इधर, आवास विकास स्थित एक गैस एजेंसी के बाहर सिलिंडर लेने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों को पर्ची कटाने के लिए कई-कई घंटे जूझना पड़ा। एजेंसी संचालकों ने सोशल डिस्टेंस का भी पालन नहीं कराया। लोग एक दूसरे के पास ही भीड़ लगाए खड़े रहे।