फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Infection of hospital food

लोहिया अस्पताल का खाना ही बांट रहा मरीजों को संक्रमण

Sun, 05 Jan 2020 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2020 12:03 AM IST
विज्ञापन
Infection of hospital food
फर्रुखाबाद। डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल में मरीजों के लिए खाना बनाने की रसोई ही संक्रमण फैला रही है। जमीन पर बिछे कपड़े पर रोटी बेली और सेंककर रखी जाती हैं। इतने बर्तन भी नहीं, जो दाल, सब्जी ढककर रख दी जाए। मरीजों को मूंग और अरहर की पतली दाल ही दी जाती है। फलों के दो दर्शन तक नहीं होते। शासन से आने वाले धन का दुरुपयोग हो रहा है।
विज्ञापन

अस्पताल में भर्ती मरीजों का मर्ज के हिसाब से मेन्यू होता है। मगर यह रसोई में उपलब्ध नहीं है। वहां कभी मूंग की दाल बनती है तो कभी अरहर की। एक सब्जी भी बन जाती है। इसके अलावा कोई व्यवस्था नहीं होती। रसोई में व्यवस्था के नाम पर जमीन पर बिछे कपड़े पर रोटी बेली जाती और उसी पर सेंककर रख देते हैं। यही नहीं रसोई में इतने बर्तन तक नहीं हैं, जो खाना सुरक्षित रूप से रखकर मरीजों तक पहुंचाया जा सके। एक कुकर है, भगोना टूटा है। अस्पताल का संक्रमण बचाने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं हैं। इससे साफ है कि मरीजों को खाने से ही संक्रमण बांटा जाता है।
विज्ञापन

मरीजों को थमा देते हैं ठंडे दूध के पैकेट
लापरवाही की हद यह है कि मरीजों को गर्म दूध देने के बजाय उन्हें ठंडे दूध का पैकेट ही थमा दिया जाता है। ऐसे में मरीज अथवा तीमारदार पांच रुपये खर्च करके गर्म कराकर दूध का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

न डस्टबिन है, न व्हील चेयर
अस्पताल के आर्थ्रो वार्ड तो दूर किसी भी वार्ड में डस्टबिन की व्यवस्था नहीं है। लिहाजा मरीज खाना आदि सामान के रैपर इधर-उधर फेंकने को मजबूर होते हैं। यही नहीं आर्थ्रो वार्ड में अधिकतर दुर्घटना के मरीज होते हैं, लिहाजा एक अदद व्हील चेयर तक नहीं है।
कंपिल थाने के गांव सिकंदरपुर खास के सुनील चतुर्वेदी 30 दिसंबर से भर्ती हैं। बोले, सुबह कुछ नहीं मिलता। दोपहर में पतली दाल, मूंग अथवा अरहर की मिल जाती है। शाम को रोटी सब्जी। फल आदि कभी नहीं आए।
आर्थ्रो वार्ड में भर्ती नीरज ने बताया कि फलों के तो कभी दर्शन नहीं हुए। शाम को दूध आता है। वह भी ठंडा। जिन मरीजों के पास तीमारदार नहीं होता, वह दूध का उपयोग कैसे करेगा। यह अस्पताल प्रशासन को सोचना चाहिए।

जहानगंज के गांव डल्लूनगला के जगदीश चंद्र पाल ने बताया कि पतली दाल बेहद खराब होती है। यदि यहां से उठकर न जाओ, तो खाना मिलना ही मुश्किल होता है। तीमारदार न हो तो पड़ोसी की मदद लेनी पड़ती है।
यहां कोई डस्टबिन नहीं है। व्हीलचेयर की व्यवस्था भी नहीं। दूध गर्म कराने को पांच रुपये खर्च करना होता है। खाना क्या समय काटना है। वही पतली दाल।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सीएमओ डा. चंद्रशेखर ने बताया कि वह खुद मामले को देखकर जांच कराएंगे। यदि व्यवस्था गड़बड़ है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed