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Farrukhabad News: ठिठुरन बढ़ने से जनजीवन प्रभावित, आग का सहारा
Thu, 02 Jan 2025 11:24 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 02 Jan 2025 11:24 PM IST
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फर्रुखाबाद/ शमसाबाद। इस वर्ष भले ही तापमान में देरी से गिरावट आई, लेकिन अब ठिठुरन बढ़ने से जनजीवन प्रभावित होते दिख रहा है। गांव हो या शहर, जहां अलाव जले तो चारों ओर लोग तापने के लिए घेरा बनाते दिखे।
तापमान में लगातार गिरावट आने के साथ ठिठुरन बढ़ती जा रही है। गुरुवार को अधिकतम तापमान जहां 18 डिग्री रहा, वहीं न्यूनतम तापमान गिरकर सात डिग्री पर पहुंच गया। सुबह से बादल छाए रहे। दोपहर में हल्की धूप निकलने के बावजूद ठंड का असर कम नहीं हो सका। शाम ढलते ही लोगों ने अपने घरों का रुख किया। जहां अलाव जलते दिखे तो आसपास के लोग आग तापने के लिए खिंचे चले गए। हालांकि ठिठुरन से बुजुर्गों की दिनचर्या खासी प्रभावित है। वह सर्दी बचाने के लिए आग का सहारा ले रहे हैं।
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किसान, मजदूरों व राहगीरों की मुश्किलें बढ़ीं
ठिठुरन बढ़ने से किसान, मजदूर व राहगीरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसान गोवंश से फसलें बचाने के लिए पूस की रात खेतों में गुजारने को मजबूर हैं। वहीं रोज कमाने-खाने वाले मजदूर व राहगीरों के लिए ठिठुरन किसी मुसीबत से कम नहीं है। शमसाबाद क्षेत्र के किसान अनीश कुमार ने बताया बंदर व अन्य पशुओं का आतंक बढ़ा है। इससे रात में फसलें बचाना चुनौती साबित हो रहा है। नन्हेंलाल का कहना है कि अन्ना पशुओं का आतंक किसानों की जान पर भारी पड़ रहा है।
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तापमान में लगातार गिरावट आने के साथ ठिठुरन बढ़ती जा रही है। गुरुवार को अधिकतम तापमान जहां 18 डिग्री रहा, वहीं न्यूनतम तापमान गिरकर सात डिग्री पर पहुंच गया। सुबह से बादल छाए रहे। दोपहर में हल्की धूप निकलने के बावजूद ठंड का असर कम नहीं हो सका। शाम ढलते ही लोगों ने अपने घरों का रुख किया। जहां अलाव जलते दिखे तो आसपास के लोग आग तापने के लिए खिंचे चले गए। हालांकि ठिठुरन से बुजुर्गों की दिनचर्या खासी प्रभावित है। वह सर्दी बचाने के लिए आग का सहारा ले रहे हैं।
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किसान, मजदूरों व राहगीरों की मुश्किलें बढ़ीं
ठिठुरन बढ़ने से किसान, मजदूर व राहगीरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसान गोवंश से फसलें बचाने के लिए पूस की रात खेतों में गुजारने को मजबूर हैं। वहीं रोज कमाने-खाने वाले मजदूर व राहगीरों के लिए ठिठुरन किसी मुसीबत से कम नहीं है। शमसाबाद क्षेत्र के किसान अनीश कुमार ने बताया बंदर व अन्य पशुओं का आतंक बढ़ा है। इससे रात में फसलें बचाना चुनौती साबित हो रहा है। नन्हेंलाल का कहना है कि अन्ना पशुओं का आतंक किसानों की जान पर भारी पड़ रहा है।
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