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मुस्लिम देश सीरिया और यमन सीखें भारत से धर्म
farrukhabad
Updated Mon, 03 Dec 2018 11:33 PM IST
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दलाई लामा
- फोटो : अमर उजाला
बुद्धम् शरणम् गच्छामि का अर्थ समझें और 21वीं शताब्दी के बौद्ध बनें। परमार्थ सत्य को जानने के लिए भगवान बुद्ध के सिद्धांत पर चलें तो परमार्थ सत्य मिल जाएगा। अहिंसा का सिद्धांत अगर सीखना है तो भारत से सीखें। धम्म प्रवचन समारोह के दौरान ये बातें बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कही। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देश सीरिया और यमन, भारत से धर्म सीखें। भारत में सभी धर्मों में सामंजस्य है।
सोमवार को कार्यक्रम स्थल पर बने मंच से दलाई लामा ने कहा कि परमार्थ सत्य को जानने के लिए भगवान बुद्ध के सिद्धांत पर चलें। मनुष्य अपनी अविद्या को नष्ट कर स्वार्थीपन छोड़े। धम्म हमारा मूलशरण है और इससे ही भगवान बुद्ध को प्राप्त कर सकते हैं। बौद्ध धर्म के सार के लिए शून्यता के सिद्धांत को समझें। स्वभाव से शून्य चीज को समझने के लिए भगवान बुद्ध के बताए रास्ते पर चलें। भारत में 125 करोड़ की आबादी है और कई धर्म व अनेक परंपराएं हैं। फिर भी सभी प्रेम से रहते हैं।
मुस्लिम देश सीरिया और यमन, भारत से धर्म सीखें। भारत में सभी धर्मों में सामंजस्य है। आधुनिक भारत में देखें तो अहिंसा के सिद्धांत से भारत में भौतिक विकास हो रहा है।
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बौद्ध धर्म की व्यवस्था सभी के लिए लाभदायक है। मैं जहां भी जाता हूं, वहां भारत की प्राचीन परंपरा लागू करने की बात कहता हूं। मैं बौद्ध धर्म फैलाने आया हूं। सभी को बौद्ध बनाऊं, लेकिन धर्म मानना अपना-अपना विचार है। मैं यही कहता हूं कि सभी लोग शांतिपूर्वक रहें तथा धर्म का निर्वहन करें। दलाई लामा ने कहा कि जीवन के तीन पड़ाव होते हैं। आदि, मध्य और अंत। दलाई लामा ने तिब्बत भाषा में प्रवचन दिए और हिंदी में अनुवाद कैलाशचंद्र बौद्ध ने किया। यूथ बुद्धिष्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेशचंद्र बौद्ध आदि मौजूद रहे।
थैंक्यू से प्रवचन किया समाप्त
वाईबीएस राजघाट मैनपुरी में आयोजित धम्म प्रवचन समारोह के दौरान दलाई लामा ने थैंक्यू कहकर प्रवचन समाप्त किए। इसके बाद उनके निजी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सहारा देकर सीढ़ी से मंच के नीचे उतारा। दलाई लामा कार में बैठकर हाथ जोड़कर सबका अभिवादन करते हुए होटल इंपैक (रायल रेजीडेंसी) चले गए। ब्यूरो
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सोमवार को कार्यक्रम स्थल पर बने मंच से दलाई लामा ने कहा कि परमार्थ सत्य को जानने के लिए भगवान बुद्ध के सिद्धांत पर चलें। मनुष्य अपनी अविद्या को नष्ट कर स्वार्थीपन छोड़े। धम्म हमारा मूलशरण है और इससे ही भगवान बुद्ध को प्राप्त कर सकते हैं। बौद्ध धर्म के सार के लिए शून्यता के सिद्धांत को समझें। स्वभाव से शून्य चीज को समझने के लिए भगवान बुद्ध के बताए रास्ते पर चलें। भारत में 125 करोड़ की आबादी है और कई धर्म व अनेक परंपराएं हैं। फिर भी सभी प्रेम से रहते हैं।
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मुस्लिम देश सीरिया और यमन, भारत से धर्म सीखें। भारत में सभी धर्मों में सामंजस्य है। आधुनिक भारत में देखें तो अहिंसा के सिद्धांत से भारत में भौतिक विकास हो रहा है।
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बौद्ध धर्म की व्यवस्था सभी के लिए लाभदायक है। मैं जहां भी जाता हूं, वहां भारत की प्राचीन परंपरा लागू करने की बात कहता हूं। मैं बौद्ध धर्म फैलाने आया हूं। सभी को बौद्ध बनाऊं, लेकिन धर्म मानना अपना-अपना विचार है। मैं यही कहता हूं कि सभी लोग शांतिपूर्वक रहें तथा धर्म का निर्वहन करें। दलाई लामा ने कहा कि जीवन के तीन पड़ाव होते हैं। आदि, मध्य और अंत। दलाई लामा ने तिब्बत भाषा में प्रवचन दिए और हिंदी में अनुवाद कैलाशचंद्र बौद्ध ने किया। यूथ बुद्धिष्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेशचंद्र बौद्ध आदि मौजूद रहे।
थैंक्यू से प्रवचन किया समाप्त
वाईबीएस राजघाट मैनपुरी में आयोजित धम्म प्रवचन समारोह के दौरान दलाई लामा ने थैंक्यू कहकर प्रवचन समाप्त किए। इसके बाद उनके निजी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सहारा देकर सीढ़ी से मंच के नीचे उतारा। दलाई लामा कार में बैठकर हाथ जोड़कर सबका अभिवादन करते हुए होटल इंपैक (रायल रेजीडेंसी) चले गए। ब्यूरो