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Farrukhabad News: दड़बेनुमा मकानों में अस्पताल, खतरे में रहती मरीजों की जान
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नोट- सीएमओ से बात होते ही वर्जन दिया जाएगा.....
पड़ताल का लोगो लगाएं......
फोटो-25 मसेनी चौराहे के निकट लकूला सड़क स्थित निजी अस्पतालों के सामने सड़क किनारे खड़े वाहन। संवाद
फोटो-26 मसेनी सड़क पर एक अस्पताल के बरामदे में पड़े बेडों पर भर्ती मरीज। संवाद
-साढ़े तीन फीट के गेट, एक तरफ रिसेप्शन दूसरी तरफ डॉक्टर का केबिन
-हॉल में लाइन से डाल दिए बेड, केबिन में भर्ती मरीजों से प्राइवेट रूम का चार्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। तीन फीट का गेट, उसके एक तरफ मरीजों को भर्ती करने के लिए रिसेप्शन और दूसरी तरफ डॉक्टर की केबिन, बीच में बमुश्किल ढाई फीट की गैलरी। बड़े से हॉल में एक तरफ पड़े 10-12 बेड तो दूसरी तरफ बनी एल्युमिनियम से पार्टीशन बनी केबिनों में एक-एक बेड पड़े।
हॉल वाले बेडों और केबिन के बीच में बमुश्किल चार फीट का खाली स्थान। उसमें पड़ी बेंचों पर तीमारदारों के बैठने की व्यवस्था। ऐसे में किसी अनहोनी के वक्त मरीज तो दूर स्वस्थ लोगों का सकुशल बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि अधिकांश अस्पतालों से निकलने का एक ही रास्ता है।
मुजफ्फरपुर के अस्पताल में अग्निकांड की घटना के बावजूद स्थानीय प्रशासन कितना सक्रिय है, इसका सच जानने के लिए मसेनी सड़क से लकूला तक अस्पतालों की शनिवार को पड़ताल की गई। सड़क के दायीं तरफ मेडिकल स्टोर के पास दो अस्पताल देखे। यह दोनों ही बड़े से हॉल में संचालित हैं। मरीज व तीमारदारों के घुसने और निकलने के लिए मात्र साढ़े तीन फीट का गेट है। हॉल में बने एक कमरे में ओटी बनी दिखी। पूरे हॉल में कहीं भी आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
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यही हाल इसके बगल में बने दूसरे अस्पताल में दिखे। यहां पहली मंजिल पर भी कुछ सामान्य मरीज भर्ती बताए गए। उस पर चढ़ने वाला जीना मात्र तीन फीट चौड़ा होगा। पश्चिम तरफ करीब पांच फीट गहरी गली है। दोनों ही अस्पतालों के सामने एक महीने पहले नाला बना है, मगर अभी तक स्ट्रेचर को लाने-ले जाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। लिहाजा मरीजों को हाथों पर उठाकर ले जाया जाता है।
इसी तरह लकूला पानी की टंकी के सामने एक अस्पताल भी सिर्फ हॉल में चल रहा है। 10-12 बेड लाइन से पड़े मिले। तीन केबिनों में बेड डालकर प्राइवेट रूम बनाए गए। इसी के अंदर एक केबिन में दवा स्टोर भी चलता मिला। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि दूसरी मंजिल पर निर्माण होने वाला है। ओटी कहां है, इसकी जानकारी महिला कर्मी नहीं दे सकी। हॉल में ही लगे हैंडपंप में सबमर्सिबल पड़ी है। आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। आग की घटना के बाद हालात बदतर होने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
जिले में 280 प्रतिष्ठान, 130 डॉक्टर
जिले में 180 से अधिक निजी अस्पताल और 50 से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर व पैथोलॉजी संचालित हैं। 280 से अधिक प्रतिष्ठानों के सापेक्ष आईएमए की सूची में 130 डॉक्टर ही हैं। इससे साफ है बड़ी तादाद में अस्पताल अमानक व डॉक्टर विहीन हैं। विभागीय खेल के चलते 10 बेड के अस्पताल में तीन गुने मरीज भर्ती हो रहे हैं।
मात्र 25 अस्पतालों की ली गई एनओसी
अग्निशमन केंद्र प्रभारी प्रांशु अवस्थी ने बताया कि करीब 25 निजी अस्पतालों की एनओसी ली गई है। शासन के निर्देश पर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के मानकों की जांच की जा रही है। अब तक सिविल अस्पताल लिंजीगंज, सीएचसी, पीएचसी व निजी अस्पतालों सहित 50 नोटिस जारी किए गए। अभियान जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन निजी अस्पतालों में एक ही गेट या जीना है, उन्हें अलग से नोटिस दिया गया है। उन्होंने बताया कि नोटिस का सही जवाब न मिलने और दोबारा जांच में भी मानक पूरे न मिलने पर कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र लिखा जाएगा।
बालरोग विशेषज्ञ खुलवा रहे अस्पताल, बेसमेंट में चल रहीं तैयारियां
मसेनी चौराहे से कादरीगेट की ओर एक भवन में बेसमेंट और भूतल पर तेजी से तैयारियां चल रही हैं। दोपहर में लोहिया अस्पताल के एक बालरोग विशेषज्ञ उसी भवन से निकले। भूतल में काम कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि इसमें बच्चों का अस्पताल खुलने वाला है। उसी की तैयारियां चल रही हैं। डॉक्टर अभी दिशा निर्देश देकर गए हैं।
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पड़ताल का लोगो लगाएं......
