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ग्लैंडर्स पॉजिटिव अश्व को दें इच्छा मृत्यु
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फर्रुखाबाद। घोड़ों में होने वाली ग्लैंडर्स बीमारी का कोई इलाज नहीं है। ऐसी दशा में पशुओं को इच्छा मृत्यु दी जाती है। यह बात अश्व कल्याण कार्यक्रम में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कही।
बढ़पुर ब्लाक सभागार में ब्रुक हॉस्पिटल फॉर एनीमल इंडिया की ओर से अश्व कल्याण कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डा. राजकिशोर, परियोजना प्रबंधक डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सीवीओ ने बताया कि ग्लैंडर्स एक ऐसी बीमारी है जो कि अश्व से किसी और पशु में अथवा मनुष्य को भी हो सकती है। इसका कोई भी इलाज नहीं होगा। यदि कोई अश्व पॉजिटिव आता है, तो उसको इच्छा मृत्यु दी जाती है। इसके बगले विभाग 25 हजार रुपये प्रोत्साहन स्वरूप अश्व मालिक को देगा। उन्होंने अन्य योजनाएं भी बताईं। डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता ने अश्व को काबू करने के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर डा. एफए जनार्दन, डा. मनोज मिश्रा, श्याम आदि मौजूद रहे।
प्रोजेक्टर से समझाया इलाज का तरीका
कार्यक्रम में प्रोजेक्टर से अश्व (घोड़े) के शरीर के भाग, नस्ल, रंग पर चर्चा की गई। घोडे़ के घायल होने पर क्या एवं कैसे उपचार करेंगे, काबू कैसे करेंगे, बताया गया। अश्व में होने वाली बीमारी कोलिक व सर्रा के कारण, लक्षण, बचाव पर जानकारी दी गई। अश्व मे लंगड़ापन एक अहम समस्या है। यह बीमारी कई कारणों से होती है। कम उम्र में काम लेना, अधिक वजन लादना, समय पर नालबंदी व सही नाल बंदी न होना।
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बढ़पुर ब्लाक सभागार में ब्रुक हॉस्पिटल फॉर एनीमल इंडिया की ओर से अश्व कल्याण कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डा. राजकिशोर, परियोजना प्रबंधक डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सीवीओ ने बताया कि ग्लैंडर्स एक ऐसी बीमारी है जो कि अश्व से किसी और पशु में अथवा मनुष्य को भी हो सकती है। इसका कोई भी इलाज नहीं होगा। यदि कोई अश्व पॉजिटिव आता है, तो उसको इच्छा मृत्यु दी जाती है। इसके बगले विभाग 25 हजार रुपये प्रोत्साहन स्वरूप अश्व मालिक को देगा। उन्होंने अन्य योजनाएं भी बताईं। डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता ने अश्व को काबू करने के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर डा. एफए जनार्दन, डा. मनोज मिश्रा, श्याम आदि मौजूद रहे।
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प्रोजेक्टर से समझाया इलाज का तरीका
कार्यक्रम में प्रोजेक्टर से अश्व (घोड़े) के शरीर के भाग, नस्ल, रंग पर चर्चा की गई। घोडे़ के घायल होने पर क्या एवं कैसे उपचार करेंगे, काबू कैसे करेंगे, बताया गया। अश्व में होने वाली बीमारी कोलिक व सर्रा के कारण, लक्षण, बचाव पर जानकारी दी गई। अश्व मे लंगड़ापन एक अहम समस्या है। यह बीमारी कई कारणों से होती है। कम उम्र में काम लेना, अधिक वजन लादना, समय पर नालबंदी व सही नाल बंदी न होना।
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