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Farrukhabad News: 10-15 लाख का मकान कटान में बहा, मुआवजा मिला 1.20 लाख

Sun, 28 Sep 2025 11:40 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद Updated Sun, 28 Sep 2025 11:40 PM IST
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House worth Rs 10-15 lakh washed away in erosion, compensation of Rs 1.20 lakh received
फोटो-11, गंगा के कटान से ठटा की मड़ैया में मकान तो नहीं अंतिम नीम भी गिरा। संवाद
फर्रुखाबाद। गंगा की तेज धार में कटे दो ग्राम पंचायतों के पांच मजरों के 100 से अधिक मकान बाढ़ में बर्बाद हो गए। उनकी गृहस्थी मकान समेत पानी में बह गई।
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वहीं, स्थिति यह है कि जिस मकान को बनाने में ग्रामीणों ने 10-15 लाख रुपये खर्च किए, उनके खाते में मदद के नाम पर मात्र 1.20 लाख रुपये आए। ऐसी ही बर्बादी का शिकार पांच भाइयों का परिवार अब दर-दर भटक रहा है।
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करीब डेढ़ माह से गंगा में बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीण अभी भी उबर नहीं पाए हैं। इस बार बाढ़ से सबसे अधिक बर्बादी सदर तहसील के कटरी धर्मपुर और कटरी भीमपुर ग्राम पंचायतों ने सही है। कटरी धर्मपुर के मजरा पंखियन की मड़ैया में 30 से अधिक पक्के और इतनी ही झोपड़ियां कट गईं।
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इसके अलावा भीमपुर के मजरा पृथ्वीपुर, दौली की मड़ैया, ठटा की मड़ैया गांव पूरी तरह गंगा में समा गए, जबकि दिलीप की मड़ैया कटान में आधी कट चुकी हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन मजरों में 130 मकान बताए जा रहे हैं। मगर फिलहाल प्रशासन ने करीब 100 पक्के मकानों को मुआवजे के लिए चिह्नित कर उनके खातों में 1.20-1.20 लाख रुपये भेजे हैं। मगर अभी तक चंद लोगों के खातों में ही मदद पहुंच सकी है।

1.20 लाख रुपये में तो जमीन मिलना भी मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि उनके खाते में भेजी गई सरकारी मदद नाकाफी है। जिन ग्रामीणों ने मकान बनाने में 10-15 लाख रुपये खर्च किए, उन्हें 1.20 लाख रुपये मिल रहे हैं। इस धनराशि से मकान तो दूर जमीन भी मिलना भी मुश्किल है। इसके पीछे बैंक का भी रोड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ में घर-गृहस्थी, दुकान और खेत सब कट गए, अब सिर्फ 1.20 लाख रुपये में छत और रोजी-रोटी कैसे संभव हो पाएगी।




पांच भाइयों का मकान कैसे बनेगा
ठटा की मड़ैया निवासी रामतीर्थ बताते हैं कि उन्होंने अपने मकान में पांच भाइयों के साथ रहने के लिए अलग-अलग कमरे बनाकर बाउंड्रीवॉल करवाई थी। यही नहीं रोजी रोटी सही चले, इसके लिए एक बेकरी संचालित करने के लिए भवन भी बनवाया था। इसमें करीब 15 लाख रुपये खर्च किए। मगर उनके खाते में 24 सितंबर को 1.20 लाख रुपये आए हैं। इससे कैसे मकान बनेगा समझ में नहीं आ रहा है।
नहीं मिली मदद, किराये पर रह रहे
गांव के ही सुखपाल राजपूत कहते हैं कि उनके खाते में रुपये नहीं पहुंचे। करीब 20 बीघा जमीन खरीदी थी। वहां अब गंगा का अथाह जल बह रहा है। अब चंद बीघा जमीन ही बची है। न तो मकान का पैसा मिला और न ही फसलों के लिए मुआवजा। वह लोग शहर में किराये के मकान में परिवार सहित रह रहे हैं।
बैंक में तकनीकी दिक्कत के चलते भुगतान में परेशानी
लेखपाल संजय कुमार ने बताया कि आपदा पीड़ितों को राहत एप से भुगतान होता है। राहत एप में इंडियन बैंक शो नहीं करता है। आर्यावर्त ग्रामीण बैंक का नाम उप्र ग्रामीण बैंक किया गया तो आईएफएससी कोड भी बदल गया। सॉफ्टवेयर पुराना कोड ले रहा है। उसे बदलवाया गया है। 100 ग्रामीण पक्के मकान के लिए चिह्नित हैं।
पक्के मकान कटने पर 1.20 लाख और झोपड़ी के आठ हजार मुआवजा मिल रहा है। फसल बीमा में 563 किसान शामिल किए गए। गन्ना के प्रति हेक्टेयर 17 हजार रुपये भुगतान किए जाएंगे। कोशिश है कि इस महीने के अंत तक खातों में रुपये पहुंच जाएं।

एसडीएम सदर रजनीकांत पांडेय ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों को चिह्नित कर उनके खाते में भुगतान कराया जा रहा है। एक दो दिन में सभी के खाते में मुआवजा की धनराशि पहुंच जाएगी।

फोटो-11, गंगा के कटान से ठटा की मड़ैया में मकान तो नहीं अंतिम नीम भी गिरा। संवाद

फोटो-11, गंगा के कटान से ठटा की मड़ैया में मकान तो नहीं अंतिम नीम भी गिरा। संवाद

फोटो-11, गंगा के कटान से ठटा की मड़ैया में मकान तो नहीं अंतिम नीम भी गिरा। संवाद

फोटो-11, गंगा के कटान से ठटा की मड़ैया में मकान तो नहीं अंतिम नीम भी गिरा। संवाद

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