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Farrukhabad News: भैरोघाट पर गंगा में मर गईं लाखों मछलियां

Sat, 19 Oct 2024 01:28 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 19 Oct 2024 01:28 AM IST
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Lakhs of fish died in Ganga at Bhairoghat
फर्रुखाबाद। छोटे-बड़े नौ नाले शहर का 200 लाख लीटर प्रदूषित जल हर रोज गंगा में बहा रहे हैं। इससे न केवल गंगा का पानी प्रदूषित हो रहा है, बल्कि उसमें पल रहे कई तरह के जीवों की जान पर संकट आ गया है। भैरोघाट पर गंगा में गिर रहे नाले के मुहाने पर शुक्रवार सुबह लाखों की संख्या में मछलियां मरी देखी गईं। इसके बाद लोगों में तरह-तरह की चर्चा रही, लेकिन विभाग को शाम तक इसकी खबर नहीं हुई।
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वहीं, कई लोगों का कहना है कि करीब 15 दिनों से इस जगह पर मछलियां मर रही हैं। सभी का मनाना है कि प्रदूषण की वजह से मछलियां मर रही हैं। इस जगह पर कपड़ा छपाई के कारखानों से निकलने वाला लाखों लीटर केमिकल युक्त पानी गंगा में गिरता है। इस वजह से मछलियां मरी हैं।
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जानकारों का कहना है कि भैरोघाट पर गंगा में गिर रहे नाले के पास बाढ़ के बाद गंगा का पानी ठहर गया है। पीछे से सीवेज का प्रदूषित पानी भी गिर रहा है। इस वजह से इस जगह पर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई और सांस नहीं ले पाने की वजह से मछलियों की मौत हो गई है। वहीं, कुछ लोगों ने जहर देकर मछलियों को मारने की आशंका जताई है। हालांकि, इस पर कोई यकीन नहीं कर रहा है।
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वहीं, गंगा नदी में जहां पर मछलियां मरी हैं वहां से करीब 400 मीटर की दूरी पर पुरानी घटिया पर दूरदराज से आए लोग गंगा स्नान कर जल का आचमन करते हैं। गंगा के पवित्र जल को भरकर घर ले जा रहे हैं। प्रदूषण की वजह से इनकी आस्था और विश्वास को भी ठेस पहुंच रही है।
बता दें कि शहर के मोहल्ला अंगूरीबाग, जटवारा जदीद, आराकसान, कछियाना, कादरीगेट, गांव खानपुर, चांदपुर, अमेठी जदीद, माधौपुर आदि में 150 से अधिक कपड़ा छपाई के कारखाने चल रहे हैं। इन कारखानों का केमिकल युक्त पानी शहर के सीवेज नाले से होकर भैरोघाट और पुरानी घटिया में गंगाजल में गिरता है।
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प्रशासन को खबर तक नहीं
बताया जा रहा है कि करीब 15 दिनों से मछलियां मर रही हैं। हजारों तड़पते देखी गई हैं। आसपास के लोग मरी हुई मछलियों से उठ रही सड़ांध से परेशान हैं। वहीं, प्रशासन ओर विभाग को इसकी खबर तक नहीं है। शुक्रवार को जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हो गई तब भी प्रशासन और संबंधित विभाग अनजान बना रहा। देर शाम एक टीम निरीक्षण के लिए पहुंची भी तो तब तक रात हो चुकी थी। अंधेरा होने की वजह से उसे बैरंग लौटना पड़ा।
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गंगा नदी में गिरते हैं पांच बड़े और कई छोटे नाले
फतेहगढ़ के रानी घाट, बरगदिया घाट, नौखंडा और फर्रुखाबाद में भैरोंघाट, पुरानी घटिया पर बड़े नाले गंगा नदी में गिरते हैं। इसी तरह सोता बहादुरपुर गांव के कई छोटे नाले भी गंगा में गिरते हैं। ये नाले प्रतिदिन दो लाख लीटर से अधिक गंदा पानी गंगा में उगल रहे हैं। इससे गंगा का जल प्रदूषित हो रहा है। वहीं, गंगा नदी के जल को स्वच्छ बनाने की मंशा से फतेहगढ़ और फर्रुखाबाद के अमेठी जदीद में जल शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण चल रहा है। इसके बनाने के बाद ही गंदा पानी गंगा में गिरना बंद हो पाएगा।
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केमिकल से पानी के प्रदूषित होने से इन्कार
वस्त्र छपाई कुटीर उद्योग सेवा संस्थान के अध्यक्ष और लोकतंत्र सेनानी चंद्रपाल वर्मा ने बताया कि कपड़ा छपाई में प्रयोग होने वाले रंग में कोई भी केमिकल घातक नहीं है। इसमें कास्टिक, कपड़ा धुलने व खाने वाला सोडा, फिटकरी, नमक का तेजाब, चीनी साफ करने में प्रयोग होने वाला सेफोलाइट व एसिड, रेमाजोल और डारेक रंग का प्रयोग किया जाता है। यह मिश्रण नाले में होने वाले कीटाणुओं को खत्म कर देता है। कई किमी दूरी तय करके गंगा तक पहुंचकर पानी शुद्ध हो जाता है। वह तत्कालीन डीएम के सामने इसको दिखा भी चुके हैं। मछली मरने की वजह शिकारी हैं। वह मछलियों के दम घुटने वाली दवा डालकर ऊपर लाने का काम करते हैं। अधिक दवा पड़ने से मछलियां मरी होंगी।
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गंगा में मछलियां मरने की सूचना पर मौके पर गए थे। गंगा की बाढ़ खत्म होने से वहां पर पानी का प्रवाह रुक गया है। इस कारण मछलियों को ऑक्सीजन कम मिल पा रही थी। शहर के नालों से आ रहा केमिकल युक्त दूषित पानी गिरने व प्रवाह रुक जाने से पानी और प्रदूषित हो गया है। इससे मछलियां मरने की आशंका है।

- दिवाकर सिंह, मत्स्य निरीक्षक

अधिकारियों संग देर शाम नाला देखने पहुंचे ईओ
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार निर्माणाधीन एसटीपी प्लांट के अधिकारियों के साथ गंगा में मरी पड़ी मछलियों को देखने देर शाम को पहुंचे। उन्होंने बताया कि पानी में मछलियां पड़ी दिख रही हैं। अंधेरा होने की वजह से स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है। वह शनिवार को दोबारा मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे। इसके बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
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