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तेल की महंगाई से बढ़ गया सरसों की फसल का रकबा

Sat, 27 Nov 2021 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 11:39 PM IST
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Mustard crop area increased due to oil inflation
फर्रुखाबाद। सरसों के तेल की महंगाई ने इस बार किसानों को सरसों की खेती करने के लिए मजबूर कर दिया। इससे जिले में सरसों की फसल का करीब 900 हेक्टेयर रकबा बढ़ गया। वहीं गत माह हुई अत्यधिक बारिश से आलू की खेती का 2.5 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल घट गया है।
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पिछले वर्ष जिले में 7235 हेक्टेयर रकबे में सरसों की फसल की बुवाई की गई थी। इस बार 22 नवंबर तक 8111 हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष की अपेक्षा सरसों का रकबा 876 हेक्टेयर में बढ़ चुका है। बुवाई अभी चल रही है। सरसों का रकबा 1000 हेक्टेयर तक बढ़ने का अनुमान है।
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सरसों का रकबा बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य तेलों की महंगाई को माना जा रहा है। 80 रुपये से 100 रुपये लीटर बिकने वाला खाद्य तेल का भाव 200 रुपये प्रति लीटर से अधिक पहुंच गया है।
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खाद्य तेल की महंगाई और सरसों का भाव 70 से 75 रुपये तक पहुंचने के कारण किसानों ने सरसों फसल का रकबा बढ़ा दिया है। जिला कृषि अधिकारी डॉ.राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सरसों की कीमत अधिक होने और कम समय में फसल तैयार होने से किसान का रुझान सरसों फसल के प्रति बढ़ा है।
मोहम्मदबाद क्षेत्र के गांव मौधा निवासी मनु राठौर ने बताया कि उन्होंने इस बार सात बीघा सरसों की फसल बुवाई की है। सरसों महंगी होने से गत वर्ष के सापेक्ष तीन बीघा सरसों अधिक बोई।
नगला दलजीत सिंह प्रवीन कुमार ने बताया कि इस बार 12 बीघे में सरसों की बुवाई की है। इससे महंगा तेल खरीदने से निजात मिलेगी। इसके साथ सरसों की अच्छी कीमत मिलने से लाभ भी होगा।

बारिश ने घटाया आलू का रकबा
अक्तूबर में बारिश होने से अगैती आलू की फसल बर्बाद हो गई थी। इसी बीच गंगा व रामगंगा में बाढ़ आ गई। इससे फिर खेत पानी से भर गए। इससे पिछले वर्ष की अपेक्षा आलू का रकबा 2500 हेक्टेयर घट गया है। पिछले वर्ष 43500 हेक्टेयर में आलू की बुवाई की गई थी। इस बार 41000 हेक्टेयर में बोई गई है। जिला आलू एवं शाकभाजी अधिकारी आरएन वर्मा ने बताया कि अत्यधिक बारिश होने से आलू का रकबा घटा है।
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