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Farrukhabad News: ऑक्सीजन प्लांट बंद, बाजार से खरीद रहे सिलिंडर
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फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल के सभी 210 बेड तक मरीजों को पाइपलाइन से ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए लगे दो ऑक्सीजन प्लांट निरर्थक साबित हो रहे हैं। एक में लिक्विड ऑक्सीजन भरी है, मगर खोली नहीं जाती। ड्यूटी कर्मी दूसरा प्लांट यदाकदा चलाकर खानापूरी करते हैं। यही वजह है कि इमरजेंसी, वार्ड व ओटी में रोजाना औसतन पांच-छह जंबो सिलिंडर खर्च हो रहे हैं। इस पर तीन हजार रुपये से अधिक का खर्चा आता है।
पांच साल पहले दो ऑक्सीजन सिलिंडर लगाए गए थे। पूरे अस्पताल में प्रत्येक बेड पर ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन भी पड़ी है। पीकू वार्ड के संचालन तक ऑक्सीजन प्लांट चलता रहा। इसके बाद से चलाने के नाम पर खानापूरी की जा रही है। वार्डों में रात के समय मरीजों को लगे ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म होने पर दूसरा लेने में परेशानी होती है। जबकि प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति के समय मरीजों को काफी सहूलियत रहती थी।
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टेस्टिंग के बाद एक बार ही भरा गया लिक्विड ऑक्सीजन टैंक
लोहिया अस्पताल में वर्ष 2021 में कंप्रेशर और 2022 में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। इसकी टेस्टिंग के लिए टैंकर मंगवाकर टैंक भरवा दिया था। पीकू कर्मियों की नौकरी चली जाने के बाद करीब दो महीने तक उसी प्लांट से काम चलाया गया। इसके बाद दोबारा टैंक लिक्विड ऑक्सीजन से भरवा दिया। उसे अभी तक खर्च नहीं किया गया।
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-सर्वो में तकनीकी खराबी की वजह से प्लांट नहीं चल पा रहा था। अब सही करवा दिया है। अब नियमित तरीके से प्लांट का संचालन होगा। सिलिंडर इमरजेंसी के लिए रखे जाएंगे। मरीजों को ऑक्सीजन की दिक्कत नहीं होगी।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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पांच साल पहले दो ऑक्सीजन सिलिंडर लगाए गए थे। पूरे अस्पताल में प्रत्येक बेड पर ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन भी पड़ी है। पीकू वार्ड के संचालन तक ऑक्सीजन प्लांट चलता रहा। इसके बाद से चलाने के नाम पर खानापूरी की जा रही है। वार्डों में रात के समय मरीजों को लगे ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म होने पर दूसरा लेने में परेशानी होती है। जबकि प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति के समय मरीजों को काफी सहूलियत रहती थी।
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टेस्टिंग के बाद एक बार ही भरा गया लिक्विड ऑक्सीजन टैंक
लोहिया अस्पताल में वर्ष 2021 में कंप्रेशर और 2022 में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। इसकी टेस्टिंग के लिए टैंकर मंगवाकर टैंक भरवा दिया था। पीकू कर्मियों की नौकरी चली जाने के बाद करीब दो महीने तक उसी प्लांट से काम चलाया गया। इसके बाद दोबारा टैंक लिक्विड ऑक्सीजन से भरवा दिया। उसे अभी तक खर्च नहीं किया गया।
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-सर्वो में तकनीकी खराबी की वजह से प्लांट नहीं चल पा रहा था। अब सही करवा दिया है। अब नियमित तरीके से प्लांट का संचालन होगा। सिलिंडर इमरजेंसी के लिए रखे जाएंगे। मरीजों को ऑक्सीजन की दिक्कत नहीं होगी।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।