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जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा
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फतेहगढ़ स्थित जिला सहकारी बैंक के प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष पद पर पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार के नि?
- फोटो : FARRUKHABAD
कुलदीप गंगवार बने जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष
फर्रुखाबाद। जिला सहकारी बैंक की प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव में मंगलवार को भाजपा प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर एडीएम ने प्रमाणपत्र सौंपे। इसके बाद बैंक में भाजपाइयों ने जमकर नारेबाजी की। सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह फेल रही। बैंक के बाहर आतिशबाजी चलाई। पिछले 50 वर्ष से अब तक प्रशासकों को छोड़कर सपा का ही कब्जा था।
जिला सहकारी बैंक में मंगलवार को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचन के लिए सुबह 8.30 बजे से प्रक्रिया शुरू हो गई। 11.30 बजे अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार व उपाध्यक्ष पद पर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष भूदेव सिंह राजपूत ने नामांकन किया। निर्वाचन अधिकारी एडीएम विवेक श्रीवास्तव, सहायक निर्वाचन अधिकारी पीओ डूडा जय विजय सिंह ने नामांकन पत्रों की जांच की।
एक पद पर दूसरा नामांकन न होने से मतदान नहीं हुआ। इस बीच सांसद मुकेश राजपूत, विधायक नागेंद्र सिंह राठौर, मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, सुशील शाक्य, अमर सिंह खटीक, कन्नौज के तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत व भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश गुप्ता भी पहुंच गए। करीब 2.30 बजे एडीएम ने अध्यक्ष पद पर कुलदीप गंगवार व उपाध्यक्ष पद पर भूदेव सिंह राजपूत को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर उन्हें प्रमाणपत्र सौंपे।
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निर्वाचन कक्ष से अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के निकलते ही भाजपाइयों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। दोनों निर्वाचित पदाधिकारियों को फूलमालाओं से लाद दिया। बैंक से कुछ दूरी पर आतिशबाजी चलाई गई। माला पहनाने की होड़ में सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह फेल रही। फिलहाल 50 साल से काबिज सपा का जिला सहकारी बैंक से पत्ता साफ हो गया। डायरेक्टर के 14 पदों में 13 भाजपाई हैं, जबकि एक महिला आरक्षित पद अभी रिक्त है।
बैंक में डायरेक्टरों के साथ डटे रहे कन्नौज के भाजपा नेता
अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए सुबह से ही जिला सहकारी बैंक में भाजपाई पहुंच गए। नवनिर्वाचित डायरेक्टर अन्य समितियां से शैलेंद्र सिंह राठौर, अमृतपुर से आरक्षित महिला पद पर रत्नेश द्विवेदी, के अलावा वीरेंद्र कुमार कठेरिया, दिनेश चंद्र मिश्रा, रामेंद्र सिंह, अमर सिंह कुशवाहा, नरेंद्र चंद्र पहुंच गए। वहीं कन्नौज से डायरेक्टर अरविंद त्रिपाठी(गोपाल त्रिपाठी), छिबरामऊ से आनंद किशोर, तिर्वा से अजय कुमार व रामपाल के साथ कन्नौज भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत, उपाध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक बनवारी लाल दोहरे, पूर्व जिलाध्यक्ष आनंद सिंह भी डटे रहे।
वहीं स्थानीय भाजपा नेताओं में ढाई वर्ष संघर्ष कर जिला सहकारी बैंक को चुनाव तक पहुंचाने वाले भाजपा के पूर्व महामंत्री विमल कटियार को बैंक के चुनाव में कोई भागीदारी नहीं मिली। इससे वह असंतुष्ट थे और वह पहली बार अध्यक्ष पद के चुनाव में सहकारी बैंक गए।
