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लुढ़का पारा, जनजीवन प्रभावित
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रोडवेज बस स्टैंड पर ठंड में बैठीं महिलाएं।
- फोटो : FARRUKHABAD
अधिकतम तापमान गिरा, जनजीवन प्रभावित
फर्रुखाबाद। तीन दिन से लगातार पारा लुढ़कने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सुबह देर तक घरों में दुबके रहना और शाम ढलते ही फिर कमरों में कैद होना लोगों की मजबूरी बन गई है। न्यूनतम तापमान 4 डिग्री और अधिकतम 17 डिग्री हो गया। ठंड से बचने को जलाए जाने वाले लकड़ी के कोयले के दाम बढ़कर 25 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं।
बुधवार सुबह सूर्यदेव हल्के बादलों के बीच निकले। धूप में तेजी नहीं थी। हल्की चल रही हवा से लोग शीतलहर से ठिठुरते रहे। शाम होते ही ठिठुरन इतनी बढ़ी कि लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। बाजार में दुकानें भी जल्दी बंद हो गईं। ठेली, खोमचे वालों ने भी अपना धंधा जल्दी ही समेट लिया। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी से लोग जल्दी ही घरों में कैद हो गए।
सर्दी से बचने के लिए जलाए जाने वाले कोयले के दामों में तेजी से इजाफा हुआ है। आमतौर पर 10 रुपये किलो बिकने वाला लकड़ी का कोयला इस वक्त 25 रुपये किलो तक बिक रहा है। मांग इतनी ज्यादा है कि दुकानदार उसकी आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। कई दुकानदारों ने पहले से कोयले का स्टाक भी कर लिया है। वह अब मुनाफा कमा रहे हैं।
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बंद कमरे में न जलाएं कोयले की अंगीठी
लोहिया अस्पताल के डॉ. अरिदमन सिंह कहते हैं कि सर्दी में लोग लकड़ी और पत्थर का कोयला कमरों में जलाते हैं। बंद कमरे में किसी तरह का कोयला न जलाएं। कोयला जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती है। इससे दम घुटने की घटनाएं भी हो जाती हैं।
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फर्रुखाबाद। तीन दिन से लगातार पारा लुढ़कने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सुबह देर तक घरों में दुबके रहना और शाम ढलते ही फिर कमरों में कैद होना लोगों की मजबूरी बन गई है। न्यूनतम तापमान 4 डिग्री और अधिकतम 17 डिग्री हो गया। ठंड से बचने को जलाए जाने वाले लकड़ी के कोयले के दाम बढ़कर 25 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं।
बुधवार सुबह सूर्यदेव हल्के बादलों के बीच निकले। धूप में तेजी नहीं थी। हल्की चल रही हवा से लोग शीतलहर से ठिठुरते रहे। शाम होते ही ठिठुरन इतनी बढ़ी कि लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। बाजार में दुकानें भी जल्दी बंद हो गईं। ठेली, खोमचे वालों ने भी अपना धंधा जल्दी ही समेट लिया। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी से लोग जल्दी ही घरों में कैद हो गए।
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सर्दी से बचने के लिए जलाए जाने वाले कोयले के दामों में तेजी से इजाफा हुआ है। आमतौर पर 10 रुपये किलो बिकने वाला लकड़ी का कोयला इस वक्त 25 रुपये किलो तक बिक रहा है। मांग इतनी ज्यादा है कि दुकानदार उसकी आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। कई दुकानदारों ने पहले से कोयले का स्टाक भी कर लिया है। वह अब मुनाफा कमा रहे हैं।
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बंद कमरे में न जलाएं कोयले की अंगीठी
लोहिया अस्पताल के डॉ. अरिदमन सिंह कहते हैं कि सर्दी में लोग लकड़ी और पत्थर का कोयला कमरों में जलाते हैं। बंद कमरे में किसी तरह का कोयला न जलाएं। कोयला जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड निकलती है। इससे दम घुटने की घटनाएं भी हो जाती हैं।