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खुदा की बंदगी में झुके सिर, मांगी दुआएं
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 08 Apr 2015 11:47 PM IST
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गंगा-जमुनी तहजीब की प्रतीक ऐेतिहासिक दरगाह में शेख मखदूम बुर्राक लंगर
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जहां के उर्स व मेले में अपार जनसमूह उमड़ा। दरगाह में मैनपुरी के सांसद
तेज प्रताप सिंह ने भी हाजिरी दी। सैकड़ों छड़ीबाज पीर की सदाओं के बीच
सज्जादा नशीन का डोला लेकर दरगाह पहुंचे। उर्स में कानपुर, मैनपुरी और
फिरोजाबाद से भी अकीदतमंद शिरकत करने आए। उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के
लिए मेला प्रबंध समिति ने चाक-चौबंद व्यवस्था की थी।
शेखपुर स्थित दरगाह में शेख मखदूम बुर्राक के उर्स के आखिरी दिन विशाल मेला लगा। शेख मखदूम बुर्राक ईराक की राजधानी बगदाद में 1181 ईस्वी में पैदा हुए और बादशाहत उन्हें विरासत में मिली थी। उन्हें बादशाहत के बजाए फकीरी पसंद आई। उन्होंने राजगद्दी को छोड़कर रुहानी जिंदगी को अपनाया और दुनिया के कई देशों का भ्रमण करते हुए भारत आ पहुंचे। यहां भी उन्होंने सूफी संतों की संगत में काफी समय गुजारा और खुदा की तलाश में गंगा नदी के किनारे भोजपुर
की ऐतिहासिक नगरी में डेरा डालकर लोगों को इंसानियत का पैगाम पहुंचाने में लीन हो गए । यह 1350 ईस्वी में दुनिया से रुखसत हो गए। तभी से उनकी याद में लगातार उर्स मेले का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार सुबह लालिमा फूटने से पहले लोगों का दरगाह पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर 2 बजे दरगाह के अकबरी गेट से छड़ीबाज खिरका शरीफ (पैगंबरे इस्लाम का लिवास) लेकर भोजपुर की ओर रवाना हुए। इससे पहले मेला समिति प्रबंधकों ने छड़ीबाजों को संयमित
रहने और अनुशासन का सबक पढ़ाया। रास्ता साफ करने के लिए अलर्ट जारी किया। पुलिस बल भी इस दौरान चौकन्ना रहा। भोजपुर चिल्लाहगाह में सज्जादा नशीन को खिरका शरीफ पहनाया गया। पैगंबरे इस्लाम का लिबास पहनते ही सज्जादा नशीन मूर्छित हो गए। बेहोशी की हालत में उन्हें डोले पर लिटाकर अकीदतमंद नंगे पैर हाथ में लाठीडंडे लहराते हुए ले चल पीर की सदाओं के बीच करीब 4 बजे दरगाह पहुंचे। यहां सज्जादा नशीन को दरगाह का तवाफ (परिक्रमा) कराया
गया और लतीफ कमालगंजवी ने फारसी भाषा में रूबाई पढ़ी। इसे सुनते ही सज्जादा नशीन अजीजुल हक गालिब मियां को होश आ गया। इसके बाद शेख मखदूम का कुलफातिहा संपन्न हुआ। इसमें सज्जादा नशीन ने मुल्क की तरक्की व खुशहाली की हाथ फैलाकर खुदा से दुआ मांगी। इस दौरान मैनपुरी के सांसद तेजप्रताप सिंह ने भी दरगाह में चादर चढ़ाई और दुआ मांगी।
इस अवसर पर सुबोध यादव, महानगर अध्यक्ष विश्वास गुप्ता, जमालुद्दीन सिद्दीकी, अरशद जमाल, चांद मोहम्मद खां, रिंकू चौहान, रजी, अनस सिद्दीकी, शकील खां, गुड्डन, हाफिज खुर्शीद, मोहसिन शमसी, फुरकान अहमद, असलम शेर खां, जाकिर खां, मुजम्मिल खां, सलम कुरैशी, परवेज अली और मौलाना एहसानुल हक आदि मौजूद रहे।
स्वास्थ्य कैंप लगा
शेखपुर मेले में लगाए गए स्वास्थ्य शिविर में मरीजों की भीड़ जमा रही। चिकित्सकों ने रोगियों को दवाएं बांटीं। डा. निरंजन कुमार, डा. जुबैर, सुभाष कटियार, एएनएम चुन्नी देवी ने रोगियों का परीक्षण कर उन्हें दवा वितरित की।
