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Farrukhabad News: दो साल से फिजीशियन नहीं, माइक्रो बायोलॉजिस्ट के सहारे मरीज
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल में करीब दो साल से जनरल फिजीशियन का पद खाली है। ऐसे में माइक्रो बायोलॉजिस्ट से काम चलाया जा रहा है। सर्दी विदा होते ही मरीजों की संख्या बढ़ती देख दो ईएमओ को खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों के इलाज का जिम्मा सौंपा गया है। फिलहाल माइक्रो बायोलॉजी का अस्पताल में कोई काम नहीं हो रहा है।
जिला अस्पताल में तैनात जनरल फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार करीब दो साल पहले रिटायर हो चुके हैं। उनके बाद यहां किसी भी फिजीशियन की तैनाती नहीं हुई। फिजीशियन शरीर में होने वाली आम बीमारियों का इलाज करने में सक्षम होते हैं। इनमें सर्दी, खांसी, बुखार और अन्य एलर्जी जैसी समस्या होने पर जनरल फिजिशियन से इलाज कराया जाता है।
लोहिया अस्पताल में पद खाली होने के बाद यहां तैनात माइक्रो बायोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीन कुमार को ब्लड बैंक प्रभारी के साथ ओपीडी में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी दे दी गई। वहीं, फिजीशियन के मरीजों को देखकर दवाएं दे रहे हैं। मौसम में बदलाव शुरू होते ही मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है, लिहाजा ईएमओ डॉ. अभय श्रीवास्तव और डॉ. उदयराज से भी ओपीडी में फिजीशियन का काम लिया जाने लगा है।
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जीवाणुओं का अध्ययन कर अच्छा-बुरा प्रभाव जानने में महारत
आईएमए के सचिव एवं फिजीशियन डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि माइक्रो बायोलॉजिस्ट बायोलॉजी की एक ब्रांच है। इसमें प्रोटोजोआ, ऐल्गी, बैक्टीरिया, वायरस जैसे सूक्ष्म जीवाणुओं (माइक्रोऑर्गेनिज्म) का अध्यन किया जाता है। इसमें माइक्रो बायोलॉजिस्ट इन जीवाणुओं (माइक्रोब्स) के इंसानों पर पड़ने वाले पॉजिटिव और निगेटिव प्रभाव को जानने की कोशिश करते हैं। इन्हें इसमें महारत हासिल होती है। फिजीशियन का काम नहीं कर सकते हैं।
एमबीबीएस में सभी बीमारियों के बारे में पढ़ाया जाता है। इसके बाद अलग-अलग बीमारियों मसलन, हृदय, सर्जरी, चेस्ट फिजीशियन, आर्थो सर्जन आदि में एमडी किया जाता है। खांसी, जुकाम, बुखार का इलाज को हर वह डॉक्टर कर सकता है, जो एमबीबीएस होता है। अस्पताल में जनरल फिजीशियन न होने की सूचना शासन को हर माह भेजते हैं। -डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में तैनात जनरल फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार करीब दो साल पहले रिटायर हो चुके हैं। उनके बाद यहां किसी भी फिजीशियन की तैनाती नहीं हुई। फिजीशियन शरीर में होने वाली आम बीमारियों का इलाज करने में सक्षम होते हैं। इनमें सर्दी, खांसी, बुखार और अन्य एलर्जी जैसी समस्या होने पर जनरल फिजिशियन से इलाज कराया जाता है।
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लोहिया अस्पताल में पद खाली होने के बाद यहां तैनात माइक्रो बायोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीन कुमार को ब्लड बैंक प्रभारी के साथ ओपीडी में मरीजों को देखने की जिम्मेदारी दे दी गई। वहीं, फिजीशियन के मरीजों को देखकर दवाएं दे रहे हैं। मौसम में बदलाव शुरू होते ही मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है, लिहाजा ईएमओ डॉ. अभय श्रीवास्तव और डॉ. उदयराज से भी ओपीडी में फिजीशियन का काम लिया जाने लगा है।
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जीवाणुओं का अध्ययन कर अच्छा-बुरा प्रभाव जानने में महारत
आईएमए के सचिव एवं फिजीशियन डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि माइक्रो बायोलॉजिस्ट बायोलॉजी की एक ब्रांच है। इसमें प्रोटोजोआ, ऐल्गी, बैक्टीरिया, वायरस जैसे सूक्ष्म जीवाणुओं (माइक्रोऑर्गेनिज्म) का अध्यन किया जाता है। इसमें माइक्रो बायोलॉजिस्ट इन जीवाणुओं (माइक्रोब्स) के इंसानों पर पड़ने वाले पॉजिटिव और निगेटिव प्रभाव को जानने की कोशिश करते हैं। इन्हें इसमें महारत हासिल होती है। फिजीशियन का काम नहीं कर सकते हैं।
एमबीबीएस में सभी बीमारियों के बारे में पढ़ाया जाता है। इसके बाद अलग-अलग बीमारियों मसलन, हृदय, सर्जरी, चेस्ट फिजीशियन, आर्थो सर्जन आदि में एमडी किया जाता है। खांसी, जुकाम, बुखार का इलाज को हर वह डॉक्टर कर सकता है, जो एमबीबीएस होता है। अस्पताल में जनरल फिजीशियन न होने की सूचना शासन को हर माह भेजते हैं। -डॉ. अशोक प्रियदर्शी, सीएमएस, लोहिया जिला अस्पताल