फोटो-25 मसेनी चौराहे के निकट लकूला सड़क स्थित निजी अस्पतालों के सामने सड़क किनारे खड़े वाहन। संवाद
फोटो-26 मसेनी सड़क पर एक अस्पताल के बरामदे में पड़े बेडों पर भर्ती मरीज। संवाद
-साढ़े तीन फीट के गेट, एक तरफ रिसेप्शन दूसरी तरफ डॉक्टर का केबिन
-हॉल में लाइन से डाल दिए बेड, केबिन में भर्ती मरीजों से प्राइवेट रूम का चार्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। तीन फीट का गेट, उसके एक तरफ मरीजों को भर्ती करने के लिए रिसेप्शन और दूसरी तरफ डॉक्टर की केबिन, बीच में बमुश्किल ढाई फीट की गैलरी। बड़े से हॉल में एक तरफ पड़े 10-12 बेड तो दूसरी तरफ बनी एल्युमिनियम से पार्टीशन बनी केबिनों में एक-एक बेड पड़े।
हॉल वाले बेडों और केबिन के बीच में बमुश्किल चार फीट का खाली स्थान। उसमें पड़ी बेंचों पर तीमारदारों के बैठने की व्यवस्था। ऐसे में किसी अनहोनी के वक्त मरीज तो दूर स्वस्थ लोगों का सकुशल बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि अधिकांश अस्पतालों से निकलने का एक ही रास्ता है।
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मुजफ्फरपुर के अस्पताल में अग्निकांड की घटना के बावजूद स्थानीय प्रशासन कितना सक्रिय है, इसका सच जानने के लिए मसेनी सड़क से लकूला तक अस्पतालों की शनिवार को पड़ताल की गई। सड़क के दायीं तरफ मेडिकल स्टोर के पास दो अस्पताल देखे। यह दोनों ही बड़े से हॉल में संचालित हैं। मरीज व तीमारदारों के घुसने और निकलने के लिए मात्र साढ़े तीन फीट का गेट है। हॉल में बने एक कमरे में ओटी बनी दिखी। पूरे हॉल में कहीं भी आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
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यही हाल इसके बगल में बने दूसरे अस्पताल में दिखे। यहां पहली मंजिल पर भी कुछ सामान्य मरीज भर्ती बताए गए। उस पर चढ़ने वाला जीना मात्र तीन फीट चौड़ा होगा। पश्चिम तरफ करीब पांच फीट गहरी गली है। दोनों ही अस्पतालों के सामने एक महीने पहले नाला बना है, मगर अभी तक स्ट्रेचर को लाने-ले जाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। लिहाजा मरीजों को हाथों पर उठाकर ले जाया जाता है।
इसी तरह लकूला पानी की टंकी के सामने एक अस्पताल भी सिर्फ हॉल में चल रहा है। 10-12 बेड लाइन से पड़े मिले। तीन केबिनों में बेड डालकर प्राइवेट रूम बनाए गए। इसी के अंदर एक केबिन में दवा स्टोर भी चलता मिला। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि दूसरी मंजिल पर निर्माण होने वाला है। ओटी कहां है, इसकी जानकारी महिला कर्मी नहीं दे सकी। हॉल में ही लगे हैंडपंप में सबमर्सिबल पड़ी है। आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। आग की घटना के बाद हालात बदतर होने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
जिले में 280 प्रतिष्ठान, 130 डॉक्टर
जिले में 180 से अधिक निजी अस्पताल और 50 से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर व पैथोलॉजी संचालित हैं। 280 से अधिक प्रतिष्ठानों के सापेक्ष आईएमए की सूची में 130 डॉक्टर ही हैं। इससे साफ है बड़ी तादाद में अस्पताल अमानक व डॉक्टर विहीन हैं। विभागीय खेल के चलते 10 बेड के अस्पताल में तीन गुने मरीज भर्ती हो रहे हैं।
मात्र 25 अस्पतालों की ली गई एनओसी
अग्निशमन केंद्र प्रभारी प्रांशु अवस्थी ने बताया कि करीब 25 निजी अस्पतालों की एनओसी ली गई है। शासन के निर्देश पर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के मानकों की जांच की जा रही है। अब तक सिविल अस्पताल लिंजीगंज, सीएचसी, पीएचसी व निजी अस्पतालों सहित 50 नोटिस जारी किए गए। अभियान जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन निजी अस्पतालों में एक ही गेट या जीना है, उन्हें अलग से नोटिस दिया गया है। उन्होंने बताया कि नोटिस का सही जवाब न मिलने और दोबारा जांच में भी मानक पूरे न मिलने पर कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र लिखा जाएगा।
बालरोग विशेषज्ञ खुलवा रहे अस्पताल, बेसमेंट में चल रहीं तैयारियां
मसेनी चौराहे से कादरीगेट की ओर एक भवन में बेसमेंट और भूतल पर तेजी से तैयारियां चल रही हैं। दोपहर में लोहिया अस्पताल के एक बालरोग विशेषज्ञ उसी भवन से निकले। भूतल में काम कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि इसमें बच्चों का अस्पताल खुलने वाला है। उसी की तैयारियां चल रही हैं। डॉक्टर अभी दिशा निर्देश देकर गए हैं।