बताया जा रहा है जो महिला आरक्षित डायरेक्टर का एक पद रिक्त है, उस पर भी एक भाजपा पदाधिकारी की पत्नी का काबिज होना तय हो चुका है। डेलीगेट न होने से वह डायरेक्टर का चुनाव नहीं लड़ सकती थीं, इससे यह पद रिक्त रह गया। इस दौरान मिथलेश अग्रवाल, शिवांग रस्तोगी, रामवीर चौहान, पियूष त्रिपाठी, संजीव गुप्ता आदि भाजपाई मौजूद रहे।
यह रहा सहकारी बैंक में सपा का इतिहास
वर्ष 1965 से जिला सहकारी बैंक की शुरुआत हुई और पहला प्रबंधक संचालक भगवती प्रसाद कटियार को बनाया गया। 1967 में भरत सिंह राठौर अध्यक्ष घोषित हुए। इसके बाद जून 1969 से फरवरी 1970 तक रामसेवक मिश्र का कार्यकाल रहा। 6 माह के लिए प्रशासक की नियुक्ति के बाद 18 अगस्त 1970 को पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव के अध्यक्ष बनने के साथ सपा की पारी शुरू हो गई। 1976 में पूर्व सांसद के भतीजे सुरेंद्र सिंह यादव अध्यक्ष चुुने गए। बीच-बीच में प्रशासकों की तैनाती के साथ 20 अगस्त 1993 तक वह काबिज रहे।
इसके बाद मई 1994 में फिर पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव अध्यक्ष बने। जून 1999 में पूर्व सांसद के पुत्र सुधीर कुमार यादव को अध्यक्ष बनाया गया। बीच में प्रशासकों के कार्यकाल को छोड़कर यह 8 जुलाई 2015 तक काबिज रहे। इस बीच इनकी मृत्यु हो गई। दो माह के लिए उपाध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी को यह जिम्मेदारी दी गई। 22 सितंबर 2015 को सुधीर कुमार यादव की पत्नी व पूर्व सांसद की पुत्रवधू मनोरमा यादव को अध्यक्ष पद पर बैठाया गया, जो 8 दिसंबर 2019 तक काबिज रहीं।
इस बीच एक-एक कर डायरेक्टर हटते रहे और प्रबंध कमेटी का संचालन मंडल अल्पमत में आया गया और बोर्ड भंग हो गया। इससे 9 दिसंबर को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। मंगलवार को हुए सहकारी बैंक अध्यक्ष के चुनाव में पहली बार भाजपा के काबिज होने से इतिहास बदल गया।
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फर्रुखाबाद। जिला सहकारी बैंक की प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव में मंगलवार को भाजपा प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर एडीएम ने प्रमाणपत्र सौंपे। इसके बाद बैंक में भाजपाइयों ने जमकर नारेबाजी की। सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह फेल रही। बैंक के बाहर आतिशबाजी चलाई। पिछले 50 वर्ष से अब तक प्रशासकों को छोड़कर सपा का ही कब्जा था।
जिला सहकारी बैंक में मंगलवार को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचन के लिए सुबह 8.30 बजे से प्रक्रिया शुरू हो गई। 11.30 बजे अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार व उपाध्यक्ष पद पर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष भूदेव सिंह राजपूत ने नामांकन किया। निर्वाचन अधिकारी एडीएम विवेक श्रीवास्तव, सहायक निर्वाचन अधिकारी पीओ डूडा जय विजय सिंह ने नामांकन पत्रों की जांच की।
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एक पद पर दूसरा नामांकन न होने से मतदान नहीं हुआ। इस बीच सांसद मुकेश राजपूत, विधायक नागेंद्र सिंह राठौर, मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, सुशील शाक्य, अमर सिंह खटीक, कन्नौज के तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत व भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश गुप्ता भी पहुंच गए। करीब 2.30 बजे एडीएम ने अध्यक्ष पद पर कुलदीप गंगवार व उपाध्यक्ष पद पर भूदेव सिंह राजपूत को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर उन्हें प्रमाणपत्र सौंपे।