खूब बिके तवर्रुक के लड्डू
शहर से लेकर शेखपुर मेले तक तवर्रुक के लड्डुओं की जमकर बिक्री हुई। शहर के पक्कापुल, बीबीगंज के अलावा शेखपुर मेले में भी लोगों ने तवर्रुक के लड्डू की जमकर खरीददारी की। बताते चलें कि शेखपुर के मेले में तवर्रुक के लड्डुओं का काफी महत्व है। इस बार 70 से 150 रुपये प्रति किलो तक तवर्रुक के लड्डू बिके।
शेखपुर स्थित दरगाह में शेख मखदूम बुर्राक के उर्स के आखिरी दिन विशाल मेला लगा। शेख मखदूम बुर्राक ईराक की राजधानी बगदाद में 1181 ईस्वी में पैदा हुए और बादशाहत उन्हें विरासत में मिली थी। उन्हें बादशाहत के बजाए फकीरी पसंद आई। उन्होंने राजगद्दी को छोड़कर रुहानी जिंदगी को अपनाया और दुनिया के कई देशों का भ्रमण करते हुए भारत आ पहुंचे। यहां भी उन्होंने सूफी संतों की संगत में काफी समय गुजारा और खुदा की तलाश में गंगा नदी के किनारे भोजपुर
की ऐतिहासिक नगरी में डेरा डालकर लोगों को इंसानियत का पैगाम पहुंचाने में लीन हो गए । यह 1350 ईस्वी में दुनिया से रुखसत हो गए। तभी से उनकी याद में लगातार उर्स मेले का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार सुबह लालिमा फूटने से पहले लोगों का दरगाह पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर 2 बजे दरगाह के अकबरी गेट से छड़ीबाज खिरका शरीफ (पैगंबरे इस्लाम का लिवास) लेकर भोजपुर की ओर रवाना हुए। इससे पहले मेला समिति प्रबंधकों ने छड़ीबाजों को संयमित
रहने और अनुशासन का सबक पढ़ाया। रास्ता साफ करने के लिए अलर्ट जारी किया। पुलिस बल भी इस दौरान चौकन्ना रहा। भोजपुर चिल्लाहगाह में सज्जादा नशीन को खिरका शरीफ पहनाया गया। पैगंबरे इस्लाम का लिबास पहनते ही सज्जादा नशीन मूर्छित हो गए। बेहोशी की हालत में उन्हें डोले पर लिटाकर अकीदतमंद नंगे पैर हाथ में लाठीडंडे लहराते हुए ले चल पीर की सदाओं के बीच करीब 4 बजे दरगाह पहुंचे। यहां सज्जादा नशीन को दरगाह का तवाफ (परिक्रमा) कराया
गया और लतीफ कमालगंजवी ने फारसी भाषा में रूबाई पढ़ी। इसे सुनते ही सज्जादा नशीन अजीजुल हक गालिब मियां को होश आ गया। इसके बाद शेख मखदूम का कुलफातिहा संपन्न हुआ। इसमें सज्जादा नशीन ने मुल्क की तरक्की व खुशहाली की हाथ फैलाकर खुदा से दुआ मांगी। इस दौरान मैनपुरी के सांसद तेजप्रताप सिंह ने भी दरगाह में चादर चढ़ाई और दुआ मांगी।
इस अवसर पर सुबोध यादव, महानगर अध्यक्ष विश्वास गुप्ता, जमालुद्दीन सिद्दीकी, अरशद जमाल, चांद मोहम्मद खां, रिंकू चौहान, रजी, अनस सिद्दीकी, शकील खां, गुड्डन, हाफिज खुर्शीद, मोहसिन शमसी, फुरकान अहमद, असलम शेर खां, जाकिर खां, मुजम्मिल खां, सलम कुरैशी, परवेज अली और मौलाना एहसानुल हक आदि मौजूद रहे।
स्वास्थ्य कैंप लगा
शेखपुर मेले में लगाए गए स्वास्थ्य शिविर में मरीजों की भीड़ जमा रही। चिकित्सकों ने रोगियों को दवाएं बांटीं। डा. निरंजन कुमार, डा. जुबैर, सुभाष कटियार, एएनएम चुन्नी देवी ने रोगियों का परीक्षण कर उन्हें दवा वितरित की।
खूब बिके तवर्रुक के लड्डू
शहर से लेकर शेखपुर मेले तक तवर्रुक के लड्डुओं की जमकर बिक्री हुई। शहर के पक्कापुल, बीबीगंज के अलावा शेखपुर मेले में भी लोगों ने तवर्रुक के लड्डू की जमकर खरीददारी की। बताते चलें कि शेखपुर के मेले में तवर्रुक के लड्डुओं का काफी महत्व है। इस बार 70 से 150 रुपये प्रति किलो तक तवर्रुक के लड्डू बिके।