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तीन गांव में कागजों पर मनरेगा कार्य,सचिव प्रधान रोजगार सेवकों को नोटिस
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कमालगंज। फत्तेपुर राव साहब गांव में सोशल ऑडिट टीम द्वारा मनरेगा कार्य कागजों पर मिलने के बाद रविवार को बीडीओ ने पांच ग्राम पंचायतों में चल रहे चकरोड पर मिट्टी डलवाने के कार्य का निरीक्षण किया। तीन ग्राम पंचायतों में मस्टर रोल पर मजदूर अंकित मिले, लेकिन मौके पर काम होता नहीं दिखाई दिया। बीडीओ ने तीनों ग्राम पंचायतों के प्रधानों, सचिवों व रोजगार सेवकों से स्पष्टीकरण मांगा है।
कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासियों के गांव लौटने शासन ने उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की प्राथमिकता तय की है। इसीलिए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कामगरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए बजट की कोई कमी नहीं रखी गई। असल में मनरेगा के काम में लगातार गड़बड़ी उजागर हो रही है। रविवार को खंड विकास अधिकारी राजेश बघेल ने पांच ग्राम पंचायतों में चकरोड पर मिट्टी डलवाने के काम का निरीक्षण किया। उन्हें नगरिया देवधरापुर ग्राम पंचायत में चकरोड पर मिट्टी कार्य होता नहीं मिला। मस्टर रोल के अनुसार 14 सितंबर से शुरू कार्य रविवार को भी होना था। इसके लिए 36 श्रमिक मस्टर रोल पर अंकित थे। इसी तरह करीमगंज में मस्टर रोल में रविवार को 33 श्रमिक काम करते दिखाए गए। सिरोंज ग्राम पंचायत में 24 श्रमिकों का मस्टर रोल जारी था। तीनों ग्राम पंचायतों में चक रोड पर मिट्टी कार्य का मस्टर रोल पर दिखाया गया, लेकिन होता नहीं मिला। वहीं कुंदन गनेशपुर में चक रोड पर मिट्टी डालने का कार्य हो रहा था। यहां 30 श्रमिकों का मस्टर रोल जारी था। अहमदपुर देवरिया में भी 62 श्रममिक काम करते मिले।
नगरिया देवधरापुर के पंचायत सचिव अरुण कुमार से बीडीओ ने फोन से बात की तो उन्होंने कहा कि 7 दिन का मस्टर रोल जारी हुआ था लेकिन काम 5 दिन में पूरा हो गया। इस पर बीडीओ ने कहा कि काम पूरा हो गया तो इसके बाद नया मस्टर रोल जारी कराकर दूसरा कार्य शुरू कराना चाहिए। बीडीओ ने बताया कि तीनों ग्राम पंचायतों के रोजगार सेवक प्रथम दृष्टया दोषी हैं। पंचायत सचिव मनरेगा का पर्यवेक्षण करते हैं। प्रधान की भी संयुक्त जिम्मेदारी है। इसलिए सचिव, प्रधान व रोजगार सेवकों से स्पष्टीकरण मांगा है। मनरेगा में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासियों के गांव लौटने शासन ने उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की प्राथमिकता तय की है। इसीलिए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कामगरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए बजट की कोई कमी नहीं रखी गई। असल में मनरेगा के काम में लगातार गड़बड़ी उजागर हो रही है। रविवार को खंड विकास अधिकारी राजेश बघेल ने पांच ग्राम पंचायतों में चकरोड पर मिट्टी डलवाने के काम का निरीक्षण किया। उन्हें नगरिया देवधरापुर ग्राम पंचायत में चकरोड पर मिट्टी कार्य होता नहीं मिला। मस्टर रोल के अनुसार 14 सितंबर से शुरू कार्य रविवार को भी होना था। इसके लिए 36 श्रमिक मस्टर रोल पर अंकित थे। इसी तरह करीमगंज में मस्टर रोल में रविवार को 33 श्रमिक काम करते दिखाए गए। सिरोंज ग्राम पंचायत में 24 श्रमिकों का मस्टर रोल जारी था। तीनों ग्राम पंचायतों में चक रोड पर मिट्टी कार्य का मस्टर रोल पर दिखाया गया, लेकिन होता नहीं मिला। वहीं कुंदन गनेशपुर में चक रोड पर मिट्टी डालने का कार्य हो रहा था। यहां 30 श्रमिकों का मस्टर रोल जारी था। अहमदपुर देवरिया में भी 62 श्रममिक काम करते मिले।
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नगरिया देवधरापुर के पंचायत सचिव अरुण कुमार से बीडीओ ने फोन से बात की तो उन्होंने कहा कि 7 दिन का मस्टर रोल जारी हुआ था लेकिन काम 5 दिन में पूरा हो गया। इस पर बीडीओ ने कहा कि काम पूरा हो गया तो इसके बाद नया मस्टर रोल जारी कराकर दूसरा कार्य शुरू कराना चाहिए। बीडीओ ने बताया कि तीनों ग्राम पंचायतों के रोजगार सेवक प्रथम दृष्टया दोषी हैं। पंचायत सचिव मनरेगा का पर्यवेक्षण करते हैं। प्रधान की भी संयुक्त जिम्मेदारी है। इसलिए सचिव, प्रधान व रोजगार सेवकों से स्पष्टीकरण मांगा है। मनरेगा में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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