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निर्वाचन कक्ष से अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के निकलते ही भाजपाइयों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। दोनों निर्वाचित पदाधिकारियों को फूलमालाओं से लाद दिया। बैंक से कुछ दूरी पर आतिशबाजी चलाई गई। माला पहनाने की होड़ में सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह फेल रही। फिलहाल 50 साल से काबिज सपा का जिला सहकारी बैंक से पत्ता साफ हो गया। डायरेक्टर के 14 पदों में 13 भाजपाई हैं, जबकि एक महिला आरक्षित पद अभी रिक्त है।
बैंक में डायरेक्टरों के साथ डटे रहे कन्नौज के भाजपा नेता
अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए सुबह से ही जिला सहकारी बैंक में भाजपाई पहुंच गए। नवनिर्वाचित डायरेक्टर अन्य समितियां से शैलेंद्र सिंह राठौर, अमृतपुर से आरक्षित महिला पद पर रत्नेश द्विवेदी, के अलावा वीरेंद्र कुमार कठेरिया, दिनेश चंद्र मिश्रा, रामेंद्र सिंह, अमर सिंह कुशवाहा, नरेंद्र चंद्र पहुंच गए। वहीं कन्नौज से डायरेक्टर अरविंद त्रिपाठी(गोपाल त्रिपाठी), छिबरामऊ से आनंद किशोर, तिर्वा से अजय कुमार व रामपाल के साथ कन्नौज भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत, उपाध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक बनवारी लाल दोहरे, पूर्व जिलाध्यक्ष आनंद सिंह भी डटे रहे।
वहीं स्थानीय भाजपा नेताओं में ढाई वर्ष संघर्ष कर जिला सहकारी बैंक को चुनाव तक पहुंचाने वाले भाजपा के पूर्व महामंत्री विमल कटियार को बैंक के चुनाव में कोई भागीदारी नहीं मिली। इससे वह असंतुष्ट थे और वह पहली बार अध्यक्ष पद के चुनाव में सहकारी बैंक गए।
बताया जा रहा है जो महिला आरक्षित डायरेक्टर का एक पद रिक्त है, उस पर भी एक भाजपा पदाधिकारी की पत्नी का काबिज होना तय हो चुका है। डेलीगेट न होने से वह डायरेक्टर का चुनाव नहीं लड़ सकती थीं, इससे यह पद रिक्त रह गया। इस दौरान मिथलेश अग्रवाल, शिवांग रस्तोगी, रामवीर चौहान, पियूष त्रिपाठी, संजीव गुप्ता आदि भाजपाई मौजूद रहे।
यह रहा सहकारी बैंक में सपा का इतिहास
वर्ष 1965 से जिला सहकारी बैंक की शुरुआत हुई और पहला प्रबंधक संचालक भगवती प्रसाद कटियार को बनाया गया। 1967 में भरत सिंह राठौर अध्यक्ष घोषित हुए। इसके बाद जून 1969 से फरवरी 1970 तक रामसेवक मिश्र का कार्यकाल रहा। 6 माह के लिए प्रशासक की नियुक्ति के बाद 18 अगस्त 1970 को पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव के अध्यक्ष बनने के साथ सपा की पारी शुरू हो गई। 1976 में पूर्व सांसद के भतीजे सुरेंद्र सिंह यादव अध्यक्ष चुुने गए। बीच-बीच में प्रशासकों की तैनाती के साथ 20 अगस्त 1993 तक वह काबिज रहे।
इसके बाद मई 1994 में फिर पूर्व सांसद छोटे सिंह यादव अध्यक्ष बने। जून 1999 में पूर्व सांसद के पुत्र सुधीर कुमार यादव को अध्यक्ष बनाया गया। बीच में प्रशासकों के कार्यकाल को छोड़कर यह 8 जुलाई 2015 तक काबिज रहे। इस बीच इनकी मृत्यु हो गई। दो माह के लिए उपाध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी को यह जिम्मेदारी दी गई। 22 सितंबर 2015 को सुधीर कुमार यादव की पत्नी व पूर्व सांसद की पुत्रवधू मनोरमा यादव को अध्यक्ष पद पर बैठाया गया, जो 8 दिसंबर 2019 तक काबिज रहीं।
इस बीच एक-एक कर डायरेक्टर हटते रहे और प्रबंध कमेटी का संचालन मंडल अल्पमत में आया गया और बोर्ड भंग हो गया। इससे 9 दिसंबर को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह को प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। मंगलवार को हुए सहकारी बैंक अध्यक्ष के चुनाव में पहली बार भाजपा के काबिज होने से इतिहास बदल गया।