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बैंकों में तालाबंदी, एटीएम भी दे गए दगा
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शहर के चौक स्थित एटीएम में रुपये न होने से मायूस खड़े ग्राहक। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। बैंकिंग कानून के संशोधन के विरोध में सरकारी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों की हड़ताल से जिले की 127 शाखाओं में कामकाज ठप रहा। बैंक बंद होने से रुपये निकालने के लिए लोग एटीएम पर पहुंचे, लेकिन यहां भी निराशा हाथ लगी। एटीएम खाली होने से उन्हें बिना रुपये वापस लौटने पड़े। लोग रुपये निकालने के लिए दिन भर भटकते रहे। निजी बैंकों के एटीएम में रुपये निकालने वालों की भीड़ लगी रही, मगर वहां भी रुपये न मिलने से मायूसी हाथ लगी। बैंक कर्मियों ने धरना प्रदर्शन में कहा कि यदि बैंकों का निजीकरण किया गया, तो आर्थिक गुलामी का सामना करना पड़ेगा।
शुक्रवार को दूसरे दिन भी जिले भर में बैंकों की हड़ताल रही। कामकाज न होने ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम बंद हो गए। ग्राहकों की भीड़ प्राइवेट कंपनियों के एटीएम पहुंची, तो वहां भी मायूसी हाथ लगी। लोग देर रात तक रुपये निकालने के लिए भटकते रहे। रुपये नहीं मिले तो लोगों ने इधर-उधर से उधार लेकर काम चलाया। उधर हड़ताल पर रहे बैंक कर्मचारी व अधिकारी फतेहगढ़ स्थित बैंक ऑफ इंडिया के बाहर एकत्र हुए।
वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। यूनाइटेड फोरफ ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के जिला संयोजक केदार ने कहा कि केंद्र सरकार गूंगी-बहरी हो गई है। हठधर्मिता से बाज आना चाहिए। कहा कि सरकारी बैंकों के निजीकरण से आर्थिक गुलामी आएगी। आशुतोष शर्मा ने कहा कि बैंकर आर्थिक लाभ कमाकर दे रहे हैं, फिर निजीकरण क्यों किया जा रहा हैै।
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बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारी नेता मुनेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार की नियत में खोट है। रजत सिंह, आशय अवस्थी, प्रतीक मिश्रा, राजीव चौहान आदि ने संबोधित किया। धरना प्रदर्शन में सूबेदार बाथम, आनंद कुमार, अंकित, हनी, विजय वर्मा, मेघनाथ, अजय, वैभव कश्यप, विक्रम, आशुतोष शर्मा, निखिल मिश्रा आदि कर्मचारी मौजूद थे।
ग्रामीण बैंक कर्मचारियों ने दिया धरना
आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के आवास विकास कालोनी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पर एकत्र हुए कर्मचारियों ने काम बंद कर धरना देकर नारेबाजी की। सरकार के फैसले का विरोध किया गया। धरना प्रदर्शन में बीबी पांडेय, आरके राठौर, तन्मय तिवारी, अरुण कुमार शर्मा, अखिलेश चौहान आदि थे।
अरेबिया के कर्मियों को काम करने से रोका
आर्यावर्त ग्रामीण बैंक अरेबिया संगठन से जुड़े करीब 120 कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। हड़ताली पर रहे संगठन के कर्मचारी अधिक होने की वजह से उन्हें शाखाओं में काम करने से रोक दिया गया। लिहाजा कामकाज बंद ही रहा।
दो दिन में 60 लाख रुपये वेतन कटेगा
लीड बैंक प्रबंधक दूधनाथ पाल ने बताया कि जिले में आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की 58 और राष्ट्रीयकृत बैंकों की 69 शाखाएं हैं। इन शाखाओं के करीब एक हजार कर्मचारी दो दिन हड़ताल पर रहेे। हालांकि आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के एक संगठन के 120 कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। फिर भी यह लोग शाखाओं में काम नहीं कर सकेे। औसतन प्रति कर्मचारी रोजाना तीन हजार रुपये वेतन लेता है। ऐसे में दो दिन में करीब 60 लाख रुपये की वेतन कटौती की जाएगी।
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शुक्रवार को दूसरे दिन भी जिले भर में बैंकों की हड़ताल रही। कामकाज न होने ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम बंद हो गए। ग्राहकों की भीड़ प्राइवेट कंपनियों के एटीएम पहुंची, तो वहां भी मायूसी हाथ लगी। लोग देर रात तक रुपये निकालने के लिए भटकते रहे। रुपये नहीं मिले तो लोगों ने इधर-उधर से उधार लेकर काम चलाया। उधर हड़ताल पर रहे बैंक कर्मचारी व अधिकारी फतेहगढ़ स्थित बैंक ऑफ इंडिया के बाहर एकत्र हुए।
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वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। यूनाइटेड फोरफ ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के जिला संयोजक केदार ने कहा कि केंद्र सरकार गूंगी-बहरी हो गई है। हठधर्मिता से बाज आना चाहिए। कहा कि सरकारी बैंकों के निजीकरण से आर्थिक गुलामी आएगी। आशुतोष शर्मा ने कहा कि बैंकर आर्थिक लाभ कमाकर दे रहे हैं, फिर निजीकरण क्यों किया जा रहा हैै।
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बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारी नेता मुनेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार की नियत में खोट है। रजत सिंह, आशय अवस्थी, प्रतीक मिश्रा, राजीव चौहान आदि ने संबोधित किया। धरना प्रदर्शन में सूबेदार बाथम, आनंद कुमार, अंकित, हनी, विजय वर्मा, मेघनाथ, अजय, वैभव कश्यप, विक्रम, आशुतोष शर्मा, निखिल मिश्रा आदि कर्मचारी मौजूद थे।
ग्रामीण बैंक कर्मचारियों ने दिया धरना
आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के आवास विकास कालोनी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पर एकत्र हुए कर्मचारियों ने काम बंद कर धरना देकर नारेबाजी की। सरकार के फैसले का विरोध किया गया। धरना प्रदर्शन में बीबी पांडेय, आरके राठौर, तन्मय तिवारी, अरुण कुमार शर्मा, अखिलेश चौहान आदि थे।
अरेबिया के कर्मियों को काम करने से रोका
आर्यावर्त ग्रामीण बैंक अरेबिया संगठन से जुड़े करीब 120 कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। हड़ताली पर रहे संगठन के कर्मचारी अधिक होने की वजह से उन्हें शाखाओं में काम करने से रोक दिया गया। लिहाजा कामकाज बंद ही रहा।
दो दिन में 60 लाख रुपये वेतन कटेगा
लीड बैंक प्रबंधक दूधनाथ पाल ने बताया कि जिले में आर्यावर्त ग्रामीण बैंक की 58 और राष्ट्रीयकृत बैंकों की 69 शाखाएं हैं। इन शाखाओं के करीब एक हजार कर्मचारी दो दिन हड़ताल पर रहेे। हालांकि आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के एक संगठन के 120 कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। फिर भी यह लोग शाखाओं में काम नहीं कर सकेे। औसतन प्रति कर्मचारी रोजाना तीन हजार रुपये वेतन लेता है। ऐसे में दो दिन में करीब 60 लाख रुपये की वेतन कटौती की जाएगी।

शहर के रेलवे रोड स्थित स्टेट बैंक शाखा बंद होने से मायूस खड़े ग्राहक। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD