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पुंथर में कोई कक्षा आठ पास नहीं
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गांव पुंथर में पॉलिथीन से बनी झोपड़ी के बाहर बैठा परिवार। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कंपिल (फर्रुखाबाद)। कटरी क्षेत्र में गंगा किनारे बसे गांव पुंथर में अभी भी शिक्षा का उजियारा नहीं पहुंचा है। आलम यह है कि 300 आबादी वाले इस गांव में एक भी व्यक्ति कक्षा आठ पास नहीं है। शायद यही कारण है कि गांव में अभी तक विकास की किरण भी नहीं पहुंची। लोगों का झोपड़ी में बसेरा है। विकास से अछूते इस गांव में नाली-खड़ंजा तो हैं ही नहीं। यहां लगा एकमात्र हैंडपंप भी पांच वर्ष से खराब है।
विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। अन्य गांवों में भले ही विकास की गंगा बह रही हो, लेकिन गंगा किनारे विकास अभी भी नहीं पहुंचा। ब्लाक कायमगंज की ग्राम पंचायत सिनौली का मजरा पुंथर में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। पुंथर गांव की आबादी तकरीबन 300 है। गांव में स्कूल तो दूर की कौड़ी, नाली-खड़ंजा भी नहीं है।
यहां से करीब एक किलोमीटर दूर गांव पुंथर देहामाफी में प्राथमिक विद्यालय है। दूरी अधिक होने से बच्चों का शिक्षा से नाता मजबूत नहीं हो पा रहा है। हालात यह है कि इस गांव में एक भी युवा कक्षा आठ पास नहीं है। पक्का मकान भी ग्रामीणों के लिए सपना है। कोई झोपड़ी डालकर तो कोई पॉलिथीन तानकर परिवार के साथ सर्दी भरी पूस की रातें गुजार रहे हैं। गंगा में बाढ़ आने पर गांव चारो ओर से पानी से घिर जाता है।
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बारिश में पानी से घिरा रहता गांव
पुंथर निवासी गजेंद्र ने बताया कि प्राथमिक स्कूल गांव से एक किलोमीटर दूर है। शुरुआत में बच्चे कुछ दिन स्कूल जाते हैं, फिर नहीं जाते हैं। पप्पू और अर्जुन बताते हैं कि बारिश के मौसम में गांव पानी से घिर जाता है। गांव लगा सरकारी हैंडपंप पांच साल से खराब है। गर्मियों में छोटे नलों का पानी पीकर लोग बीमार हो जाते हैं। शौचालय निष्प्रयोज्य हो गए हैं। सूरजमुखी ने बताया उन्हें विधवा पेंशन नहीं मिलती। किसी के पास रोजगार नहीं है। इस कारण लोग इस गांव में अपनी बेटी का रिश्ता करने के लिए भी जल्द तैयार नहीं होते।
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विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। अन्य गांवों में भले ही विकास की गंगा बह रही हो, लेकिन गंगा किनारे विकास अभी भी नहीं पहुंचा। ब्लाक कायमगंज की ग्राम पंचायत सिनौली का मजरा पुंथर में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। पुंथर गांव की आबादी तकरीबन 300 है। गांव में स्कूल तो दूर की कौड़ी, नाली-खड़ंजा भी नहीं है।
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यहां से करीब एक किलोमीटर दूर गांव पुंथर देहामाफी में प्राथमिक विद्यालय है। दूरी अधिक होने से बच्चों का शिक्षा से नाता मजबूत नहीं हो पा रहा है। हालात यह है कि इस गांव में एक भी युवा कक्षा आठ पास नहीं है। पक्का मकान भी ग्रामीणों के लिए सपना है। कोई झोपड़ी डालकर तो कोई पॉलिथीन तानकर परिवार के साथ सर्दी भरी पूस की रातें गुजार रहे हैं। गंगा में बाढ़ आने पर गांव चारो ओर से पानी से घिर जाता है।
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बारिश में पानी से घिरा रहता गांव
पुंथर निवासी गजेंद्र ने बताया कि प्राथमिक स्कूल गांव से एक किलोमीटर दूर है। शुरुआत में बच्चे कुछ दिन स्कूल जाते हैं, फिर नहीं जाते हैं। पप्पू और अर्जुन बताते हैं कि बारिश के मौसम में गांव पानी से घिर जाता है। गांव लगा सरकारी हैंडपंप पांच साल से खराब है। गर्मियों में छोटे नलों का पानी पीकर लोग बीमार हो जाते हैं। शौचालय निष्प्रयोज्य हो गए हैं। सूरजमुखी ने बताया उन्हें विधवा पेंशन नहीं मिलती। किसी के पास रोजगार नहीं है। इस कारण लोग इस गांव में अपनी बेटी का रिश्ता करने के लिए भी जल्द तैयार नहीं होते।

शिवराम। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

गुड्डी देवी। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

अरविंद। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD