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यूपी: दिव्यांगों को उपकरण बांटने के मामले में लुईस खुर्शीद को कोर्ट से मिली राहत
Wed, 04 Aug 2021 09:23 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 04 Aug 2021 09:23 PM IST
सार
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन उत्तर प्रदेश लखनऊ के विवेचक रामशंकर यादव ने कायमगंज में 2017 में डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के प्रतिनिधि व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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लुईस खुर्शीद
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद समेत दो के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के क्रियान्वयन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। आरोपियों के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में दिए गए प्रार्थना पत्र में अग्रिम जमानत मिलने की बात कही गई है।
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन उत्तर प्रदेश लखनऊ के विवेचक रामशंकर यादव ने कायमगंज में 2017 में डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के प्रतिनिधि व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें सरकार से अनुदान मिलने पर कागजों में दिव्यांगों को उपकरण बांटने और सत्यापन रिपोर्ट में अधिकारियों की फर्जी मुहर लगाने का आरोप लगाया गया था।
विवेचना के बाद सीजेएम कोर्ट में ट्रस्ट के सचिव अतहर फारूखी उर्फ मोहम्मद अतहर निवासी सुखदेव विहार नई दिल्ली और ट्रस्ट की परियोजना निदेशक लुईस खुर्शीद निवासी गुलमोहर एवेन्यू जामिया नगर थाना जामिया नगर, नई दिल्ली के खिलाफ 30 दिसंबर 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया था।
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कोर्ट में उपस्थित न होने पर सीजेएम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किए थे। मामले में अतहर फारूकी और लुईस खुुर्शीद की ओर से अधिवक्ताओं ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। इसमें कहा कि उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत मिली है।
जमानत का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। इसको लेकर सीजेएम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट के क्रियान्वयन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय में लंबित जमानत याचिका के अंतिम रूप से निस्तारण की कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है।
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आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन उत्तर प्रदेश लखनऊ के विवेचक रामशंकर यादव ने कायमगंज में 2017 में डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट के प्रतिनिधि व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें सरकार से अनुदान मिलने पर कागजों में दिव्यांगों को उपकरण बांटने और सत्यापन रिपोर्ट में अधिकारियों की फर्जी मुहर लगाने का आरोप लगाया गया था।
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विवेचना के बाद सीजेएम कोर्ट में ट्रस्ट के सचिव अतहर फारूखी उर्फ मोहम्मद अतहर निवासी सुखदेव विहार नई दिल्ली और ट्रस्ट की परियोजना निदेशक लुईस खुर्शीद निवासी गुलमोहर एवेन्यू जामिया नगर थाना जामिया नगर, नई दिल्ली के खिलाफ 30 दिसंबर 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया था।
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कोर्ट में उपस्थित न होने पर सीजेएम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किए थे। मामले में अतहर फारूकी और लुईस खुुर्शीद की ओर से अधिवक्ताओं ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। इसमें कहा कि उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत मिली है।
जमानत का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। इसको लेकर सीजेएम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट के क्रियान्वयन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय में लंबित जमानत याचिका के अंतिम रूप से निस्तारण की कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है।