फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Kaum is a victim of moral weaknesses

मजहबी और नैतिक कमजोरियों का शिकार है कौम 15-57-21

Fri, 12 Mar 2021 05:37 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 05:37 PM IST
विज्ञापन
Kaum is a victim of moral weaknesses
दरगाह हुसैनिया मुजीबिया के जलसे में मौजूद लोग। - फोटो : FARRUKHABAD
नैतिक कमजोरियों का शिकार है कौम
विज्ञापन

फर्रुखाबाद। शहर की प्रसिद्ध दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में जलसा-ए-मेराजुन्नबी का आयोजन किया गया। इसमें कानपुर से आए मुख्य अतिथि मुफ्ती शाहनवाज अनवर नूरी ने कहा कि मुस्लिम कौम मजहबी और नैतिक कमजोरियों का शिकार है। अल्लाह ने जिस मकसद से उन्हें पैदा किया, उससे दूर हटते जा रहे हैं कौम के लोग।
मोहल्ला सूफी खां स्थित दरगाह में गुुरुवार देर रात जलसा हुआ। इसमें मौलाना मुफ्ती शाहनवाज अनवर नूरी ने कहा कि कौम का अतीत शानदार रहा। दीन इस्लामी व्यवस्था है। कौम के लोग रसूल की सीरत से दूर और सूफी-संतों के बताए रास्ते से भटक गए हैं। हर रोज मुसलमानों के लिए नई परेशानियां आ रहीं हैं। उन्होंने आपसी मतभेद पर चिंता जताई। कहा कि मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र से अभी भी पिछड़े हैं। तरक्की की दौड़ में पीछे रहने का कारण अशिक्षा ही है।
विज्ञापन

फतेहपुर से आए मौलाना जहीफ फतेहपुरी ने कहा कि अल्लाह के रसूल का फरमान है कि बेसहारा लोगों की मदद के लिए आगे आएं। कारी अली अहमद शाहजहांपुरी ने कलाम सुनाया कि गम-ए-हयात के मारों इधर चले आओ, सुकून-ए-दिल की दौलत है नबी के दामन में। जलसे में सभासद असलम शेर खां, वारिस अली, आफाक, इंतजार अली, मुन्ना वेलकम आदि लोग रहे। अध्यक्षता शाह फसीह मुजीबी और संचालन काजी मुताहिर अली ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

जलसे में नहीं दिखे शहर के उलमा
दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में हर साल होने वाले इस जलसे में शहर के अधिकांश उलमा मौजूद रहते थे। मगर इस बार मौलाना शमशाद अहमद चतुर्वेदी, मौलाना एजाज नूरी समेत कई मुकामी लोगों की नामौजूदगी चर्चा का विषय रही।
बरकत वाली रात है शब-ए-मेराज
खटकपुरा ग्राटगंज में शब-ए-मेराज का आयोजन
फर्रुखाबाद। मोहल्ला खटकपुरा ग्राटगंज में शाहिद उर्फ पप्पू के यहां शब-ए-मेराज का आयोजन किया गया। मौलाना एजाज नूरी ने कहा कि यह बरकत वाली रात है। इसी रात उम्मत-ए-मोहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने नमाज का कीमती तोहफा अपने हबीब के जरिए लोगों तक पहुंचाया।

अल्लाह ने अपने बंदों को सौ वक्त की नमाज और साल भर के रोजों का हुक्म दिया था। लेकिन मूसा अलैहिस्सलाम के कहने पर नबी ने अल्लाह की बारगाह में 9 बार हाजिरी लगाई। बाद में अल्लाह ने अपने प्यारे हबीब की बात मानकर पांच वक्त की नमाज और एक महीने के रोजे का फरमान सुनाया। हाजी अहमद अंसारी, खुर्शीद खान, रफी अहमद, हाजी इस्लाम खान, आफताब अंसारी, शकील मंसूरी आदि लोग थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed